बोल वचन खास

क्या है गुपकार समझौता जो एक बार फिर चर्चा में है, क्या राजनीतिक दल फिर से बड़ा प्लान कर रहे हैं, पढिये

श्रीनगर. गुरुवार के बाद अचानक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर एक बार फिर चर्चा में है. धारा 370 हटाने के बाद घाटी में राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हो गई हैं. नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला के घर गुपकार समझौते की चर्चा की गई. 2 घंटे तक चली बैठक में 6 राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने भाग लिया.
बैठक के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “14 महीने बाद महबूबा मुफ्ती की रिहाई के लिए बधाई देने के लिए इकट्ठे हुए हैं. हमने इस गठबंधन को गुपकर समझौता कहने का फैसला किया है. हम भारत सरकार से राज्य के लोगों का अधिकार वापस मांगते हैं.”
महबूबा मुफ्ती ने समझौते के बाद ट्वीट करते हुए लिखा, “गुपकार समझौता नेशनल कान्फ्रेंस, पीडीपी, पीसी, सीपीआईएम, एएमसी और जेकेपीएम का संयुक्त गठबंधन है जो कश्मीर के लोगों के अधिकारों और सामान को बहाल करने के लिए प्रयासरत है.”

गुपकार घोषणा क्या है जिस पर चर्चा हो रही है

दरअसल 4 अगस्त 2019 को नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष के गुपकार स्थित आवास पर सर्वदलीय बैठक के बाद जारी प्रस्ताव का नाम गुपकार घोषणा है जिसमें राजनीतिक पार्टियों ने सर्वसम्मति से जम्मू कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और उसके विशेष दर्जे को संरक्षित करने के लिए मिलकर कोशिश करने का फैसला किया है.
जम्मू कश्मीर में धारा 370 को हटाने के खिलाफ 22 अगस्त 2020 को 6 राजनीतिक दलों ने सामूहिक रूप से केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए गुपकार घोषणा पर हस्ताक्षर किया था. हस्ताक्षर करने वालों में स्थानीय 6 राजनीतिक दल जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, इंडियन नेशनल कांग्रेस, जेएंडके पीपल्स कॉन्फ्रेंस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी और आवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस शामिल रहे.

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Prakash Pandey

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