उत्तर प्रदेश का लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार आए दिन कोई ना कोई कीर्तिमान ऐसा स्थापित कर देती है जो चर्चा का विषय बन जाता है. कोरोना काल में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार यानी आज के दिन लखनऊ म्युनिसिपल कारपोरेशन की बॉन्ड लिस्टिंग बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में कर दी. मुख्यमंत्री ने बेल बजाकर इसकी लिस्टिंग की. इसके साथ ही लखनऊ म्युनिसिपल कारपोरेशन बॉन्ड जारी करने वाला उत्तर भारत का पहला नगर निगम बन गया है. एलएमसी यानी लखनऊ म्युनिसिपल कारपोरेशन का बॉन्ड 200 करोड़ रुपए का है. आपके मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे होंगे कि आखिर बॉन्ड होता क्या है? और बांड के जरिए नगर निगम पैसे कैसे इकट्ठा करते हैं? आइए इसी का जवाब जानते हैं…
क्या होता है बॉन्ड
दरअसल, बॉन्ड एक तरह का साख पत्र होता है जिसके तहत आम जनता या संस्थाओं से धन जुटाया जाता है. बॉन्ड जारी करने वाली संस्था एक निश्चित समय के लिए रकम उधार लेती है और निश्चित रिटर्न यानी ब्याज देने के साथ मूलधन वापस करने की गारंटी देती है.
सरकार को बांड जारी करने की क्यों जरूरत पड़ी
शहर के नगर निगम, नगर निकाय, म्युनिसिपल बांड जारी करते हैं. बड़े शहरों के विकास में कामों पर काफी पैसा खर्च किया जाता है. सरकारी मदद एक लिमिट तक ही मिल सकती है और ऐसे में निकाय म्युनिसिपल बोर्ड जारी करते हैं. इसके जरिए जो पैसा आता है, उसे शहर के विकास पर खर्च किया जाता है इस विकल्प को पैसा जुटाने का अच्छा माध्यम माना जाता है.
सरकार की योजना क्या है
दरअसल, नगर निगम के लिए इस तरह के बांड पैसा इकट्ठा करने का अच्छा साधन बन रहे हैं. लखनऊ के बाद उत्तर प्रदेश सरकार गाजियाबाद, वाराणसी, कानपुर और आगरा के लिए भी इस प्लान पर काम कर सकती है. लखनऊ नगर निगम ने बॉन्ड की लिस्टिंग करने से पहले ही प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए 200 करोड रुपए जुटा लिए हैं. इस कदम से सरकार काफी उत्साहित है और यही कारण है कि बाकी शहरों के लिए भी योजना बना रही है.
क्या कहते हैं लखनऊ के नगर आयुक्त
पूरे मामले पर लखनऊ नगर निगम के नगर आयुक्त अजय द्विवेदी कहते हैं कि
“लखनऊ के म्युनिसिपल कारपोरेशन यानी एलएमसी के बॉन्ड से निवेशकों को भी फायदा होगा. निवेशकों को इस पर 8.50 फ़ीसदी सालाना ब्याज मिलेगा. इसकी परिपक्वता अवधि 10 साल की है. बॉन्ड की लॉन्चिंग के बाद लखनऊ नगर निगम की छवि बदलेगी और इसे देश विदेश से निवेश जुटाने में भी मदद मिलेगी.

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