राजनीति भी बड़ी कमाल की चीज़ है. पल में नेता क्या कहें पल भर में कितना बदलें अंदाज़ा लगाना मुश्किल है. पार्टियों के प्रति आस्था कब बदल जाए कोई भरोसा नहीं ऐसा ही कुछ मध्य प्रदेश में हुआ है.
दमोह से कांग्रेस विधायक राहुल सिंह लोधी की भी आस्था पार्टी से खत्म हो गयी और उन्होंने भाजपा में आस्था जताते हुए रविवार को कमल का फूल पकड़ लिया. कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका है. कारण राज्य की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 3 नवंबर को होने हैं जिनका नतीजा 10 नवंबर को आएगा. कांग्रेस के दमोह सीट से सिटिंग विधायक राहुल सिंह लोधी विधानसभा सभा से इस्तीफा देकर भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष बी डी शर्मा, राज्यमंत्री भूपेंद्र सिंह और प्रदेश महामंत्री भगवान दास की उपस्थिति में भाजपाई बन गए. रिपोर्ट्स कहती हैं कि ऐसा कदम उठाने वाले लोधी कांग्रेस के चौथे विधायक हैं. राज्य में कांग्रेस के 87 विधायक बच गए हैं.
कांग्रेस छोड़ राहुल सिंह लोधी के भाजपा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्विटर पर उनके शामिल होने का कारण और स्वागत दोनों किया. सीएम ने लिखा-
“कांग्रेस की रीति नीति से व्यथित होकर दमोह से विधायक पद से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल होने वाले युवा जन सेवक श्री राहुल जी का हार्दिक स्वागत है. प्रदेश का विकास भाजपा के नेतृत्व में ही संभव है. मैं विश्वास दिलाता हूं कि आपके क्षेत्र की जनता के कल्याण में कोई कमी नहीं आएगी.”
कभी साथ न छोड़ने वाले 17 साल में बदल गए
राहुल लोधी कांग्रेस का वह चेहरा हैं जिन्होंने दमोह विधानसभा में बीजेपी से यह सीट छीन अपने पाले में डाल दी थी. सीट जीतने के बाद राहुल सिंह लोधी ने पार्टी में आस्था जताते हुए कहा था कि उनको कांग्रेस पार्टी ने विधायक बनाया है और वह हमेशा कांग्रेस के साथ रहेंगे. राहुल लोधी 2003 से ही कांग्रेस के साथ बने हुए थे. मीडिया में चल रही चर्चाओं के मुताबिक जुलाई 2020 में राहुल सिंह के चचेरे भाई प्रद्युमन के बीजेपी में शामिल होने के बाद भी राहुल ने कहा था कि उनके कांग्रेस में जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने कहा था कि पहले भी कई बार उनके पास ऑफर आया है लेकिन वह नहीं गए. उन्होंने पार्टी में आस्था जताते हुए कहा था कि कांग्रेस उन्हें राजनीति में लाई है इसलिए वह कांग्रेस के साथ हैं लेकिन महज 18 महीने में ही उन्होंने आस्था बदलते हुए भाजपा का दामन थाम लिया.
इससे पहले भी कांग्रेसी विधायक भाजपा में हुए शामिल
ऐसा पहला मौका नहीं है जब कोई कांग्रेसी विधायक भाजपा में शामिल हुआ हो. इससे पहले जुलाई में मंधाता से नारायण पटेल, बड़ा मलहरा से प्रद्युमन सिंह लोधी और नेपानगर से विधायक सुमित्रा देवी कासडेकर ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था और भाजपाई बन गए थे.

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