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सहारनपुर मंडलायुक्त की इन खूबियों को नहीं जानते होंगे आप, जान लीजिए क्यों हैं सबसे अलग और खास

नवीन पाण्डेय की वाइल्ड लाइफ वीक पर एक खास रिपोर्ट

उत्तराखंड की सीमा से सटे उत्तरप्रदेश का अंतिम जनपद सहारनपुर अंतरर्राष्ट्रीय फलक पर वुडकार्विंग, कंपनी गार्डन सहित कई चीजों के लिए मशहूर है पर इस शहर में एक शख्सियत ऐसा भी है जो सरकार की जिम्मेदारी का निर्वहन तो बखूबी कर ही रहा है लेकिन वन्य जीवों और प्रकृति से उनका लगाव दूसरों के लिए मिसाल बन रहा है। फोटोग्राफी से लेकर चिड़ियों का रहस्मयी संसार खोजने वाले ने राज्य के चौथे टाइगर रिजर्व की ओर तेजी से फाइलों को आगे बढ़ाकर अपने वन्य जीवों और वनों के प्रति अनूठे प्रकृति प्रेम को जाहिर किया है।

उत्तरप्रदेश सरकार के टेबुल पर वन्य जीवों, वैटलैंड, पक्षियों के संसार से सजा कैलेंडर इसी शखिसयत की खींची गई तस्वीरों के संसार से सजा है।
हम बात कर रहे हैं वरिष्ठ आईएसएस और सहारनपुर मंडल के आयुक्त संजय कुमार की। सहारनपुर मंडल के तीन जिलों सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली का प्रमुख होने के बावजूद शासन के हर काम को समय से लागू करने के दबाव के बीच कमिश्नर संजय कुमार वन्य जीवों के प्रति अपने लगाव को कम नहीं कर पाएं हैं बल्कि ये कहें कि उनकी दिलचस्पी और जुनून अब और बढ़ने लगी है तो शायद गलत नहीं होगा।

हाल ही में दिल्ली से वाया सहारनपुर होकर देहरादून तक जाने वाले केन्द्र सरकार की महत्वकांक्षी एलीवेटेड रोड पर वन्य जीवों के हितों को लेकर फंसे पेंच को ना केवल हल कराया बल्कि उनके हितों की संरक्षण और विकास की गति को भी धीमी नहीं पड़ने दी। अब से कुछ महीने पहले की बात है।

सहारनपुर के शिवालिक वन क्षेत्र में सदियों पुराना हाथी के जबड़े का मिला जीवाश्म

पुराना हाथी के जबड़े का मिला जीवाश्म

सहारनपुर मंडल के वन विभाग को साथ लेकर उत्तराखंड की मोहंड सीमा से लेकर शिवालिक पर्वतमाल के जंगलों को चौथे टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर प्रयास किया। कैमरा ट्रैप सहित अन्य से अध्ययन कराने के बाद आश्चर्यजनक परिणाम वनों और वन्य जीवों को लेकर सामने आया। डब्ल्यूडब्ल्यूआई देहरादून, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वैज्ञानिकों ने भी माना कि इसे टाइगर रिजर्व के लिए प्रस्तावित किया जा सकता है। तेंदुआ सहित कई दुर्लभ वन्य जीवों का पुख्ता प्रमाण मिला था। हैरान करने वाली बात ये सामने आई कि सदियों पुराने हाथी के जबड़े का जीवाश्म मिला। फिलहाल शासन की टेबुल पर सहारनपुर के चौथे टाइगर रिजर्व की ये फाइल विचाराधीन है। वनों को लेकर उनकी दिलचस्पी ही है कि वे अपने कैंपस में सुबह चिड़ियों की चहचहाहट की तस्वीर में कुछ नया खोजने की कोशिश में लगे रहते हैं। मुजफ्फरनगर के वैटलैंड को उनकी ही मदद से नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन मिला है। अब सहारनपुर को नए टाइगर रिजर्व का इंतजार रहेगा।

