उत्तर प्रदेश का सहारनपुर. पुलिस की अनुशंसा पर समाजिक ताने बाने के खिलाफ काम कर रहे छह अभियुक्तों को आरोपी मानते हुए अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने जिले से बाहर का रास्ता दिखा दिया. 6 महीने का प्रतिबंध लगाते हुए एडीएम ई ने सभी अभियुक्तों को जिले से बदर करते हुए दूर रहने का आदेश दिया है. निष्कासन की यह प्रक्रिया स्थानीय थानों से मिली रिपोर्ट और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुशंसा पर की गई है. अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने छह के छह अभियुक्तों को समाज के लिए खतरा माना और सजा के तौर पर गुंडा एक्ट की धारा 3 के मुताबिक दोषी मानकर जिला बदर की कार्रवाई की. अब सभी अभियुक्त 6 महीने तक जिले से निष्कासित रहेंगे.
कहां के हैं सभी अभियुक्त
जिन लोगों पर कार्रवाई हुई है उनमें थाना कुतुबशेर क्षेत्र के 4 जिनमे से 3 ढोली खाल के हैं और एक एकता कॉलोनी का निवासी है. जबकि एक अभियुक्त देहात कोतवाली के शेखपुरा कदीम और एक बेहट थाना क्षेत्र के पथरवा का रहने वाला है.
यह हैं अभियुक्त
1- मोंटू पुत्र नफीस उर्फ लंगड़ा निवासी मोहल्ला ढोली खाल थाना कुतुबशेर,
2- नदीम पुत्र सलीम निवासी मोहल्ला ढोली खाल थाना कुतुब शेर,
3- जीशान पुत्र फुरकान उर्फ मठरीका निवासी ढोली खाल थाना कुतुब शेर,
4- इमरान पुत्र रिजवान निवासी एकता कॉलोनी थाना कुतुब शेर,
5- आकील पुत्र शकील निवासी शेखपुरा कदीम थाना देहात कोतवाली और
6- काला पुत्र यासीन कुरेशी निवासी ग्राम पथरवा थाना बेहट.
किस पर होती है जिला बदर की कार्रवाई
किसी खास इलाके में दहशत फैलाने और आर्थिक लाभ लेने वाले बदमाशों को जिला बदर किया जाता है. जिला बदर करने के लिए अब गंभीर धाराओं में मुकदमा जरूरी नहीं है. नए कानून के मुताबिक मानव तस्करी, गौ हत्या, पशु तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी, जाली नोट, नकली दवाओं का व्यापार और अवैध खनन जैसे क्राइम पर भी गुंडा एक्ट जैसी कार्रवाई की जाएगी. आरोपियों को 14 दिन के बजाय 60 दिन तक हवालात में डाला जा सकता है. इतना ही नहीं उनकी संपत्ति भी जप्त की जा सकती है.
कैसे होती है कार्रवाई
थानेदार की रिपोर्ट के आधार पर गुंडा एक्ट ऑफ गैंगस्टर एक्ट दोनों में जिलाधिकारी को कार्रवाई का अधिकार है. जिलाधिकारी अपराध की गंभीरता को देखते हुए जिला बदर की कार्रवाई करते हैं.
अब बिना गुंडा एक्ट के भी जिला बदर की कार्रवाई
पहले बदमाशों को जिला बदर करने के लिए उनके विरुद्ध गुंडा एक्ट की कार्यवाही करना जरूरी होता था. किसी खास इलाके में लगातार अपराध करने और आतंक फैलाने वाले बदमाशों के विरुद्ध गुंडा एक्ट की कार्रवाई की जाती है. इसकी प्रक्रिया काफी लंबी होती है. गुंडा एक्ट की कार्रवाई होने के बाद बदमाशों को जिला बदर करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है.
लेकिन जिला बदर के इस नियम में बदलाव हुआ है. बदलाव का कारण सक्रिय अपराधियों पर राजनीतिक परिस्थितियों के चलते गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं हो पाना है. ऐसे में अपराधी गुंडा एक्ट की कार्रवाई से बच जाते थे और उन पर जिला बदर की कार्यवाही नहीं हो पाती थी. लेकिन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने जिला बदर की कार्रवाई में बदलाव किया और गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमा या गुंडा एक्ट की कार्रवाई होने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया. ऐसे में आतंक का पर्याय बने किसी बदमाश को जिला बदर किया जा सकता है.

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