हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव को लेकर हरकत में है. रोज पंचायत चुनाव को लेकर नई खबरें मीडिया में आ रही हैं. सरकार हर हाल में 30 अप्रैल से पहले चुनाव संपन्न कराना चाहती है. यही कारण है कि सरकार ने पंचायत चुनाव के लिए जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम प्रधान पदों के लिए आरक्षण जारी कर दिया है. नई आरक्षण नीति के बाद कई जिलों के समीकरण बदल गए जिसके चलते ग्राम पंचायत सरकार में शामिल होने वाले कई लोगों के अरमान पर पानी फिर जाएगा.
जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत आरक्षण जारी होने के बाद राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज है. क्षेत्र पंचायत की राजनीति पर बारीकी से नजर रखने वालों से लेकर राजनीतिक पार्टियों का तापमान सर्दी में भी बढ़ गया है. नए आरक्षण जारी होने के बाद ऐसे दावेदारों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जिन्होंने महीनों पहले से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी थी और प्रचार में लगे हुए थे.
8 मार्च तक दर्ज होंगी आपत्तियां
राज्य सरकार ने शुक्रवार को प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अनंतिम आरक्षण सूची जारी की. इस प्रस्तावित सूची पर 8 मार्च तक सरकार ने आपत्तियां मांगी है. अंतिम सूची 13 और 14 मार्च 2021 को प्रकाशित की जाएगी. इस बाबत अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह ने मीडिया के सामने सुबे के 75 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष, 826 विकास खंडों में प्रमुख क्षेत्र पंचायत और 58194 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों के चुनाव के लिए अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और महिला के अलावा सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित कोटे की सूची जारी की.
अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह के मुताबिक प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अनुसूचित जाति के वर्ग में 6, महिला समेत कुल 16 सीटें आरक्षित की गई हैं. पिछड़ा वर्ग में 7 महिला समेत 20 सीटें आरक्षित की गई हैं जबकि महिलाओं के लिए 12 सीटों के अलावा 27 अन्य सीटें अनरिजर्व्ड यानी अनारक्षित की गई हैं. महिलाओं के लिए प्रदेश भर में जिला पंचायत के लिए सभी वर्गों में 25 सीटें आरक्षित की गई हैं.
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटें
अपर मुख्य सचिव पंचायती राज के मनोज कुमार सिंह के मुताबिक शामली, बागपत, लखनऊ, कौशांबी, हरदोई और सीतापुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है. कानपुर नगर, औरैया, चित्रकूट, झांसी, महोबा, जालौन, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर और रायबरेली जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. वहीं संभल, हापुड़, एटा, बरेली, कुशीनगर, वाराणसी और बदायूं जिला पंचायत अध्यक्ष पद अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है. जबकि बलिया, आजमगढ़, फर्रुखाबाद, इटावा, बांदा, ललितपुर, अंबेडकर नगर, पीलीभीत, बस्ती, सहारनपुर, संत कबीर नगर, चंदौली और मुजफ्फरनगर जिला पंचायत अध्यक्ष पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रखा गया है.
वे सीटें जहां जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अनारक्षित रखी गईं
सरकार द्वारा जारी सूची के मुताबिक मैनपुरी, फिरोजाबाद, कासगंज, मऊ, प्रतापगढ़, कन्नौज, बहराइच, हमीरपुर, अमेठी, गाजीपुर, जौनपुर और सोनभद्र जिला पंचायत अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए रिजर्व रखा गया है जबकि अलीगढ़, हाथरस, आगरा, मथुरा, प्रयागराज, फतेहपुर, कानपुर देहात, गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, अयोध्या, सुल्तानपुर, शाहजहांपुर, सिद्धार्थनगर, मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा, मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, भदोही और उन्नाव जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अनारक्षित श्रेणी में रखा गया है.
ब्लॉक प्रमुखों की आरक्षण श्रेणी
सूची के अनुसार ब्लाक प्रमुखों के लिए कुल 826 सीटों में अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए 4 सीटों समेत इस वर्ग के लिए कुल 5 सीटें आरक्षित की गई है जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए 86 सीटों समेत इस वर्ग के लिए कुल 171 सीटें आरक्षित की गई. इसी तरह ब्लॉक प्रमुख की अन्य पिछड़ा वर्ग में महिलाओं के लिए 97 सीट समेत इस संवर्ग में कुल 223 सीटें आरक्षित की गई हैं. प्रदेश में 113 सीटें महिलाओं के लिए और 314 सीटें आरक्षित हैं. प्रदेश भर में 58194 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान की 19659 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं.

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