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यूपी में ‘बॉर्डर’ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दी बधाई, कही बड़ी बात

बहराइच/ उत्तर प्रदेश. कोरोना वायरस के महामारी के बीच देश से अलग अलग तस्वीरें निकलकर समय-समय पर सामने आई है जो या तो मिसाल बनी या फिर जिस पर चिंता के बादल घिरे लेकिन आज उत्तर प्रदेश और नेपाल की सीमा पर बॉर्डर ने जन्म लिया.
दरअसल नेपाल से भारत आ रहे लालाराम बहराइच की मोतीपुर तहसील के झालाकला ग्राम पंचायत के गांव पृथ्वीपुरवा के निवासी हैं. लालाराम और उनकी पत्नी जान्तारा दोनों नेपाल के नवलपरासी जिले में एक ईंट भट्टे पर मजदूरी करके अपना परिवार चलाते थे. श्रमिक दंपत्ति के तीन बच्चे हैं. पिछले कुछ समय से भट्टे पर मजदूरी न मिलने के कारण परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई थी जिसके चलते परिवार ने स्वदेश लौटने का मन बनाया.
लालाराम उसकी पत्नी और 3 बच्चे सोनौली बॉर्डर की नोमैंस लैंड पर भारत आने वालों की लाइन में खड़े थे. उसी समय लालाराम की पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. मौके पर मौजूद दूसरी महिलाओं ने चादर का पर्दा लगा वहीं पर जान्तारा का प्रसव कराया. लालाराम और जान्तारा को बॉर्डर पर पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिसके बाद श्रमिक दंपत्ति ने बेटे का नाम ‘बॉर्डर’ रख दिया.

सपा सुप्रीमो ने दी बधाई

दोनों जच्चा बच्चा को नौतनवा सीएससी में भर्ती कराया गया. ठीक होने के बाद से परिवार अपने गांव पहुंच चुका है. पूरे मामले की जानकारी देते हुए समाजवादी पार्टी बहराइच के जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण यादव ने बताया की पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी के विधान परिषद सदस्य राजपाल कश्यप ने लालाराम और जान्तारा को 50000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर कसा तंज

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए अपने टि्वटर हैंडल पर लिखा

‘आग्रह है कि नेपाल भारत की सीमा के बीच जन्मे ‘बॉर्डर’ और मुंबई से उत्तर प्रदेश आ रहे ट्रेन में जन्मे ‘लॉक डाउन’ व ‘अंकेश’ के भविष्य के बारे में भी कोई एक सच्ची चिट्ठी लिखें. बीते 6 वर्षों में देश की बदहाली पर भाजपा सरकार चिट्ठी नहीं श्वेत पत्र जारी करे.”

अखिलेश का यह ट्वीट तब आया था जब प्रधानमंत्री ने अपने दूसरे कार्यकाल के 1 साल पूरे होने पर अपनी उपलब्धियां चिट्ठी के माध्यम से बताई थी.

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Prakash Pandey

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