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VIRAL NEWS: पीएम मोदी और 14 घण्टे, जनता कर्फ्यू का वह राज जो हर कोई जानना चाहता है,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 तारीख को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में देशवासियों से रविवार सुबह 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक जनता कर्फ्यू की अपील की. प्रधानमंत्री ने इस दौरान लोगों से अपने घरों में रहने और शाम 5:00 बजे ताली या थाली बजाकर जो लोग कोरोना से लड़ रहे हैं उनके लिए प्रोत्साहन बढ़ाने की अपील की. इसके बाद से सोशल मीडिया पर 14 घंटे के राज और हिंदुस्तान में पहले लॉक डाउन या जनता कर्फ्यू पर चर्चाएं तेज हो गई. जहां लोगों ने पूरे मामले में गंभीरता बनाई वही ऐसे भी लोग रहे जो प्रधानमंत्री के इस आह्वान का मजाक बनाते रहे. प्रधानमंत्री ने बड़ी सोची-समझी प्लानिंग के तहत 14 घंटे का जनता कर्फ्यू का ऐलान किया और जनता से सहयोग की अपेक्षा की. 14 घंटे के इस राज को लेकर एक पोस्ट तेज़ी से वॉयरल हो रही है.
देवेंद्र सिंघवी के नाम से वायरल हो रही इस पोस्ट में देवेंद्र ने अपने क्लासमेट जो अब ह्यूस्टन अमेरिका में इंफेक्शन से हो रही बीमारियों पर शोध कर रहे हैं, उनसे हुई बातचीत को आधार बनाया है.और बातचीत को सार्वजनिक किया है. देवेंद्र और उनके सहपाठी की बात में जो लॉजिक दिया गया है वह डब्ल्यू एच ओ भी मानता है. उन्होंने पोस्ट का शीर्षक ,”1 दिन का कर्फ्यू और मूर्खों का छाती पीटना” है. बातचीत की तारीख़ 20 मार्च 2020 दी गयी है. उनकी वायरल बातचीत और पोस्ट में लिखा है…

“अभी 3 घण्टे पहले, ह्यूस्टन में अमेरिकी सरकार के लिए Infectious Disease पर शोध कर रहे एक चिकित्सा वैज्ञानिक, जो कॉलेज में मेरे सहपाठी हैं, और हमारी मित्रता उनके अमेरिका जाने के बाद भी उतनी ही गहरी हैं, का फोन आया.
उनका पहला ही वाक्य था, “देवेंद्र जी, ये हमारे PM मोदी कोई महामानव हैं शायद.”
मैंने पूछा, “अरे, वो तो हैं पर अब उन्होंने ऐसा क्या कर दिया ?”
वो बोले, “हम छूत की बीमारियों (Infectious Disease) पर पिछले 30 साल से यहां अमेरिका में शोध कर रहे हैं, पर ये 1 दिन के कर्फ्यू वाला आईडिया हमारे दिमाग में कभी नहीं आया.”
मैंने पूछा, “कहीं आप भी भारत में बस रहे सेक्युलरों, वामपंथियों, कुछ मुस्लिमों, ठुकडे ठुकडे गैंग, अर्बन नक्सलियों, अवार्ड वापसी गैंग, आआपियों, NDTV आदि की तरह मोदी का मजाक तो नहीं उड़ा रहे?”
वो बोले, “अरे ऐसा कुछ नहीं, मैं और मेरा पूरा परिवार 19 साल से अमेरिका के नागरिक हैं, मेरा वार्षिक वेतन भारतीय रुपये में 15 करोड़ से अधिक हैं, पर दिल अभी भी भारतीय हैं. मोदी के हर बड़े कदम और फैसले को राजनीति से सर्वथा अलग हो कर, भारत और मानव के कल्याण की कसौटी पर कसता हूँ, मैंने भी देखा, भारत के ही लाखों लोग मोदी के 1 दिन के स्वयं स्पुर्थ कर्फ्यू की बड़ी मजाक उड़ा रहे हैं, पर हमारी लैबोरेट्री में अभी सब बड़े वैज्ञानिकों की 45 मिनिट की एक ऑफिसियल मीटिंग मोदी की इस घोषणा पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई . आप आश्चर्य करेंगे, 45 मिनिट की ये मीटिंग 3 घण्टे से भी अधिक चली,1 दिन के स्वघोषित कर्फ्यू से छूत की बीमारियों और खास कर कोविड 19 पर इसके प्रभाव पर चर्चा हुई. सभी वैज्ञानिकों का इस पर एक मत था कि, 12 घण्टे हर व्यक्ति का दुनिया से कट कर कोरोना वायरस के फैलने से रोकने का बहुत ही प्रभावशाली उपाय हैं, क्योंकि कोविड 19 मानव शरीर के बाहर किसी भी सरफेश पर 12 घण्टे से अधिक जीवित नहीं रह सकता, ऐसे में अपने घर से बाहर की दुनिया से कट जाने से निर्जीव वस्तुओं जैसे दरवाजों के हैंडल, करेंसी नोट, फाइलों, कुरियर पार्सल, वाहनों के स्टेरिंग व्हील, पेन आदि आदि पर स्थित वायरस पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे, और मोदी द्वारा सुझाये इस तरिके से बिना एक पैसा खर्च किये, रविवार होने से काम काज की हानि भी नहीं होने से, देश को वायरस से मुक्त किया जा सकेगा. इस विषय के विश्व के उच्चतम स्तर के वैज्ञानिकों के दिमाग में ये उपाय नहीं सूझा.अगर मोदी को यह सलाह उनके किसी सलाहकार ने भी दी हैं तो निश्चित की वह व्यक्ति नोबेल पुरस्कार का अधिकारी हैं, और अगर ये मोदी के दिमाग की उपज हैं तो Infectious Disease की चिकित्सा के क्षेत्र में उनके इस योगदान के लिए उन्हें चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए.”
मेरे मुहँ से बोल भी नहीं फूटा, यहां मेरे देश के करोड़ों लोग मोदी का मजाक उड़ा रहे हैं, उसे अनपढ़ गंवार कह कर अपमानित कर रहे हैं, गालियां दे रहे हैं.
असली अपराधी कौन ?
: देवेंद्र सिंघवी
20/03/2020

इस बातचीत का हमारे पास कोई रेकॉर्ड नही है न ही हम इसकी पुष्टि करते हैं, न ही किसी के विरुद्ध कुछ कहते हैं लेकिन एक बात जो सबसे प्रभावी ढंग से सामने आई है वह यह कि 14 घण्टे से अधिक कोरोना किसी भी वस्तु पर नही रह सकता है. मनुष्य बाहर निकलेगा नही तो, कोरोना को रोकना सरल हो जाएगा. क्योंकि इन 14 घण्टे में कोरोना वॉयरस खुद ही नष्ट हो जायेगा.

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Prakash Pandey

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