उत्तर प्रदेश का सहारनपुर. जिले में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रही है. वीडियो में एक मृत शरीर को नुमाइश कैंप श्मशान घाट में बैटरी रिक्शा द्वारा लाया जाना बताया जा रहा है. वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मृतक कोरोना से संक्रमित था. मृत्यु होने के बाद परिजनों ने जिला अस्पताल से एंबुलेंस की डिमांड की लेकिन उनकी डिमांड पर कोई कार्यवाही नहीं हुई. मजबूरन परिजन मृतक को ई रिक्शा में रखकर श्मशान घाट ले आए जहां उसका अंतिम संस्कार किया गया. पूरे मामले पर सहारनपुर के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ बीएस सोढ़ी ने अनभिज्ञता जताई है. मामला सोशल मीडिया पर आने के बाद सहारनपुर की मेडिकल व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है.
जिलाधिकारी अखिलेश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ एस चन्नप्पा ने संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए रात दिन एक कर दिया है. मरीजों को दवा से लेकर ऑक्सीजन तक की की व्यवस्था तक के लिए जिलाधिकारी ने नोडल ऑफिसर तैनात किए हैं. अधिकारियों को गंभीरता से लोगों की मदद के लिए सक्रिय रहने के लिए जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया है. बावजूद इसके सहारनपुर से आज दामन पर दाग लगाने वाली खबर आई है.
क्या है मामला
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ई रिक्शा में रखी हुई एक बॉडी वायरल हो रही है. बॉडी के पास खड़ा एक व्यक्ति वीडियो बना रहा है जिसमें वह दावा कर रहा है कि मृतक कोरोनावायरस संक्रमित था. मृत्यु के बाद मृतक के परिजनों ने सरकारी अस्पताल से मृतक को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग की लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिली.
वीडियो बनाने वाला शख्श कह रहा है कि
यह देख रहे हैं आप कोविड-19 शव को किस तरह से बैटरी की रिक्शा पर रखकर सहारनपुर के सरकारी अस्पताल से नुमाईश कैंप के श्मशान भूमि पर लाया गया है क्योंकि परिवार के सदस्यों का कहना है कि इनको 112 नंबर और 108 नंबर पर कॉल करने पर भी एम्बुलेंस नही दी गई.
इस मामले पर चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर बी एस सी डी से जानकारी मांगी गई तो उनका कहना था कि ऐसा मामला उनकी जानकारी में नहीं है. वहीं डॉक्टर सोढ़ी यह भी समझाते दिखे कि बॉडी पोस्टमार्टम की है या कोविड की. डॉक्टर सोडी ने बताया कि अस्पताल में दो एंबुलेंस खड़ी है.
सवाल यह है कि जब दो एम्बुलेंस खड़ी है तो पीड़ित को क्यों नही मिली. पूरे मामले पर जिलाधिकारी अखिलेश सिंह से न्याय की उम्मीद की जा रही है. पूरे मामले की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की जरूरत है. ऐसी घटनाओं के चलते प्रदेश सरकार जिले के आला अधिकारी की मेहनत पर भी सवाल खड़ा करती हैं. देखना महत्वपूर्ण होगा कि अब जिला प्रशासन इस मामले पर क्या एक्शन लेता है?




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