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प्रधानमंत्री मोदी की योजनाएं भी नही बचा सकीं इस किसान को, बैंक की सख्ती के बाद अन्नदाता ने लिया कठोर फैसला

बैंक की सख्ती ने ले ली अन्नदाता की जान, परेशान किसान ने बैंक के सामने दम तोड़ा

सहारनपुर/उत्तर प्रदेश. कर्ज से परेशान अन्नदाता ने बैंक की सख़्ती से और दलाल की ज्यादती से तंग आकर बैंक के सामने मौत को गले लगा लिया. किसान की जेब से मिले आत्महत्या के लेटर ने सरकारी व्यवस्था और बैंकों के ज्यादती को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

बड़े बकायेदारों से उधारी की रकम वापस ना लेन पाने वाले बैंक छोटे किसानों और मध्यमवर्गीय कर्जदारों के ऊपर इतनी सख्ती करता है जिसके चलते कई बार कर्ज़दार परेशान होकर मौत को गले लगा लेता है. बड़े व्यापारियों और डिफाल्टर को पानी की तरह लोन देने वाले बैंक छोटे क़र्ज़दार का जीवन जीना मुश्किल कर देते हैं. बैंक की इसी सख्ती के चलते आज एक अन्नदाता ने बैंक के सामने ही आत्महत्या कर ली.

पूरे मामले की जानकारी देते हुए एसपी (देहात) विधासागर मिश्रा ने बताया कि अल्लीवाला निवासी किसान वेदपाल (50) शनिवार देर शाम कस्बा छुटमलपुर में देहरादून राजमार्ग स्थित यूनियन बैंक की शाखा पहुंचा और वहां एक खोखे के ऊपर एक पेड़ पर रस्सी लटकाकर उससे झूल गया.

एसपी रूरल एरिया ने बताया कि आसपास के लोगों ने तुरन्त ही वेदपाल को नीचे उतारा और उसे चिकित्सक के यहां ले गये जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया. उन्होंने बताया कि मृतक के पास से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें उसने अपनी मौत के लिए यूनियन बैंक के अधिकारियों और दलाल को जिम्मेदार बताया है. सुसाइड नोट में बैंक और दलाल पर कर्ज को लेकर दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है. एसपी देहात ने बताया कि मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस पुलिस मामले की जांच कर रही है.निष्पक्ष जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नही जाएगा.

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Prakash Pandey

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