देशभर की निगाहें दिल्ली के तीन बॉर्डर टिकरी, सिंधु और गाजीपुर पर टिकी हुई हैं. किसान पिछले 2 महीने से आंदोलनरत हैं. 26 जनवरी को दिल्ली में किसानों ने जमकर हिंसा की. उसके बाद दिल्ली पुलिस की एफ आई आर के चलते और हिंसा से भावुक कुछ किसान संगठन आंदोलन से अलग हो गए और आंदोलन बिखरने लगा. लेकिन 28 तारीख की शाम को टिकैत रोए और आंदोलन में फिर से जान पड़ गई. आंदोलन का जिक्र इस खबर में इसलिए क्योंकि इस आंदोलन को हवा देने के लिए कांग्रेस, वामदल, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय लोक दल समेत कई दलों ने ताकत झोंक दी है. लेकिन आंदोलन से इतर भारतीय जनता पार्टी पंचायत चुनाव की तैयारी में लग गई है. पार्टी ने पंचायत चुनाव को लेकर ताल ठोक दी है.
अभी तक पंचायत चुनाव 2021 का ऐलान नहीं हुआ. प्रधान समेत कई पदों पर आसीन होने का सपना लिए कई प्रत्याशी आरक्षण लिस्ट का इंतजार कर रहे हैं. वहीं भाजपा चुनाव की ओर अपने कदम बढ़ा चुकी है. पार्टी के नेता और कार्यकर्ता लगातार वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने पंचायत चुनाव को देखते हुए मंडल ब्लॉक स्तरीय बैठकों का आयोजन शुरू कर दिया है. यह सिलसिला प्रदेश भर में 3 फरवरी तक चालू रहेगा. पंचायत चुनाव के लिए संगठन के प्रभारी बनाए गए विधान परिषद सदस्य और प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक ने बताया कि पंचायत चुनाव की तैयारी के लिए 3 फरवरी तक मंडल स्तरीय बैठकों का सिलसिला चलेगा और प्रदेश के सभी 1600 संगठनात्मक ग्रामीण मंडल में यह बैठकें आयोजित की जाएंगी.
पाठक ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि पार्टी इन बैठकों के जरिए पंचायत चुनाव की रणनीति को आम कार्यकर्ताओं तक पहुंचाएगी.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने की शुरुआत
बैठकों के इस सिलसिले को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने सहारनपुर जिले के हरी कॉलेज गागलहेड़ी में हरी झंडी दिखाई. महत्वपूर्ण है कि राज्य में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत सभी राजनीतिक दलों ने पंचायत चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभाने का ऐलान किया है.
जेपी नड्डा ने किया था दौरा
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन के महामंत्री बीएल संतोष पिछले हफ्ते राज्य के दो दिवसीय दौरे पर आए थे. दोनों ही नेताओं ने कई सत्रों में चली बैठकों में पंचायत चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया और संगठन से लेकर सरकार तक सभी प्रमुख लोगों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की.
पंचायत चुनाव की ताजा स्थिति क्या है
पंचायत चुनाव की ताजा स्थिति की अगर बात की जाए तो प्रदेश में ना तो अभी तारीख तय हुई है ना ही सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हुई है लेकिन इन सबके बीच भाजपा ने इस चुनाव के लिए ग्राम सभा स्तर तक अपना संगठनात्मक ढांचा तैयार कर लिया है.
क्या है भाजपा की तैयारी
पंचायत चुनाव प्रभारी विजय बहादुर पाठक के मुताबिक प्रदेश के 75 जिलों में 3051 जिला पंचायत वार्ड है और हर वार्ड में पार्टी की ओर से एक संयोजक की नियुक्ति की गई है. इसके अलावा सभी 826 ब्लॉकों में भी भाजपा के संयोजक बनाए गए हैं. राज्य की 58194 ग्राम सभाओं में भी भाजपा ने संयोजकों की तैनाती की है.
राजनीतिक पंडित क्या कहते हैं
राजनीति का हर पहलू जानने वाले राजनीतिज्ञों की मानें तो राज्य में निकट भविष्य में होने वाला पंचायत चुनाव 2022 के विधानसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास साबित होगा. उनके मुताबिक अगर समय पर पंचायत चुनाव होता तो 25 दिसंबर से पहले सभी ग्राम सभाओं में नए ग्राम प्रधान चुन लिए गए होते. लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना के चलते चुनाव में देरी हो गई. मतदाता सूची जारी कर दी गई है. हालांकि, भाजपा पंचायत चुनाव में किन पदों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी इसे लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है.
पदों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर पाठक ने बताया कि जिला पंचायत सदस्यों के सभी पदों पर भाजपा अपने उम्मीदवार उतारेगी लेकिन ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत के सदस्यों के पद पर अभी फैसला नहीं हुआ है और यह बाद में तय किया जाएगा कि पार्टी इन पदों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी या नहीं.
बिना पार्टी सिंबल के लड़े जाते हैं यूपी में चुनाव
यूपी में पंचायत चुनाव पार्टी के चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़े जाते बावजूद इसके राजनीतिक दल जिला पंचायत सदस्यों के उम्मीदवारों को खुला समर्थन देकर मैदान में उतारते हैं और जिला पंचायत सदस्य ही जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव करते हैं. इसके अलावा क्षेत्र पंचायत सदस्य के जरिए ब्लॉक प्रमुख का निर्वाचन किया जाता है. यह जान लेना महत्वपूर्ण है कि जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल 13 जनवरी को समाप्त हो गया था जबकि ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 17 मार्च को समाप्त हो जाएगा .

Add Comment