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अफवाह फैलाने के आरोप में पूर्व IAS पर मुकदमा, जवाब में अधिकारी की तीखी प्रतिक्रिया, जानिए पूरा मामला

उत्तर प्रदेश का वाराणसी. अफवाह फैलाने के आरोप में उत्तर प्रदेश के पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है. सिंह पर आरोप है कि बीते शनिवार सीएम योगी आदित्यनाथ के वाराणसी दौरे के समय सोशल मीडिया पर उन्होंने एक पोस्ट किया था. पोस्ट में उन्होंने अस्पताल और इलाज की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे. हालांकि, स्थानीय पुलिस ने वीडियो को पूराना और गलत करार दिया है. यह भी महत्वपूर्ण है कि पूर्व आईएएस ने अपनी पोस्ट भी डिलीट कर दी. उन पर अफवाह फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है.

रिटायर्ड आईएएस ने दी तीखी प्रतिक्रिया

मुकदमे पर सूर्य प्रताप सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लिखा “योगी सरकार को समझना चाहिए कि जब कोई कमियों को उजागर करता है तो एक तरह से वह सरकार की मदद ही करता है. सरकार कमियों को सुधारें ना कि उनको छुपाने के लिए मुकदमा बाजी का सहारा ले. मेरे जैसे लोगों के खिलाफ f.i.r. करने से कोरोना से मर रहे लोगों की जान बच सके तो जरूर करो.

क्या है मामला

बता दें शनिवार को सुबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी में कोविड-19 महामारी के बचाव और इलाज की समीक्षा करने पहुंचे थे जिस पर सूर्य प्रताप सिंह ने लिखा “योगी जी उछल कूद से काम नहीं चलेगा, परिणाम भी चाहिए. आप वाराणसी में समीक्षा कर रहे हैं जरा गरीब के इस रुदन को भी सुन लीजिएगा. वाराणसी के अस्पताल में एडमिट कोरोना पॉजिटिव मरीज का शव नाले में मिला. 2 दिन से मरीज लापता था.परिजन खोज रहे थे.

पुलिस क्या कहती है पूरे मामले पर

एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस काशी जोन विकास चंद्र पाठी ने जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि सूर्य प्रताप सिंह की पोस्ट की एसीपी भेलूपुर से जांच कराई गई है. जांच में सामने आया कि जो वीडियो पोस्ट किया गया था वह 24 सितंबर 2020 का है. उस दौरान नाले में शव मिलने की घटना की मजिस्ट्रियल जांच भी हुई थी. उस प्रकरण में कोई कार्रवाई अवशेष नहीं है. सूर्य प्रताप सिंह ने पुराना वीडियो गलत तथ्यों के साथ पेश कर अफवाह फैलाने और प्रशासन की छवि को धूमिल करने का काम किया है. इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

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Prakash Pandey

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