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महज 7 दिन बाद ही सरकार अपने फैसले से पीछे हटी,निरस्त की अधिसूचना

लखनऊ. प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए योगी सरकार लगातार कोशिशें कर रही है. इसी क्रम में आए दिन बड़े बड़े फैसले लिए जा रहे हैं. इसमें से एक फैसला श्रम कानूनों के तहत लिया गया था जिसमें रजिस्टर्ड कारखानों में युवा श्रमिकों से कुछ शर्तों के साथ 1 दिन में 12 घंटे तक काम कराने संबंधी छूट की अधिसूचना को जारी किया गया था. सरकार ने अब महज एक हफ्ते बाद ही अधिसूचना को निरस्त कर श्रमिकों की अधिकतम अवधि 8 घंटे करने का ही फैसला कर लिया है.
प्रदेश के श्रम विभाग की ओर से 8 मई को एक अधिसूचना जारी की गई थी जिसके अनुसार रजिस्टर्ड कारखानों में श्रमिकों के काम करने के घंटे बढ़ाए गए थे. नई अधिसूचना के मुताबिक श्रमिक को 1 दिन में अधिकतम 12 घंटे और हफ्ते में अधिकतम 72 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जाना था. सरकार के इस फैसले से राजनीतिक विरोध तेज हो गया था. इतना ही नहीं श्रमिक संगठन भी लामबंद होने शुरू हो गए थे. इसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी जिसकी सुनवाई सोमवार यानी 18 मई को होनी है. लेकिन सरकार ने शुक्रवार शाम को ही इस अधिसूचना को निरस्त कर दिया. अधिसूचना निरस्त होने के बाद श्रमिकों के लिए पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी जिसके मुताबिक दिन में 8 घंटे और हफ्ते में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जाएगा.
सरकार की अधिसूचना का आर एस एस की प्रमुख संस्था भारतीय मजदूर संघ ने भी विरोध किया था. साथ ही साथ संगठन ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी.
यहां यह जान लेना जरूरी है की कोरोना वायरस के कारण ठप कारोबार को गति देने के लिए योगी सरकार ने यूपी में औद्योगिक इकाइयों, प्रतिष्ठानों और कारखानों को 1000 दिन यानी 3 साल के लिए श्रम कानूनों में छूट दे दी है जिसका मजदूर संगठन विरोध कर रहे हैं.

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Prakash Pandey

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