त्रिवेन्द्र अपनी कुर्सी सरकने से अब भी हैं खिसियाए हुए, डोईवाला की सभा से शुरू हुई थी टिप्पणी
भाजपा में अंदरखाने तेजी से तैयार हो रहा है त्रिवेन्द्र गुट, जो वर्तमान सरकार पर रख रही है चोर नजर
भाजपा में आपसी टीका—टिप्पणी और खींचतान से कोविड से जंग लड़ रही जनता के बीच नहीं आ रहा अच्छा संदेश
पूर्व मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों की टिप्पणी से असहज हुई भाजपा, बैठक के बहाने हाईकमान ने लिया संज्ञान
नवीन पाण्डेय
प्रदेश में त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार की कुर्सी खिसकने और तीरथ सिंह सरकार के आने के बाद भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री और वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई थी. भाजपा में तीरथ बनाम त्रिवेन्द्र की स्थिति सतह उभरकर खुलेतौर पर राजनीतिक हलकों में आने लगी थी. जिस पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल को कोरोना के समय भाजपा में वाकयुद्ध को लेकर राजनीतिक हमला करने का मौका मिल गया. भाजपा में उठ रहे तूफान को समझकर और भाजपाई के बीच चल रही खींचतान की खबर हाईकमान तक पहुंच गई जिसे लेकर उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक की अध्यक्षता में कोविड प्रभारी मंत्रियों की बैठक के बहाने कड़ी नाराजगी जताई. उत्तराखंड प्रभारी ने नसीहत दी कि टीका—टिप्पणी से खुद को दूर रखें और जनता की सुख—सुविधाओं पर ध्यान दें.
भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम की नाराजगी को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा. त्रिवेन्द्र सिंह रावत की जब कुर्सी हाईकमान ने सरका दी, तभी ये बात कही जाने लगी कि प्रदेश भाजपा में एक गुट और तैयार हो गया है. त्रिवेन्द्र सिंह रावत की ओर से कहीं न कहीं इसकी शुरूआत भी हुई. डोईवाला विधानसभा में उन्होंने खुद को अभिमन्यु से तुलना की. इसके बाद बात निकली और दूर तलक सुनाई दी. फिर टीका—टिप्पणी का दौरा कमोवेश चलता रहा. लेकिन तीरथ सिंह रावत सरकार के गठन के बाद कुछ मंत्रियों जिसमें हरक सिंह रावत, बंशीधर भगत, गणेश जोशी आदि शामिल रहे ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र पर खुलेतौर पर तो कुछ इशारों में कुछ सवाल उठाए. जिसमें कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कोरोना को लेकर यह तक कह दिया कि पिछली सरकार यदि सही तरीके से काम करती तो ये स्थिति नहीं आती. अभी ये सियासी गलियारे में टिप्पणी तैर ही रही थी कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने भी पिछली सरकार को लेकर टिप्पणी कर दी. अब ये भला पहले से ही कुर्सी जाने से खिसियाये पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को भला ये बात कहां बर्दाश्त होने वाली थी, लगे हाथों उन्होंने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को अनुभवहीन करार दे दिया. इस तरह से बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीन जुबानी जंग तेज हो गई. जिस पर मुख्य विपक्षी दल हमला करने लगे.
अब कोविड के दौरान जहां पूरा राज्य कराह रहा हो ऐसे में बीजेपी के वरिष्ठों की आपस में टीका—टिप्पणी का जनता पर क्या असर पड़ेगा? यह भांपते हुए सामांजस्य बैठाने को प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को सामने आना पड़ा. बेशक, कोविड को लेकर कोविड प्रभारी मंत्रियों के साथ बैठक हुई लेकिन नसीहत के पीछे एक—दूसरे पर छींटाकशी और टीका—टिप्पणी से बाज आने की हिदायत भी दी गई.


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