हैदरपुर वैटलैंड

सहारनपुर के वन गुर्जरों को पुनर्वासित करने की कवायद

सहारनपुर कमिश्नर संजय कुमार शासन के सहयोग से प्रस्तावित चौथे टाइगर रिजर्व के लिए वन भूमि में बसे वन गुर्जरों को पुनर्वासित करने का प्रयास कर रहे हैं। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह की मदद भी मिल रही है। ​जिलाधिकारी हाल ही में कई बार वन गुर्जरों से वार्ता कर उन्हें मुख्य धारा में ले जाने की बात भी कर चुके हैं। वन गुर्जरों का प्रतिनिधित्व करने वालों से भी वार्ता चल रही है। वन विभाग भी सहारनपुर का इस ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। निश्चित तौर पर ये चुनौतीपूर्ण है पर प्रयास करने पर ही सफलता मिलेगी।

राजाजी टाइगर रिजर्व

उत्तराखंड के राजाजी में भी था कमोवेश यहीं हालात

उत्तराखंड में राजाजी नेशनल पार्क जो अब राजाजी टाइगर रिजर्व के नाम से जाना जाता है में भी गुर्जरों को पुनर्वासित करने को लेकर काफी साल लगे। उन्हें मुख्य धारा से सरकार और वन विभाग की मदद से जोड़ा गया। वन गुर्जरों को पुनर्वासित किया गया। फिर टाइगर रिजर्व का तमगा मिला और गुर्जरों के पुनर्वासित होते राजाजी के चीला सहित कई रेंजों में बाघों की चहलकदमी शुरू हो गई। अब नतीजा ये है कि राजाजी में करीब 35 से अधिक बाघ हैं और राजाजी के दूसरे रेंजों में नवंबर में कार्बेट से और बाघों को लाकर छोड़ने की कवायद की जा रही है।

वनों और जनसहभागिता को शेयर की अपने ‘मन की बात’

सहारनपुर कमिश्नर संजय कुमार ने एक से सात अक्तूबर से वन हैप्पी वाइल्ड वीक लिखकर अपनी भावनाओं को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। जिसमें उत्तरप्रदेश से जुड़ी कई अहम जानकारियों से आमजन को रूबरू कराया है। बताते हैं कि उत्तर प्रदेश अदभूत स्तनधारी और जलीय जैव विविधता का घर है। गंगा, यमुना, रामगंगा जैसी सहायक नदियाँ वन्य जीवों और जैव विविधता के लिए एक वरदान हैं। घाघरा, शारदा, गोमती आदि और भारत-नेपाल सीमा के किनारे अद्वितीय और जीवंत हैं। भारत में पाए जाने वाले लगभग 1300 प्रजातियों में से 550 से अधिक पक्षियों की विविधता केवल राज्य में है। सोशल मीडिया पर शेयर की गई बातों में वे जिक्र करते हैं कि राष्ट्रीय पशु की एक स्वस्थ आबादी है। रॉयल बंगाल टाइगर्स के अलावा अन्य दुर्लभ बिल्लियों जैसे मछली पकड़ने वाली बिल्ली, तेंदुआ बिल्ली, जंगल बिल्ली सहित कई वन्य जीवों के संसार से वन क्षेत्र खिलखिला रहा है। राज्य में पाए जाने वाले अन्य विशेष वन्यजीवों में एशियाई हाथी, तेंदुए, लुप्तप्राय एक सींग वाले गैंडे, जैकल्स आदि शामिल हैं। भारतीय वुल्फ और चीतल, सांभर, दलदली हिरण, हॉग हिरण, बार्किंग हिरण, ब्लैकबक, घुरल जैसे कई प्रकार के शाकाहारी वन्य जीव भी मौजूद हैं। हालांकि वे चिंता जाहिर करते हैं कि वन और वन्य जीवों के सिकुड़ते प्राकृतावास पर मानवजनित आबादी का दबाव है। लिहाजा बिना जनसहभागिता के कुछ भी संभव नहीं है। जनसहभागिता से वन, वन्य जीव का जहां संरक्षण और संवर्द्धन हो सकेगा, वहीं स्थायी इको-टूरिज्म के माध्यम से रोजगार का भी सृजन किया जा सकता है.

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Prakash Pandey

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