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बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों की सभाओं और रैलियों का रिपोर्ट कार्ड जान लीजिए,

बिहार विधानसभा चुनाव में परिणाम अपने पक्ष में लाने के लिए तकरीबन सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी. सात नवंबर की सुबह यानी आज सुबह अंतिम चरण का मतदान होगा जिसके बाद तय हो जाएगा कि बिहार की सत्ता का नायक कौन होगा? तीनों चरणों में राजनीतिक पार्टियों ने सभा और रैलियों के जरिए रिकार्ड कायम किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय नेताओं से लेकर बिहार के दिग्गज अलग-अलग क्षेत्रों में अपने-अपने दलों के लिए वोट मांग रहे थे. भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के दौरान सबसे बड़ा कैम्पेन अभियान चलाया जिसके तहत बीजेपी नेताओं ने 1000 से ज्यादा सभाएं जनसंवाद और रोड शो किए.

दिखाई दिया तेजस्वी का तेज

अगर सोलो कैंपेन की बात की जाए तो महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा बने तेजस्वी यादव ने औसतन हर दिन 12 सभाएं की. तेजस्वी ने 1 दिन में सबसे अधिक सभा करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया. जोकि उनसे पहले उन्हीं के पिता यानी आरजेडी चीफ लालू यादव के नाम था. तेजस्वी ने चुनाव में 1 दिन में 19 सभाएं कर डाली.
जानकारी के मुताबिक 16 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच तकरीबन 21 दिन में आरजेडी ने 251 सभाएं की यानी इसका औसत निकाला जाए तो प्रतिदिन 12 सभा. इतना ही नहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने चार रोड शो भी किए. लालू प्रसाद यादव के जेल में होने की वजह से आरजेडी के प्रचार-प्रसार की कमान पूरी तरह से तेजस्वी यादव के कंधों पर थी.

पीएम मोदी ने की 12 रैलियां

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम एनडीए के पक्ष में लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन चरण में तकरीबन 12 सभाएं की. प्रधानमंत्री ने करीब 60 विधानसभा के मतदाताओं से एनडीए के पक्ष में मतदान करने की अपील भी की. पीएम मोदी की सभाओं को वर्चुअल माध्यमों से पार्टी के अलग-अलग प्लेटफार्म से लाइव किया गया जिसमें लाखों लोगों के जुड़ने का दावा भी सामने आया है. मोदी की सभाओं में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा एनडीए नेता जीतन राम मांझी और मुकेश साहनी भी शामिल हुए.

नीतीश कुमार की 113 सभाएं

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी चुनाव को अपने पक्ष में करने के लिए तकरीबन 113 सभाएं की हैं. इनमें से 103 विधानसभा क्षेत्रों में हुई बाकी 10 रैलियों व वर्चुअल माध्यम से की गई थी. बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने इन सभाओं के जरिए पूरे बिहार को साधने की कोशिश की. हालांकि चुनाव प्रचार के अंतिम दिन यानी 5 नवंबर को बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने मंच से ही इस चुनाव को अपने जीवन का आखिरी राजनीतिक चुनाव करार दिया. इसके बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है.

अभियान के मामले में बीजेपी से आगे कोई नहीं

अगर चुनावी अभियान को देखा जाए तो सबसे अधिक भारतीय जनता पार्टी में 650 सौ रैलियां 350 जनसंवाद और बाकी रोड शो समेत कुल 1000 से अधिक सभाएं की. देशभर के 29 बड़े नेताओं ने एनडीए के पक्ष में कमान संभाली जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जैसे बडे़ नेता शामिल रहे. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी में भी एनडीए के लिए 24 सभाएं की.

देर से आए चिराग में की 110 सभाएं, राहुल 8 तक रहे सीमित

पिता की खराब तबीयत और उसके बाद उनके निधन के बाद से चुनावी मैदान में देरी से पहुंचे एलजेपी चीफ चिराग पासवान ने अपने प्रत्याशियों के समर्थन के लिए 110 सभाएं और 9 रोड शो किए जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार चुनाव में 8 सभाएं की.

पप्पू यादव और उपेंद्र कुशवाहा का क्या रहा हिसाब

जन अधिकार पार्टी के पप्पू यादव ने भी पूरे चुनाव में मोर्चा संभाले रखा. मंच टूटने के बाद घायल हुए पप्पू ने हौसला नहीं छोड़ा और पप्पू यादव ने पूरे अभियान के दौरान करीब 180 सभाएं की जबकि आरएलएसपी उपेंद्र कुशवाहा ने 18 दिनों में तकरीबन 147 सभाएं कीं. कुशवाहा ने 17 रोड शो भी किए.
आज सुबह शुरू होने वाले मतदान का शाम होते होते बिहार का भाग्य ईवीएम में कैद हो जाएगा. परिणाम किसके पक्ष में आएगा? यह तो समय बताएगा लेकिन राजनीतिक दलों का सत्ता के लिए किया गया परिश्रम हमेशा याद किया जाएगा.

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Prakash Pandey

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