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Special News: पुलिस के सहयोग के नाम पर डंडा चलाने वालों पर उठ रहे सवाल

Rakesh Chaturvedi/ Sankalp Naib

Lucknow/ Saharanpur. पूरे देश मे लॉक डाउन है. ट्रेन से लेकर बस, चार पहिया से लेकर दो पहिया वाहनों तक को बंद रखने का निर्णय लिया गया है. पुलिस मुस्तैदी से नियमों का पालन करवा रही है. कहीं सख्ती तो कहीं स्नेह सब कुछ सामने आ रहा है. कहीं पुलिस मानवता के चरम को छू रही है तो कहीं प्रचंड क्रोध में नज़र आ रही है. पुलिस की इस सख्ती की सराहना भी हो रही है. लेकिन जो तस्वीरें मार पिटाई की आ रही हैं उनमें पुलिस के साथ बिना वर्दी के लोग भी दिखाई दे रहे दे रहे हैं जो बेदर्दी की इंतहा को पार कर रहे हैं. ऐसे लोगों पर अब सवाल उठने लगे हैं.
दरअसल, सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों के साथ बिना वर्दी वाले लोगों को देखा जा रहा है जो पुलिस से भी ज्यादा पूछताछ करते हैं, पुलिस से भी ज्यादा लठियाते हैं, जिनपर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कौन लोग हैं यह बिना वर्दी के.
बिना वर्दी के सड़क पर बेखौफ सवाल करने वाले और डंडा लेकर आमजन को सबक सिखाने वाले लोग वोलेंटियर और एसपीओ हैं जिन्हें पुलिस की सहायता के लिए लगाया गया है. उनकी इस तरह की कार्रवाई से पुलिस की छवि पर प्रभाव पड़ रहा है जो ठीक नही है. इतना ही नही पुलिस को लॉक डाउन या कर्फ्यू जैसी हालात के लिए ट्रेनिंग दी जाती है. क्या और कैसा व्यवहार करना है बताया जाता है? सख्ती करनी पड़े तो कहां मारना है यह तक प्रशिक्षण में होता है लेकिन वॉलिंटियर्स अंधाधुन लाठियां भांजते है. ऐसे में उच्चाधिकारियों को सामने आकर वॉलिंटियर्स और एसपीओ को ब्रीफ करने की जरूरत है. उन्हें बताने की जरूरत है कि उन्हें पुलिस की सहायता के लिए लगाया गया है न कि डंडा चलाने के लिए.

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Prakash Pandey

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