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अंसारी का आपराधिक सफ़रनामा, 100 किमी प्रतिघंटा की रफ़्तार से माफिया की यूपी में एंट्री, प्लान B चर्चा में

बांदा. रोपड़ जेल में सजा काट रहे उत्तर प्रदेश के माफिया मुख्तार अंसारी को भारी मशक्कत के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस लेकर चल पड़ी है. तकरीबन 2 घंटे 10 मिनट का समय और 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रहे काफिले के साथ बांदा पुलिस एसटीएफ की निगरानी में माफिया को उत्तर प्रदेश लेकर आ रही है. हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मुकदमेबाजी के बाद आखिरकार उत्तर प्रदेश पुलिस ने पंजाब को मात देते हुए माफिया को अपने शिकंजे में ले ही लिया.
पंजाब से दिल्ली के ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे होते हुए यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा एक्सप्रेस वे, इटावा, कानपुर के बाद यूपी पुलिस माफिया को बांदा लेकर पहुंचेगी.

यूपी पुलिस का प्लान बी भी तैयार

सूत्रों की माने तो पुलिस ने मुख्तार को बांदा की जेल में पहुंचाने के लिए प्लान बी तैयार किया है जिसके रास्ते मुख्तार को बांदा लाया जा सकता है. न्यूज़ 18 के मुताबिक मुख्तार का काफिला फोरलेन हाईवे फतेहपुर से पहले ही पुलिस के प्लान बी के तहत रास्ता छोड़ देगा. पहले के प्लान के मुताबिक कानपुर से फतेहपुर के औंग तक काफिला फोरलेन से आएगा और फिर औंग पुल से नीचे उतर कर बिंदकी ललौली होकर काफिला आगे बढ़ सकता है. ललौली से फतेहपुर की सीमा खत्म हो जाती है फिर चिल्ला से काफिला बांदा सीमा में प्रवेश करेगा. न्यू पैटर्न के मुताबिक काफिला यमुना-केन पुलों को पार कर बांदा मवई तिराहे के रास्ते से गुजरेगा. कृषि विश्वविद्यालय से तिराहा होते हुए मुख्तार को जेल पहुंचाया जाएगा.

ऐसी है व्यवस्था

12:00 बजे रोपड़ जेल में उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रवेश के बाद जेल प्रशासन की औपचारिकता को पूरा किया. कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद मुख्तार को यूपी पुलिस के हवाले किया गया. जिसके बाद व्हीलचेयर पर सवार मुख्तार को एंबुलेंस में चढ़ा दिया गया. 2 घंटे 10 मिनट जेल में रहने के बाद यूपी पुलिस मुख्तार अंसारी को लेकर बांदा के लिए निकल पड़ी. 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से निकल रहे काफिले में यूपी पुलिस के जवान, पीएसी के जवान, एसटीएफ, दो डिप्टी एसपी, 10 सब इंस्पेक्टर, दो इंस्पेक्टर, पांच सदस्यीय मेडिकल टीम यानी कुल मिलाकर डेढ़ सौ लोग मुख्तार को लेकर आ रहे हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की हाई लेवल मीटिंग

मुख्तार अंसारी को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर हाई लेवल मीटिंग हो रही है. प्रमुख सचिव, डीजीपी समेत आला अफसर बैठक में शामिल है. इतना ही नहीं कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

16 घंटे में पूरा होगा सफ़र

रोपड़ से लेकर बांदा तक 100 किलोमीटर की रफ्तार के बावजूद सफर के समय की बात करें तो 16 घंटे का समय लगना तय माना जा रहा है. यानी मुख्तार को सुबह 6:00 बजे बांदा जेल में ले जाया जाएगा. 16 घंटे में 882 किलोमीटर की दूरी तय कर माफिया जेल पहुंचेगा.

अंसारी से अपराधी और फिर पॉलीटिशियन बनने तक का सफर

राजनीति में माफिया गिरी एक ट्रेंड बन चुकी है. एडीआर की रिपोर्ट चीख-चीख कर राजनीति में अपराध के वर्चस्व की गवाही देती है. कुल मिलाकर लबो लबाब यह है कि राजनीति अब माफिया गिरी वालों का ठिकाना बन गई है. उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्तार अब्बास अंसारी का दबदबा रहा है. और पंजाब की रोपड़ जेल से बांदा जेल में शिफ्ट किए जाने के दौरान एक बार फिर अपराधी सुर्खियों में है. यूपी के मऊ के मायावती की पार्टी बीएसपी से विधायक मुख्तार अंसारी के खिलाफ प्रदेश में 50 से अधिक मामले दर्ज हैं. कुछ खास मामलों को आप भी जान लीजिए-

-मुख्तार अंसारी का पहली बार 1988 में अपराध की दुनिया में पदार्पण हुआ. ठेकेदार सच्चिदानंद राय की हत्या के मामले के साथ ही कांस्टेबल राजेंद्र सिंह की बनारस में हुई मर्डर केस में भी मुख्तार अंसारी सुर्खियों में आया था.
-1990 में गाजीपुर के सरकारी ठेकों को लेकर बृजेश सिंह के साथ मुख्तार अंसारी के गिरोह के बीच दुश्मनी शुरू हुई थी.
-1991 में चंदौली में मुख्तार अंसारी ने रास्ते में दो पुलिस वालों को गोली मारकर हत्या कर दी और फरार हो गया था.
-1996 में एएसपी उदय शंकर पर जानलेवा हमला मामले में अंसारी एक बार फिर सुर्खियों में आया.
-1996 में पहली बार अंसारी विधायक बना और बृजेश सिंह को कड़ी चुनौती देने लगा. -पूर्वांचल के सबसे बड़े कोयला व्यवसाई रुंगटा के किडनैपिंग केस के बाद अंसारी का नाम 1997 में अपराध की दुनिया में छा गया.

अंसारी का राजनीतिक सफर नामा

मुख्तार अंसारी की क्राइम हिस्ट्री के महत्वपूर्ण पहलू आपने जान लिया अब उसके राजनीतिक जीवन के बारे में भी जान लीजिए.
-पांच बार बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर मुख्तार अंसारी विधानसभा में अपने विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुका है यानी विधायक रह चुका है.

  • राजनीति में अंसारी का प्रवेश बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ पदाधिकारी के तौर पर एक्टिव होने की वजह से हुई थी.
    -अंसारी और उसके भाई अफजल अंसारी ने 2007 में बहुजन समाज पार्टी को ज्वाइन किया था उस दौरान पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अंसारी को गरीबों का मसीहा और रोबिन हुड तक कह दिया था.
    -हालांकि, 2010 मायावती ने अंसारी और उसके भाइयों को बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया था जिसके बाद अंसारी ने कौमी एकता दल के नाम से अपनी नई पार्टी बनाई थी लेकिन 2017 में बसपा में फिर से उसकी वापसी हो गई.
    -2009 में अंसारी ने वाराणसी से मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और हार का सामना करना पड़ा. -2014 में बनारस से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद मुख्तार को फिर से हार का सामना करना पड़ा था.

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Prakash Pandey

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