नई दिल्ली. मन मे चाहत हो कुछ कर गुजरने की तो फिर बाधा कितना भी जतन क्यों न कर ले वह सफलता को रोक नही सकता. सफलता असफलता से परे होकर जो प्रयास करते हैं, वही इतिहास रचते हैं.
ऐसा ही इतिहास रचा है चचा शरीफ ने. अयोध्या के खिड़की अली वेग मोहल्ले के रहने वाले चचा मोहम्मद शरीफ को कल गणतंत्र दिवस के मौके पर पदमश्री सम्मान दिया गया. जिसके बाद पूरा देश उन्हें सलाम कर रहा है. चचा को यह सम्मान उनके उस कार्य के लिए भारत सरकार ने दिया जिससे लोग अकसर दूरी बना लेते हैं.
चचा को यह सम्मान लवारिशों के वारिस बनने के कारण दिया गया. जिन लाशों को लोग न केवल पहचानने से इनकार कर देते हैं बल्कि हाथ तक लगाने से बचते हैं उन्हीं लावारिस लाशों के चचा असली वारिश बने और देखते ही देखते 25000 के करीब लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार कर उन्हें मुक्ति के मार्ग पर ले गए.
परिवार की एक अप्रिय घटना से आहत चचा ने अपने जीवन मे लवारिशों के अंतिम संस्कार को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया और नतीजा सामने है. पूरा देश चचा के लिए सम्मान में खड़ा है और भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा है.
गणतंत्र दिवस की 71 वीं वर्षगांठ पर भारत सरकार ने वर्ष 2020 के लिए 7 शख्सियतों को पदमविभूषण, 16 को पदमभूषण, 118 सामाजिक कार्यकर्ताओं को पद्मश्री का सम्मान दिया है.
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