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Rajyasabha election : भाजपा की एक चाल ने बिगाड़ दिया सपा का खेल, 2022 में दिखाई देगी भाजपाई रणनीति, विपक्ष में बिखराव

राज्यसभा चुनाव के चलते समाजवादी पार्टी की शह पर बसपा में हुई बगावत को मायावती ने मात दे दी है. माना जा रहा है कि इस खेल के पीछे असल दिमाग भाजपा का चल रहा है. दरअसल पार्टी ने 25 अधिक विधायक होने के बाद भी अपना नया प्रत्याशी खड़ा नहीं किया. आठ प्रत्याशी खड़े कर भाजपा ने बसपा को वॉक ओवर दे दिया है.

पहले समझिए हुआ क्या

दरअसल, राज्य में 10 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होने हैं. जिसमें समाजवादी पार्टी ने बसपा के 6 विधायकों की बगावत से बसपा का खेल बिगाड़ने की कोशिश की जिससे नाराज बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने 7 विधायकों को निलंबित कर दिया. साथ ही साथ चेतावनी दे डाली कि अगर विधायकों ने सपा का साथ पकड़े रखा तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा. मायावती ने समाजवादी पार्टी पर गुरुवार को कड़ा हमला बोला और अखिलेश यादव को अवसरवादी करार दिया.

सपा के सपनों को आयोग का झटका

समाजवादी पार्टी और बसपा के बागी विधायकों को निर्वाचन आयोग ने झटका दिया है. बसपा की बगावत से जिस समाजवादी पार्टी प्रत्याशी को जिताने की कोशिश हो रही थी उनका पर्चा रद्द हो गया है. इतना ही नहीं आयोग ने बसपा उम्मीदवार राम जी गौतम के नामांकन पर आपत्तियों को खारिज कर दिया है.

बसपा प्रत्याशी का राज्यसभा पहुंचना तय

आयोग के बसपा उम्मीदवार राम जी गौतम के नामांकन की आपत्तियों को खारिज करने के बाद बसपा की राह आसान हुई है. भाजपा के 8 उम्मीदवार खड़े करने के बाद बसपा के उम्मीदवार का जितना तय है.

हार कर भी सियासी बाजी जीत गई सपा

सामान्य तौर पर राज्यसभा चुनाव की चौसर पर समाजवादी पार्टी हार कर भी बाजी जीती दिखाई दे रही है. समाजवादी पार्टी लगातार भाजपा और बसपा में सांठगांठ का संदेश देने की कोशिश कर रही थी जो भाजपा के वॉक ओवर देने के बाद सफल भी रही है.

बसपा विधायकों ने खेल बिगाड़ा था

बसपा के बागी विधायकों ने राम जी गौतम के प्रस्तावक के रूप में अपना नाम वापस लेने की अर्जी पेश की तो राजनीति में हड़कंप मच गया. लेकिन आयोग ने स्वीकार नहीं किया. राज्य में इस राजनीतिक हलचल से नए समीकरण तैयार हो रहे हैं.

यह 10 लोग राज्यसभा पहुंचेंगे

भाजपा उम्मीदवार केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व डीजीपी बृजलाल, नीरज शेखर, हरिद्वार दुबे, गीता शाक्य, सीमा द्विवेदी और बी एल वर्मा भाजपा से, सपा के प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव और बसपा से रामजी गौतम का निर्विरोध चुनाव होना तय हो गया है. इसकी औपचारिक घोषणा 2 नवंबर को की जाएगी.

बिखर गया विपक्ष

हालांकि सपा अपनी राजनीति में कामयाब रही लेकिन भाजपा के रणनीतिकारों के हाथों विपक्ष एक बार फिर सियासी अखाड़े में चारों खाने चित हुआ है. विपक्ष में बिखराव कराने की भाजपा की रणनीति सफल रही. राज्यसभा चुनाव से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बिछाई गई विसात जिसमें 2022 में भाजपा को संयुक्त विपक्ष की चुनौती अब नहीं मिल सकेगी. भाजपा के इस दांव से 2022 के चुनाव में विपक्षी एकता की रही सही संभावनाओं के लिए संकट खड़ा कर दिया है.

अटैकिंग की जगह डिफेंसिव शैली में बीजेपी

हम तौर पर अटैकिंग यानी आक्रामक राजनीति के लिए जानी जाने वाली भाजपा डिफेंसिव यानी सुरक्षात्मक सियासी खेल खेलती हुई दिखी. भाजपा 9 सीटें राज्यसभा की जीत सकती थी. लेकिन इसके बाद भी उसने आठ ही उम्मीदवार उतारकर अपनी मंशा पूरी कर ली.

एक सीट से साध लिया मिशन

1 सीट के जाल में विपक्ष को उलझा कर भाजपा ने खुला संदेश दे दिया है कि उससे निपटने का ऐलान करने वालों की प्राथमिकता आपस में एक दूसरे से निपटने और निपटाने की है. भाजपा यह भी साबित करने में कामयाब रही कि विपक्ष के पास कोई भी सकारात्मक मुद्दा नहीं है. सिवाय भाजपा का विरोध करने के भाजपा की इस मंशा को बसपा ने सपा पर अनुसूचित जाति के लोगों की तरक्की बर्दाश्त नहीं कर पाने का आरोप लगाकर आगे बढ़ा दिया. माना जा रहा है कि सपा की हार को बसपा और भाजपा दोनों मुद्दा बनाएंगे. यानी कुल मिलाकर देखा जाए तो एक सीट का खेल खेल कर भाजपा ने विपक्ष का मजा किरकिरा कर दिया और 2022 के अपने मिशन को लगभग लगभग साध लिया.

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Prakash Pandey

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