वैश्विक महामारी कोरोना के दूसरे चरण में मची चीख-पुकार के बीच सर्वोच्च न्यायालय ने रविवार को केंद्र और राज्य सरकारों को एक बार फिर पूर्ण लॉकडाउन लगाए जाने पर विचार करने के लिए कहा है. सर्वोच्च न्यायालय ने रविवार को अपने एक आदेश में कहा कि दूसरी लहर के दौरान जिस रफ्तार से नए मामले बढ़ रहे हैं उसके मद्देनजर पूरे देश में एक बार फिर पूर्ण लॉकडाउन लगाए जाने पर विचार किया जाना चाहिए. इतना ही नहीं सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी बात आगे जारी रखते हुए कहा कि आवासीय प्रमाण पत्र या फिर पहचान पत्र के अभाव में किसी मरीज को अस्पताल में दाखिल होने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.
जान लेना महत्वपूर्ण है कि देश कोरोना कोहराम मचा रहा है. पिछले 24 घंटे में ही देशभर में 3.68 लाख के सामने आए हैं. ऐसे में लोगों की भी लॉकडाउन को लेकर मांग बढ़ने लगी है लेकिन केंद्र सरकार अभी लॉकडाउन के मूड में नजर नहीं आ रही है. देश में परिस्थितियों की भयावह तस्वीर को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया और केंद्र के साथ राज्य सरकारों से लॉकडाउन पर विचार करने के लिए कहा. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा
“वह ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाएं जहां ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने की संभावना हो. वायरस को फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार जनहित में लॉकडाउन भी लगा सकती हैं.”
देश में दूसरी लहर पर काबू पाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, नीति आयोग के टास्क फोर्स के सदस्यों, विशेषज्ञों और अपने विदेशी समकक्षों से लगातार बैठकें कर बातचीत कर रहे हैं. इतना ही नहीं देश की अदालतें भी पूरे मामले पर निगाह बनाए हुए हैं और लगातार राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को दिशा निर्देश जारी कर रही है.
64 पेज के आदेश में क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
रविवार को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को कोरोना की वर्तमान स्थिति पर करीब 64 पर पेज का आदेश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा कि
“किसी भी मरीज को स्थानीय आवासी प्रमाण पत्र या पहचान पत्र की कमी के लिए किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के अस्पतालों में भर्ती या आवश्यक दवाओं से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.”
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्र सरकार को 2 सप्ताह के भीतर अस्पतालों में भर्ती करने को लेकर एक राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश दिया जिसका सभी राज्य सरकारों द्वारा पालन किया जाएगा और तब तक किसी भी मरीज को स्थानीय आवास की प्रमाण पत्र और पहचान पत्र के अभाव में प्रवेश या आवश्यक दवाओं से वंचित नहीं किया जाएगा.
लॉकडाउन पर क्या कहा सर्वोच्च न्यायालय ने
देश में कंप्लीट लॉकडाउन लगाने की पैरोंकारी करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि
“हम केंद्र और राज्य सरकारों से अपील करते हैं कि वह ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाएं जहां अधिक संख्या में लोगों के इकट्ठा होने की संभावना हो सकती है. वायरस को फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार जनहित में लॉकडाउन भी लगा सकती हैं.”
कमजोर लोगों की व्यवस्था करे सरकार
हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने कंप्लीट लॉकडाउन पर सरकार को सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए व्यवस्था करने के लिए भी निर्देशित किया है. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि
“लॉकडाउन का असर सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों पर पड़ सकता है. ऐसे में सरकार लॉकडाउन से पहले ऐसे लोगों के लिए व्यवस्था करें.”
ऑक्सीजन पर क्या कहा कोर्ट ने
सर्वोच्च न्यायालय ने रविवार को अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकारें और केंद्र सरकार मिलकर ऑक्सीजन का बफर स्टॉक बनाएं ताकि अप्रत्याशित स्थिति में इसकी कमी ना हो. जरूरत पड़ने पर जल्द से जल्द ऑक्सीजन की सप्लाई की जा सके.





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