SURENDRA CHAUHAN
सहारनपुर. जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने जनपद के सभी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों से कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण घोषित आपदा अवधि में मासिक आधार पर शुल्क लेने तथा किसी भी छात्र-छात्रा व अभिभावक से तीन माह का अग्रिम शुल्क जमा कराने के बाध्य नहीं करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क निर्धारण अधिनियम के तहत कठोर कार्यवाही अम्ल में लाई जाएगी.
जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा 22 मार्च से लॉकडाउन घोषित करने के बाद जनपद के सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हैं. लॉकडाउन के कारण छात्र-छात्राओं के अभिभावकों व परिजनों के कारोबार व रोजगार प्रभावित हुए हैं. उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की अप्रैल माह की फीस पूर्व की भांति अप्रैल माह में ही जमा कराने की सूचनाएं मिल रही हैं. जबकि लॉकडाउन से प्रभावित अनेक अभिभावक अप्रैल माह में एडवांस फीस देने में असमर्थ हैं. उन्होंने निर्देश दिया कि कोरोना वायरस के
संक्रमण के कारण घोषित आपदा अवधि में मासिक आधार पर शुल्क लिया जाए. किसी भी छात्र व अभिभावक को तीन माह का अग्रिम शुल्क जमा कराने के लिए बाध्य न किया जाए और विद्यालय द्वारा चलाई जा रही ऑन लाईन पढ़ाई से किसी भी छात्र-छात्रा को वंचित न किया जाए. साथ ही शुल्क जमा न करने के कारण किसी भी छात्र-छात्रा का नाम विद्यालय से काटा जाए.
जिलाधिकारी ने विद्यालयों के प्रबंधक व प्रधानाचायों से आपदा के दृष्टिगत शुल्क को स्थगित करने पर सकारात्मक रूप से विचार करने तथा स्थगित किए जाने वाले शुल्क को आगामी महीनों में किश्तों के आधार पर समायोजित करने का भी सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि कुछ प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों द्वारा अभिभावकों व परिजनों को स्मार्ट फोन खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है. वर्तमान परिस्थितियों के दृष्टिगत यह उचित नहीं है. इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी छात्र-छात्रा, अभिभावक व परिजन को स्मार्ट फोन खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए.

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