वैश्विक महामारी कोरोना 2020 से ही पूरी दुनिया में उत्पात मचा रहा है. दुनियाभर में कोरोना को को लेकर हाहाकार है. कोरोना के दूसरे चरण का सबसे अधिक प्रभाव भारत में देखने को मिल रहा है. कोरोना की दूसरी लहर और संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या ने आम आदमी से लेकर सरकार तक को चिंता में डाल दिया है. देश के कई इलाकों में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी के साथ ही जरूरी दवाईयों की किल्लत होने संबंधी खबरें टीवी चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया की सुर्खियां बनी हुई है. कोविड-19 की जांच करने वाले लैबों पर दबाव बढ़ गया है. इन सभी के बीच, आईसीएमआर (ICMR) ने मंगलवार को कोरोना टेस्ट को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है.
आईसीएमआर ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि आरटीपीसीआर (RTPCR) और रैपिड एंटीजन टेस्ट (RAT) टेस्ट में अगर कोई व्यक्ति एक बार कोरोना पॉजिटिव आ जाता है, तो उसे दोबारा उसका RTPCR या RAT टेस्ट नहीं होगा. आईसीएमआर की ओर से जारी एडवाइजरी में लैब पर दबाव कम करने के लिए आरटीपीसीआर जांच को कम से कम करने और रैपिड एंटीजन जांच को बढ़ाने की बात कही गई है. एडवाइजरी में कहा गया है कि देश में तेजी से बढ़ रहे संक्रमितों के कारण कोरोना जांच करने वाली प्रयोगशालाएं बेहद दबाव में काम कर रही हैं. ऐसे में बढ़ते कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जांच के लक्ष्य को पूरा करने में कठिनाई हो रही है. वहीं, प्रयोगशालाओं का कुछ स्टाफ भी संक्रमित है.
रैपिड एंटीजन टेस्ट की वकालत
आईसीएमआर ने अपनी एडवाइजरी में रैपिड एंटीजन टेस्ट की वकालत की और कहा है कि
रैपिड एंटीजन टेस्ट को कोरोना जांच के लिए जून 2020 में अपनाया गया था. मौजूदा दौर में यह कंटेनमेंट जोन और कुछ हेल्थ सेंटर पर ही सीमित है. इस टेस्ट का फायदा यह है कि इससे 15 से 20 मिनट में ही कोरोना की रिपोर्ट का पता चल जाता है. ऐसे में मरीज को जल्द ठीक होने में भी मदद मिलती है.
RAT और ड्राइव थ्रू बूथ की सलाह
आईसीएमआर ने एडवाइजरी में रैपिड एंटीजन टेस्ट को सभी सरकारी और प्राइवेट हेल्थकेयर फैसिलिटी में अनिवार्य करने की बात कही है. साथ ही शहरों, कस्बों, गांवों में लोगों की बड़े स्तर पर जांच के लिए RAT बूथ लगाने को कहा है. संस्थान ने स्कूल-कॉलेज, कम्युनिटी सेंटर, खाली स्थानों को भी शामिल करने की बात कही है. इतना ही नही आईसीएमआर ने कहा है कि ये बूथ 24 घंटे सातों दिन काम करें. स्थानीय प्रशासन को अपने स्तर पर ड्राइव थ्रू बूथ भी शुरू करने की सलाह भी आईसीएमआर ने दी है.
क्या क्या सुझाव दिए आईसीएमआर ने
- कोरोना संक्रमित के उपचार के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज के समय टेस्ट की आवश्यकता नहीं है.
- लैब में दबाव कम करने के लिए अंतरराज्यीय परिवहन करने वाले स्वस्थ लोगों का आरटीपीसीआर टेस्ट की अनिवार्यता को पूरी तरह से हटाया जाए.
- फ्लू या कोविड 19 के लक्षण वाले लोगों को गैर जरूरी यात्रा, अंतरराज्यीय यात्रा करने से बचना चाहिए. ताकि संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकें.
- गैर लक्षण वाले लोगों को यात्रा के दौरान कोरोना से जुड़े गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए.
- राज्यों को आरटीपीसीआर टेस्ट को मोबाइल सिस्टम के जरिये बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.(साभार)




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