उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बिगुल बज गया है. आरक्षण की सूची भी जारी हो चुकी है. हालांकि आरक्षण को लेकर आपत्तियों के लिए समय भी दिया गया है. राजनीतिक पार्टियों ने जहां कमर कस ली है वहां ग्राम सरकार में अपनी पोजीशन बनाने के लिए लोगों ने जी तोड़ मेहनत करनी शुरू कर दी है. इसी बीच सैफई से बड़ी खबर मिली है. यूपी पंचायत की नई आरक्षण सूची के चलते मुलायम परिवार का तिलसिम सफाई में टूटेगा. दरअसल, सफाई ब्लॉक प्रमुख की सीट अनुसूचित महिला के लिए आरक्षित हुई है. इस सीट पर पिछले 25 साल से यादव परिवार का कब्जा था.
सफाई की सीट आरक्षित होने पर 2014 में मैनपुरी से सांसद रहे मुलायम सिंह के नाती तेज प्रताप यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने सफाई को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है. इस सवाल के जवाब में कि पिछली सरकारों में ब्लॉक प्रमुख पद के लिए आरक्षण क्यों नहीं हुआ? तो तेज प्रताप यादव खामोश हो गए. जान लेना महत्वपूर्ण है सफाई की गिनती देश के सबसे आधुनिक गांव में की जाती है. सफाई में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, अंतर्राष्ट्रीय स्विमिंग पूल, एस्ट्रो टर्फ हॉकी स्टेडियम, सैफ़ई चिकित्सा विश्वविद्यालय और लंबी चौड़ी साफ-सुथरी सड़कें देखने को मिलती हैं.
अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित हुई सीट
नई आरक्षण सूची के मुताबिक सफाई सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हुई है. हालांकि इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा कि सैफ़ई ब्लॉक प्रमुख की सीट पर उनके परिवार का ना सही उनकी पार्टी का कोई व्यक्ति ही ताबीज होगा. तेज प्रताप यादव का यह दावा सही भी हो सकता है. इसकी वजह है मुलायम सिंह परिवार की ओर से सफाई से जिस अनुसूचित जाति के उम्मीदवार को खड़ा किया जाएगा वह आसानी से जीत दर्ज कर लेगा. महत्वपूर्ण बात यह है कि सफाई पंचायत से 55 बीडीसी सदस्य 1 ब्लॉक प्रमुख का चुनाव होता है. पिछला रिकॉर्ड उठाकर देखा जाए तो 55 में से आमतौर पर सभी समाजवादी पार्टी के ही बीडीसी सदस्य चुने जाते हैं.
ब्लॉक बनने के बाद से मुलायम परिवार का रहा कब्जा
सैफ़ई के 1995 में ब्लॉक बनने के बाद से मुलायम परिवार का कब्जा रहा. मुलायम सिंह यादव के सबसे बड़े भाई रतन सिंह के बेटे रणवीर सिंह ब्लाक प्रमुख बने. 5 साल बाद यानी 2000 में चुनाव होने पर रणबीर सिंह दोबारा ब्लॉक प्रमुख बने. सन 2002 में रणवीर सिंह की मृत्यु हो जाने के बाद मुलायम सिंह के बेहद करीबी चौधरी नत्थू सिंह के बेटे अरविंद इस पद पर काबिल हो गए. 2005 में ब्लॉक प्रमुख की जिम्मेदारी मुलायम सिंह के छोटे भाई अभय राम के बेटे धर्मेंद्र यादव को मिली. बदायूं के सांसद बनने से पहले धर्मेंद्र यादव 2005 से 2010 तक ब्लाक प्रमुख के पद पर रहे.
विकल्प अभी बाकी है
नई आरक्षण सूची सामने आने के बाद से उम्मीदवारों में मायूसी का आलम है लेकिन अभी विकल्प बाकी है. दरअसल सरकार ने 8 मार्च तक प्रकाशित आरक्षित और अनारक्षित सूचियों पर दावे और आपत्तियों को मांगा है. यदि संशोधन होता है तो चुनाव लड़ने वालों के चेहरे पर मुस्कुराहट देखी जा सकेगी.





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