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आपदा को अवसर में बदलने वालों से नाराज़ जिलाधिकारी ने अपने अधिकारों का किया प्रयोग, जारी कर दिए नकेल कसने के आदेश

उत्तर प्रदेश का सहारनपुर. देश में वैश्विक महामारी कोरोना तांडव किए हुए हैं. ऑक्सीजन से लेकर दवाई और अस्पताल से लेकर एंबुलेंस तक हर व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. मरीजों की अचानक बढ़ी भीड़ से व्यवस्था चरमरा गई है. इसी बीच आपदा को अवसर में बदलने वाले गिद्ध भी सक्रिय हो गए हैं. जनपद में एंबुलेंस चालकों के द्वारा बीमारों की मजबूरी का फायदा उठाने की खबरें लगातार सामने आ रही थीं. एम्बुलेंस कर्मियों की मनमानी की शिकायतें भी लगातार लोग जिलाधिकारी अखिलेश सिंह से कर रहे थे.

व्यवस्था को बे-पटरी होते हुए देख जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने अपने अधिकारों का प्रयोग कर एंबुलेंस चालकों पर नकेल कसने के फरमान जारी कर दिया. जिलाधिकारी ने जिले में एंबुलेंस की दरें तय कर दी. साथ ही साथ यह चेतावनी भी दी कि यदि आदेशों की अवहेलना होती है तो कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें. इतना ही नही जिलाधिकारी ने एम्बुलेंस कर्मचारियों और चालकों की मनमानी पर रोक के लिए कई अधिकारियों के नंबर भी जारी किए हैं.

अपने आदेश में क्या कहा जिलाधिकारी ने

कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए उन्हें अस्पताल से रेफरल अस्पताल या फिर आवास तक मरीज़ों को ले जाने के लिए एम्बुलेंस चालक और उनके स्वामी मनमानी के अनुसार किराया वसूल रहे हैं, इसलिए आवश्यक है कि कोविड-19 संक्रमित रोगियों के इलाज हेतु उपयोग में लाए जाने वाले एंबुलेंस कि किराए तय कर दी जाए जिससे आम जनमानस को निर्धारित दर पर एंबुलेंस या वाहन उपलब्ध हो सके.

किस नियम के तहत डीएम ने लिया फैसला

जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने इस नियम के लिए द एपीडिमिक डिसीज एक्ट 1897, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 और उत्तर प्रदेश महामारी कोविड-19 वीनियमावली-2020 को अपने आदेश का आधार बनाया है. उक्त धाराएं जिलाधिकारी को ऐसे प्रतिबंध लगाने के लिए अधिकार प्रदान करती हैं.

एंबुलेंस के लिए क्या है नई दरें

जिलाधिकारी अखिलेश सिंह के आदेश के मुताबिक

-ऑक्सीजन रहित एंबुलेंस के लिए 10 किलोमीटर की दूरी तक ₹500 उसके बाद ₹20 प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करना होगा.

-ऑक्सीजन वाली एंबुलेंस के लिए 10 किलोमीटर की दूरी के लिए ₹800 और इससे ऊपर ₹24 प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करना होगा.

-वेंटिलेटर सपोर्टेड एंबुलेंस के लिए ₹1000, 10 किलोमीटर की दूरी तक और उसके बाद ₹100 प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करना होगा.

महत्वपूर्ण यह है कि यह दर प्रति ट्रिप के अनुसार ही देनी होंगी. मरीज को कोविड अस्पताल तक पहुंचाने के बाद एंबुलेंस की वापसी का किराया नहीं देना होगा.

परेशानी होने पर इस नंबर पर करें शिकायत

जिलाधिकारी अखिलेश सिंह के आदेश के मुताबिक कोविड-19 संक्रमित मरीज या उसके परिजन को एंबुलेंस चालक द्वारा अधिक दर या धनराशि लिए जाने पर पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 या ट्रैफिक हेल्पलाइन नंबर 945440 2397 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए.

इन अधिकारियों को पालन कराने की जिम्मेदारी

पूरी व्यवस्था पर निगरानी के लिए पुलिस अधीक्षक यातायात प्रेमचंद मोबाइल नंबर 9454458191, राम प्रकाश मिश्र संभागीय परिवहन अधिकारी मोबाइल नंबर 800 544 1071 को नोडल अधिकारी नामित किया गया है. अधिकारियों पर निर्धारित दरों के आधार पर सेवाओं को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होगी.

नियम का उल्लंघन और करने वाले पर क्या होगी कार्रवाई

जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने कहा है कि जो वाहन चालक या स्वामी निर्धारित किराए से अधिक धनराशि मरीज से या परिजनों से वसूल करेंगे ऐसे लोगों के विरुद्ध एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897, उत्तर प्रदेश महामारी कोविड-19 विनीयमावली 2020 के तहत कार्रवाई की जाएगी.

उधर जिलाधिकारी एम्बुलेंस चालकों की मनमानी पर लगा रहे थे रोक इधर सरकारी एम्बुलेंस चालक जंगल में कर रहा था मौज

आपदा की घड़ी में भी GPS ट्रैकिंग सिस्टम से काफी फायदा मिलता है. ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम को इंस्टाल करने से किसी भी चीज की पोजीशन का सटीक ब्योरा रखा जा सकता है. वाहनों में लगे GPS ट्रैकिंग सिस्टम की वजह से कौन सा वाहन कहां स्थित है? उसके बारे में पता लगाया जा सकता है और इसका रिकार्ड रखा जा सकता है. लेकिन ऐसे दावों को भी धत्ता बताकर सरकारी एंबुलेंस के ड्राइवर मनमानी करने से बाज नहीं आते.

जनपद सहारनपुर के ब्लॉक पुवारका की एंबुलेंस (नंबर up 32 EG 1498 ) जिसे आज covid जैसी आपातकालीन स्थिति में अस्पताल में मरीज के इर्द-गिर्द होना चाहिए था. लेकिन शासन-प्रशासन के दावों को धत्ता बताकर एंबुलेंस का पायलट एंबुलेंस को जंगल में घंटो खड़ी करके भांग मसलने में व्यस्त रहा. आज की परिस्थितियों में जहां हर मिनट एंबुलेंस की जरूरत मरीजों को लाने ले जाने के लिए पढ़ रही है. ऐसे समय में ड्राइवर की यह लापरवाही प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों में ना सिर्फ विघ्न है बल्कि कई जानो से खिलवाड़ भी है. ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए उचित जांच करके उचित कार्रवाई करना बहुत जरूरी है.

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Prakash Pandey

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