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चार सहायक अधिकारी को योगी सरकार ने बना दिया हेल्पर और चौकीदार, जानिए क्यों?

प्रदेश की योगी सरकार के फैसले हमेशा हैरान करने वाले होते हैं. नया फैसला 6 जनवरी का है जिसमें योगी सरकार ने सूचना विभाग के चार अधिकारियों का डिमोशन कर हेल्पर, चौकीदार और चपरासी बना दिया. योगी सरकार ने इसके पीछे चारों अधिकारियों के प्रमोशन को गलत होना कारण बताया है.

क्या है 6 जनवरी के आदेश में

सूचना विभाग के 6 जनवरी के आदेश में चार अधिकारियों के नाम है और चारों के सामने एक एक नया काम और नया पद दिया गया है. आदेश में चारों अधिकारियों को चपरासी, चौकीदार, हेल्पर के पद पर नई जिम्मेदारी दी गई है. कहने का मतलब है चारों अधिकारियों के प्रमोशन को गलत मानते हुए सरकार ने उनका डिमोशन कर दिया है. अब आप सोचिए फैसला कितना कठोर है कि चारों को अधिकारी से चौकीदार बना दिए गया.

कौन-कौन हैं चारों अधिकारी

नए आदेश के मुताबिक बरेली के अपर जिला सूचना अधिकारी नरसिंह को चपरासी बनाया गया है. फिरोजाबाद के अपर जिला सूचना अधिकारी दयाशंकर को चौकीदार के पद पर नई तैनाती दी गई है. मथुरा के अपर जिला सूचना अधिकारी विनोद कुमार शर्मा और भदोही के अनिल कुमार सिंह का डिमोशन करते हुए दोनों को सिनेमा ऑपरेटर कम प्रचार सहायक का पद दिया गया है. यानी चारों अधिकारियों को चौथी श्रेणी के कर्मचारी की मूल पद पर वापस भेजा गया है. चिट्ठी के मुताबिक आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.

सरकार ने डिमोशन का क्या कारण बताया है

अब आपके जेहन में सवाल उठ रहा होगा कि सरकार ने इतना कठोर और क्रांतिकारी निर्णय क्यों लिया? इसका जवाब सरकार के आदेश रूपी चिट्ठी में है. लिखा गया है कि

“3 नवंबर 2014 को इन चारों का नियम विरुद्ध जाकर प्रमोशन किया गया था. इसलिए अब यह कार्रवाई कर इन्हें चतुर्थ श्रेणी के पद पर वापस भेजा जा रहा है. यहां यह भी जान लेना महत्वपूर्ण है कि 2014 में समाजवादी पार्टी की सरकार में चारों को प्रमोशन मिला था.

क्या प्रदेश में पहली बार डिमोशन हुआ है?

बिल्कुल नहीं! ऐसा पहला मौका नहीं है जब प्रदेश में डिमोशन किया गया है. इससे पहले पुलिस विभाग के एक रिव्यू के बाद सितंबर 2020 में 896 पुलिसकर्मियों का डिमोशन हुआ था. इनमें ऐसे पुलिसकर्मी थे जो हेड कांस्टेबल से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के पद पर पहुंच गए थे. लेकिन सरकार के फैसले के बाद सभी को वापस पीएसी भेजा गया. जान लेना महत्वपूर्ण है कि इस दौरान 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के प्रमोशन का रिव्यू किया गया था. रिव्यू में नियम विरुद्ध तरीके से पीएसी कांस्टेबलों के सिविल पुलिस के साथ काम करने की बात सामने आई थी जहां उन्होंने फुल टाइम ड्यूटी भी की और कईयों ने ड्यूटी के दौरान प्रमोशन भी ले लिया. इसी को आधार मानते हुए सरकार ने डिमोशन का फैसला लिया था.

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Prakash Pandey

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