PRAKASH K PANDEY
सहारनपुर. पूरे देश में कोरोना के संक्रमण के डर से लॉक डाउन जारी है. देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी इस माह यानी कि अप्रैल के महीने में खूब शहनाइयां बजती थीं. घरों में मंगल गीत, लेडीज संगीत और डीजे की धुन से सड़क और बाजार तक गुलजार रहते थे. बैंड बाजों की आवाज और सगे संबंधियों की तो बात ही क्या? आने जाने की परंपरा से घर की रौनक में चार चांद लगते थे.
लेकिन कोरोना वायरस के इस काल ने सब कुछ बदल दिया है. हमेशा भीड़भाड़ से भरे रहने वाले बाजार अब विरान नजर आते हैं. सड़कों पर सन्नाटा है.अजीब सी खामोशी है. लगन को लेकर भीड़ लगने वाली दुकानों में ताला लगा है. नोटों के हार पर कोरोना का प्रहार है. जयमाला की रस्म पर कोरोना ने डाका डाला है.
कोरोना के संकट ने शहनाई की गूंज को जहां लॉक कर दिया है वहीं विवाह के मुहूर्त को डाउन कर दिया है. सहारनपुर में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है.
दांपत्य जीवन के लिए सबसे बड़ा खलनायक बना कोरोनावायरस
एक दूजे के हो जाने का महीना है अप्रैल. एक दूजे के साथ जीने मरने की कसम खाने का और सात जन्म तक साथ निभाने का, पवित्र बंधन में बंधने का महीना है अप्रैल. लेकिन अप्रैल बीतने को है मई तक सभी शादियां टल चुकी हैं. मैरिज हॉल, बैंड, मसाले से लेकर कैटरिंग तक सभी बुकिंग लगातार कैंसिल हो रही है. युवक-युवतियों को अब लंबा इंतजार करना होगा. तकरीबन लाखों लोगों का धंधा डाउन हो गया है.
बाजार और रोजगार पर कोरोना प्रहार
शादी की रस्म ना सिर्फ दो दिलों को एक बंधन में बांधने का मुहूर्त है बल्कि बाजार और रोजगार के लिए सबसे बड़ा जरिया भी है. लगन के दिनों में बाजार की रौनक देखते ही बनती थी वहीं रोजगार के भी पर्याप्त संसाधन बन पढ़ते थे जिनसे लाखों लोगों को कमाई का रास्ता मिलता था और परिवार चलाने के लिए संसाधन. शादियों के मौसम में बैंड, मैरिज हॉल, कैटरिंग, टेंट शामियाना, लाइट इतना ही नहीं हलवाई से लेकर ब्यूटी पार्लर और कपड़ों से लेकर जेवर तक का धंधा लगन से चलता है. लगन हर साल लाखों लोगों के रोजगार और परिवार पालने का साधन बन कर सामने आता है.
कोरोनावायरस के संक्रमण ने सपने कर दिए लॉक और उम्मीदें कर दी डाउन
लगन के जरिए ना केवल लाखों परिवारों का गुजारा होता था बल्कि कई लोग कुछ नया करके अपने कमाई के साधन को बढ़ाते थे. जनपद में हजारों शादियां तय थी, सभी जरूरत की चीजें बुक थी, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के भय ने सभी के सपनों को लॉक कर दिया और परिवार वालों की उम्मीदों को डाउन कर दिया.
ऐसी परिस्थिति में अब युवक और युवतियों को शादी के पवित्र बंधन में बंधने के लिए कम से कम एक लंबा इंतजार करना पड़ेगा.

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