पांडेयजी तो बोलेंगे

POLICE : आपकी जान के लिए सह रहे अपमान भी, सम्मान भी, ऐसा क्यों

PRAKASH KUMAR PANDEY

सहारनपुर/लखनऊ. पूरे देश में लॉक डाउन 2. 0 शुरू हो गया जो प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुसार 3 मई तक जारी रहेगा. ऐसे में लॉक डाउन के पालन कराने की जिम्मेदारी देश की सुरक्षा की अंदरूनी कमान संभालने वाली पुलिस पर है.
पुलिस आपका जीवन बचाने के लिए स्वयं का जीवन दांव पर लगाए हुए हैं. जब सभी अपने घर में होते हैं तो यही पुलिस आजकल लॉक डाउन में अंतरराज्यीय बॉर्डर पर आवागमन को रोककर आपकी सुरक्षा करती है. जब आप कोरोना जैसे महामारी का नाम सुनकर सहम जाते हैं तब इसी बीमारी से ग्रस्त मरीजों को अपनी निगरानी में रखती है पुलिस. चिकित्सक से लेकर मरीज़ तक सभी की निगरानी. सड़क से लेकर अस्पताल तक, इतना ही नहीं आपके घर तक की सुरक्षा पुलिस कर रही है. बावजूद इसके पुलिस को सम्मान और अपमान दोनों से ही दो चार होना पड़ रहा है.
लॉक डाउन में आज सबसे बड़े सहारे के रूप में पुलिस खड़ी है. आज भोजन उपलब्ध कराने से लेकर होम डिलीवरी तक सुविधा देने वाली पुलिस कहीं पत्थरबाजी का शिकार हो जाती है तो कहीं तलवारबाजी की. कसूर सिर्फ इतना की यही पुलिस आपका जीवन बचाने के लिए आपके साथ सख्ती कर रही है. जिस बात की नैतिक जिम्मेदारी स्वयं की होती है उसको पूरा करने के लिए पुलिस को लाठी का सहारा लेना पड़ता है. उसके बाद भी टि्वटर, सोशल मीडिया, फेसबुक आदि पर उपहास भी उड़ाया जा रहा है. जो न केवल निंदनीय बल्कि जितनी भर्त्सना की जाए कम है.
आज सहारनपुर के देहात क्षेत्र में पुलिस का माला पहनाकर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया, इतना ही नहीं नगर क्षेत्र में भी निरीक्षण पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और उनकी पूरी टीम पर पुष्प वर्षा की गई लेकिन कल पंजाब में निहंगो के द्वारा एक सब इंस्पेक्टर का हाथ काट देने की घटना अमानवीयता की सारी हदें पार कर गई. इतना ही नहीं कोरोना जैसे महामारी जिसका नाम लेते हुए इंसान को डर लगता है उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ जान को जोखिम में डालकर इंसानी जीवन को बचाने के लिए जांच करवाने के लिए साथ गई पुलिस पर पथराव कर दिया जाता है. बरेली की घटना अभी पुरानी भी नहीं हुई कि मेरठ में पुलिस को फिर से चुनौती दी गई जिसके बाद पुलिस को सख्ती बरतते हुए कार्रवाई करनी पड़ी. ऐसे में सवाल उठ जाता है कि जब पुलिस कार्रवाई करती है तो मानवाधिकार और तमाम राजनीतिक पार्टियां उपद्रवियों के समर्थन में खड़ी हो जाती है लेकिन इन कर्म योद्धाओं के समर्थन में दो बोल भी किसी के मुंह से नहीं निकलते. आम जनता सम्मानित करें या आम जनता ही अपमानित करें, इन सबके उलट पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी अपने कर्म के साथ मुस्तैदी से करते रहते हैं. हर तरह की चुनौतियों को स्वीकार कर आपके जीवन को बचाने की जिद चलती रहती है.
कोरोनावायरस के संक्रमण से बचाने के लिए सड़क पर अनावश्यक रूप से निकले लोगों पर जब पुलिस लाठी चार्ज करती है तो राजनीति गर्म हो जाती है, सियासत का ताप बढ़ जाता है. दुर्भाग्यपूर्ण होता है जब पुलिस के साथ निर्ममता के साथ व्यवहार होता है और विधवा विलाप करने वाले मौन रहते हैं. समय उन लोगों से भी सवाल जरुर पूछेगा जो जान को जोखिम में डालकर सेवा कर रहे इन कर्म योद्धाओं के विपरीत बयानबाजी करते हैं, इनकी कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाते हैं. ठीक है कि कहीं कहीं पर कुछ पुलिसकर्मियों के चलते पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो जाते हैं लेकिन यकीन मानिए 5% 95% को बदनाम कर देते हैं. पुलिस की इसी कार्यशैली पर बोल बचन प्रतिदिन आपको अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे पुलिस कर्मियों की कार्यप्रणाली से रूबरू कराएगा.सही भी गलत भी फिर निर्णय आप कीजिएगा.
हो सकता है कि लेख पढ़ने के बाद आप में से अधिकतर लोगों को यह पुलिस के प्रति प्रेम लगे या फिर कुछ लोग इसको बटरिंग की भी संख्या देंगे लेकिन यकीन मानिए जब पुलिस की कार्यप्रणाली के सकारात्मक पहलू से आप रूबरू होंगे तो आपको हमारी कोई बात गलत नहीं लगेगी.

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