उत्तर प्रदेश सरकार ने लॉक डाउन अवधि में राहत पहुंचाने के मकसद से ग्रीष्मावकाश के दौरान खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने का फैसला लिया है. इस योजना के तहत सरकार 1.80 करोड़ बच्चों को उनके घर मिड डे मील का राशन और अभिभावकों के खातों में ₹1000 भेजेगी . इस संबंध में अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं.
सरकार की ओर से अपने आदेश में अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने खाद्यान्न के विषय में कहा है कि 78 दिन के हिसाब से प्रति छात्र 7.8 किलो प्राथमिक 11.40 किलो उच्च प्राथमिक खाद्यान्न नामित कोटेदार के माध्यम से उपलब्ध कराया जाना है. प्रिंसिपल एक समय में दो से तीन अभिभावकों को स्कूल में बुला कर राशन दे सकते हैं.
1000 रुपये खाते में भेजने के लिए यह होगा तरीका
अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने कहा है कि परिवर्तन लागत की धनराशि के भुगतान के लिए खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रेरणा पोर्टल पर छात्रों का डाटा स्कूल के प्रिंसिपल को उपलब्ध कराया जाएगा. प्रिंसिपल अभिभावक का नाम, मोबाइल नंबर, बैंक खाता आदि की पूरी जानकारी लेकर भेजेंगे. जानकारी प्राप्त होते ही 1000 रुपये की धनराशि प्रत्येक छात्र के अभिभावक के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी.
एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रेणुका कुमार ने सोशल डिस्टेंसिंग के पालन का निर्देश देते हुए कहा कि जनपद विकासखंड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर अन्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से इस कार्य में सहयोग लिया जाए ताकि इसको जल्दी से जल्दी पूरा किया जा सके.
अभी इस तरह से मिलता है बजट
एडीशनल चीफ सेक्रेट्री रेणुका कुमार ने अपने पत्र में प्रति छात्र पर मिलने वाले बजट का जिक्र करते हुए कहा है कि वर्तमान में 4.48 रूपया प्रतिदिन प्राथमिक विद्यालय के लिए और 6.71 रूपया प्रतिदिन उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए स्वीकृत है. वहीं 1 अप्रैल से भारत सरकार द्वारा निर्धारित दरों के मुताबिक प्राथमिक विद्यालय के लिए 4.97 रुपए प्रतिदिन और उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए 7.45 रुपए प्रतिदिन स्वीकृत हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लॉक डाउन के पीरियड में यह बहुत बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. सरकार निरंतर मजदूरों और मजबूरों के लिए कोशिश कर रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसका लाभ सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को ही मिल सकेगा.

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