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ICMR की चिंता के पीछे क्या कारण हैं, कहीं कोरोना तीसरे स्टेज़ में तो नही जा रहा है!

नई दिल्ली. आईसीएमआर यानी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को अब कोरोना की चिंता सताने लगी है. आईसीएमआर को संदेह है कि कोरोना वायरस भारत में अब कम्युनिटी ट्रांसमिशन के स्टेज में पहुंचने लगा है यानी स्पष्ट शब्दों में कहें तो मौसमी बुखार की तरह कोरोना के भी संकेत आईसीएमआर को मिले हैं. यदि आईसीएमआर का संदेह सही निकलता है तो यह भारत के लिए बेहद डरावनी स्थिति होगी.
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च अब इस मामले की गहनता से जांच करना चाहता है. यही कारण है कि कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित रेड जोन इलाकों पर आईसीएमआर ने स्टडी करने का फैसला किया है. इससे पहले एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया भी स्वास्थ्य मंत्रालय और देश को चेता चुके हैं. गुलेरिया ने भी एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा था कि यदि कोरोना वायरस की रफ़्तार यही रही तो जून और जुलाई में इसका प्रभाव चरम पर होगा. इसके बाद से ही लॉक डाउन 4.0 की संभावना बनने लगी है.

क्या होता है कम्युनिटी ट्रांसमिशन?

अक्सर अपने कम्युनिटी ट्रांसमिशन शब्द को सुना होगा. दरअसल कम्युनिटी ट्रांसमिशन को हिंदी में सामुदायिक प्रसारण कहा जाता है यानी कि जब कोई व्यक्ति बिना किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए बिना किसी देश की यात्रा किए खुद ही संक्रमित हो जाए तो उसे कम्युनिटी ट्रांसमिशन कहा जाता है. कहने का तात्पर्य है कि इस तरह के ट्रांसमिशन के स्रोत का अता पता लगाना नामुमकिन है. यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है.

75 जिले शॉर्ट लिस्ट और 400 लोग प्रति जिला होगा परीक्षण

आईसीएमआर ने इस तरह की जांच के लिए हॉटस्पॉट्स में से 75 जिलों का चयन किया है जिसमें प्रत्येक जिले से 400 लोगों का परीक्षण किया जाएगा. इसका सबसे बड़ा लाभ देश की जनसंख्या में कोविड-19 के नए तरह के प्रसार की संभावना का पता लगाने में होगा. इससे यह भी अंदाजा लगाया जा सकेगा कि आने वाले समय में कोविड-19 कितना खतरनाक होने वाला है?

कैसे होगा टेस्ट

आईसीएमआर देश के परंपरागत टेस्ट परंपरा को कोरोना के टेस्ट के लिए अपनाएगा. यानी एचआईवी परीक्षण में उपयोग होने वाले टेस्ट का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके लिए संस्था द्वारा एंजाइम लिंक्ड इम्युनो सारबेंट ऐसे टेस्ट किया जाएगा. इससे पहले आईसीएमआर ने रैपिड एंटीबॉडी परीक्षण किट के उपयोग पर अध्ययन करने का निर्णय लिया था.

ऐसे लोगों का होगा टेस्ट?

प्रतिष्ठित अंग्रेजी वेबसाइट इकनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अधिकारी ने कहा कि ऐसे रोगियों की अचानक जांच की जाएगी जिसमें किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने और दूसरे देश की यात्रा करने का कोई इतिहास नहीं रहा. बावजूद इसके वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया हो. आईसीएमआर ने इसके लिए अच्छी खासी तैयारी भी कर ली है. जल्द ही रेड जोन के 75 जिलो के इलाकों में घरों का चयन किया जाएगा और उनका दौरा किया जाएगा.

पहले आईसीएमआर ने ही मना किया अब आईसीएमआर ने ही मान लिया

यहां यह जान लेना जरूरी है कि कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर दोनों ने ही देश में सामुदायिक प्रसारण के बारे में बयान दिया था. दोनों ने इस बात की पुष्टि की थी कि देश में किसी प्रकार का सामुदायिक प्रसारण नहीं है. हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने अपनी बात को फिर से दोहराया लेकिन आईसीएमआर के नए बयान ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. रोज नए आंकड़े चौंकाने वाले आ रहे हैं. लॉक डाउन के बावजूद प्रतिदिन तकरीबन 3000 से ऊपर के केस सामने आ रहे हैं इसके चलते इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि भारत कहीं तीसरे स्टेज में तो नहीं है.

डरिए मत सिर्फ सुरक्षा बनाइए

बोल बचन की टीम आप सभी से निवेदन करती है कि सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन कीजिए. सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखिए, सैनिटाइजर और हाथ को बराबर धोते रहिए. बाहर जाने से बचने की जरूरत है क्योंकि प्रशासन के साथ-साथ हमारी और आपकी भी जिम्मेदारी समाज को सुरक्षित रखने की है. यदि सहयोग नहीं तो घर में रहकर भी हम भारत सरकार और अपनी बहुत बड़ी मदद कर सकते हैं और कोरोना के संक्रमण काल में कोरोना को मात देने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं.

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Prakash Pandey

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