सहारनपुर/उत्तर प्रदेश. फीस माफी को लेकर प्रदेश भर में ज्ञापनों अपीलों और प्रदर्शनों का दौर जारी है. अभिभावक लॉकडाउन के दौरान काम धंधा चौपट होने के कारण फीस माफ करने की अपील कर रहे हैं तो स्कूल संचालक हर हाल में फीस लेना चाहते हैं. स्कूल संचालक शिक्षकों और विद्यालय के सामने आर्थिक संकट की समस्या बताकर फीस वसूली कर रहे हैं. ऐसे में जिलाधिकारी सहारनपुर ने फीस को लेकर जो अपील की है वह अभिभावकों को निराश करने वाली है.
जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा है कि पिछले शैक्षिक सत्र की शेष फीस, माह अप्रैल और मई की फीस अभिभावक 30 जून तक हर हाल में स्कूल को जमा कराएं. जिलाधिकारी के इस अपील से अभिभावकों के फीस माफी की मंशा को झटका लगा है.
जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने शासनादेश ना आने का हवाला देते हुए कहा है कि फीस माफी को लेकर शासन से फिलवक्त कोई आदेश नहीं आया है ऐसे में अभिभावकों को फीस जमा कर देनी चाहिए.
विद्यालयों का ऑनलाइन क्लास का हवाला
दरअसल जिलाधिकारी की अपील के पीछे विद्यालयों की ऑनलाइन क्लास का हवाला है जिसमें उन्होंने कहा है कि विद्यालय अप्रैल और मई में छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं केवल 10% छात्रों ने ही फीस को जमा कराया है ऐसे में विद्यालयों के सामने कर्मचारियों और शिक्षकों को वेतन भुगतान में कठिनाई आ रही है.
अभिभावकों का तर्क
पूरे मामले को लेकर अभिभावकों का कहना है कि लॉकडाउन के चलते उनकी आर्थिक और माली हालत खराब हो गई है जिसके चलते अभिभावक फीस जमा करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं ऐसे में अभिभावक लगातार सरकार से और जिलाधिकारी से फीस माफी की अपील कर रहे हैं.
निष्कर्ष क्या है
पूरी खबर का सार यह है कि जिलाधिकारी ने अपने अपील में शासन की ओर से फीस माफी को लेकर या उसकी स्थगन को लेकर कोई आदेश ना मिलने का हवाला दिया है और अभिभावकों से फीस जमा करने की अपील की है जिसके बाद अगले शैक्षणिक सत्र को सुचारू रूप से विद्यालय चला सकेंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि यदि शासन स्तर से कोई निर्णय लिया जाता है तो आने वाले महीनों में लिए गए शुल्क को समायोजित कर दिया जाएगा.

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