कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर में बढ़ते मामलों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल से ही लॉकडाउन लगा रखा है. रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन के समय को आगे बढ़ाते हुए 17 मई तक लॉक डाउन की घोषणा कर दी. इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामलों को रोकने के लिए अंतरराज्जीय और अंतर जिला यात्राओं पर सरकार ने सख्ती का फैसला लिया है. प्रदेश में बिना आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट के किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है. बॉर्डर पर टेस्ट रिपोर्ट की चेकिंग की वजह से कई इलाकों में जाम की स्थिति नजर आ रही है जिससे लोग परेशान हैं.
आगरा से लगती हुई मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमाओं पर स्थानीय प्रशासन द्वारा सख्ती बरती जा रही है. प्रशासन बॉर्डर से वाहनों को वापस लौट आ रहा है. वही मंडल के कोटवन से लगी हरियाणा सीमा पर सख्ती से भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस बॉर्डर पर केवल खाने पीने का सामान लेकर आ रहे मालवाहक ट्रकों व सेना के वाहनों को ही आवाजाही के लिए अनुमति दी गई है.
दरअसल, राज्य सरकार ने प्रदेश में कोरोनावायरस के संक्रमण पर काबू करने के लिए लॉक डाउन की अवधि को बढ़ा दिया. रविवार को अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल ने इस संबंध में जानकारी दी और बताया कि कर्फ्यू की अवधि 17 मई सुबह 7:00 बजे तक बढ़ा दी गई है. इस दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों को बंद रखा जाएगा.
सरकार के निर्देश के मुताबिक लॉक डाउन की अवधि में बाहर निकलने के लिए पास की जरूरत होगी. यूपी सरकार ने कहा है कि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों, मेडिकल या जरूरी सेवाएं, आवश्यक वस्तुओं का परिवहन, डाक सेवा, समेत पत्रकारों को ई-पास लेने की जरूरत नहीं होगी. बाकी सभी को पास के बिना आने जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.




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