देहरादून. अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे कांग्रेस के माननीयों ने पार्टी को प्रदेश में संकट में डाल दिया है. देश की सबसे पुरानी पार्टी की उत्तराखंड इकाई पर बिखराव का संकट आ गया है. शीर्ष नेतृत्व से लेकर प्रदेश नेतृत्व के नेता इस बिखराव को रोकने में नाकाम दिखाई दे रहे हैं. बग़ावत घर से बाहर निकल गयी है. कांग्रेस नेता हरिश धामी ने नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने हृदयेश पर मनमानी का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ने की धमकी दी है.
धामी की धमकी में नया मोड़ तब आ गया जब पार्टी के वरिष्ठतम नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने खुले रूप से धामी का समर्थन कर दिया. उन्होंने धामी के बचाव में नेता प्रतिपक्ष को कटघरे में खड़ा किया.
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने फेसबुक अकाउंट से पोस्ट किया और धामी के मुद्दे को आगे बढ़ाया. उन्होंने लिखा कि
“एक बड़ा सवाल उछाला जा रहा है, श्री हरीश धामी का नाम किसने दिया, हां नाम मैंने दिया, दर्जनों और नाम भी दिये. श्री हरीश धामी स्वयं दो बार व एक बार मुझे विधानसभा का चुनाव जिता चुके हैं, स्वयं जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्य रहे हैं और उस क्षेत्र में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ब्लाॅक प्रमुख के चुनाव में पार्टी को महत्वपूर्ण उपलब्धियां दिलवा चुके हैं.सीमान्त क्षेत्र में कांग्रेस के स्तम्भ हैं.”
उन्होंने आगे कहा
मैंने महासचिव पद के लिए उनका नाम दिया. ऐसे नामों को जिन्हें मैंने, अन्य दो दर्जन नामों के साथ महासचिव पद के लिये दिया, वहां पार्टी ने उन्हें सचिव पद पर नियुक्त कर दिया, ऐसे छः लोग हैं.
रावत की कलम यहीं नहीं रुकी उन्होंने आगे लिखा
मुझे खुशी है, राज्य में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने हरीश धामी जी की प्रशंसा में बहुत कुछ कहा है, उनको उचित पद नहीं दिया गया, इस तथ्य को स्वीकार किया है और कहा है, यह जिम्मेदारी नाम देने वाले व्यक्ति की है.
उन्होंने टस मसाहट में सवाल किया और कहा
काश सूची जारी करने से पहले इस तथ्य को ध्यान में रखकर श्री धामी, गुलजार आदि से बात कर ली जाती. मैं भी कहीं अदृश्य नहीं था, मुझे सूचित कर लिया जाता, मैं लिस्ट में सुधार हेतु सक्षम अथाॅरिटी से बात कर लेता. इतना सब कुछ कहने, सुनने की आवश्यकता नहीं पड़ती.
उन्होंने वरिष्ठतम नेताओं पर न केवल सवाल उठाया बल्कि कार्यकर्ताओं के लिए गलत शब्द बोलने पर तल्खी जाहिर करते हुए कहा


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