COVID-19 Live Update

Global Total
Last update on:
Cases

Deaths

Recovered

Active

Cases Today

Deaths Today

Critical

Affected Countries

Total in India
Last update on:
Cases

Deaths

Recovered

Active

Cases Today

Deaths Today

Critical

Cases Per Million

एक्सक्लूसिव

Online education: अब गरीबों के लिए शिक्षा भी बनी चुनौती, जानिए क्या है दिक्कत

गरीब घरों के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करने से है पूरी तरह वंचित गरीब बच्चो के अभिभावकों के पास न तो कंप्यूटर और न ही स्मार्टफोन खरीदने के पैसे हैं और वह ऑनलाइन पढ़ाई के लिए इंटरनेट लगवाने का खर्च भी वहन करने में सक्षम नहीं है. आखिर इन बच्चों की पढ़ाई कैसे हो सकेगी, यह सवाल गरीब तबके के बच्चों और उनके अभिभावको को अंदर ही अंदर कचोट रहा है ?ऑनलाइन पढ़ाई से गरीबो के बच्चों का भविष्य तो अंधकार मय होता दिख रहा है जबकि साधन-संपन्न घरों के बच्चे फिर भी ऑनलाइन पढ़ाई करके अपना काम चला रहे हैगरीबों के बच्चे लैपटॉप और स्मार्टफोन ना होने के चलते गुल्ली- डंडा खेलने को मजबूर है.

गौरवसिंघल

सहारनपुर/देवबंद। देशभर मेंसंपूर्ण लाॅक डाउन लागू होने के बाद से सबसे बड़ा नुकसान अगर किसी का हो रहा है, तो वह है स्कूली छात्रो का है। इसमें भी सबसे ज्यादा नुकसान गरीब घरो के बच्चो को हो रहा है। स्कूल बंद होने से गरीब छात्र-छात्रांए तो पढ़ाई से पूरी तरह से वंचित हो गए है, जबकि साधन-संपन्न घरो के बच्चे तो फिर भी आॅन लाइन पढाई करके अपना काम किसी तरह से चला रहे है। माना जा रहा है कि जब तक लाॅक डाउन चलेगा और कोरोना वायरस की महामारी बनी रहेगी तब तक तो शायद ही स्कूलो में पढाई हो सकेगी और ऐसे सूरत में तो घरो पर ही छात्र-छात्राओ को आॅन लाइन पढाई कराए जाने की ही व्यवस्था लागू रहेगी। लाक डाउन के दौरान आनलाइन पढाई के चलते सबसे ज्यादा खराब हालत उन छात्र-छात्राओ के है, जो आर्थिक रूप से बहुत ही कमजोर परिवारों से हैं। ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए गरीब घरों के बच्चो के अभिभावकों के पास न तो कंप्यूटर और न ही स्मार्टफोन खरीदने के पैसे हैं और वह ऑनलाइन पढ़ाई के लिए इंटरनेट लगवाने का खर्च भी वहन नही कर सकते है। एक घर में एक से तीन बच्चें होने की वजह से ज़्यादा दिक्कतें सामने आ रही है। ऐसे में इन गरीबो की पढ़ाई कैसे हो सकेगी, यह सवाल गरीब तबके के बच्चों और उनके अभिभावको को अंदर ही अंदर कचोट रहा है ? आपको बता दें कि, जबसे संपूर्ण लॉक डाउन लगा हुआ है, तब से सरकार के निर्देश पर सरकारी व निजी विद्यालयों में तालाबंदी हो गई है और सभी प्रकार की परीक्षाएं आधी-अधूरी छोड़ दी गई हैं। ऐसे में कुछ छात्र तो, घरों पर रहकर किताबों से अध्ययन कर लेते हैं, कुछ आॅन लाइन पढाई करके अपना काम चला रहे है लेकिन अधिकांश गरीब बच्चे तो खेलकूद और मनोरंजन में ही अपना पूरा समय गुजारने को मजबूर हो रहे रहे हैं। हांलाकि सरकारी और निजी स्कूलों के प्रबंधतंत्र ने ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा यह है आ रही है कि, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर छात्रों के अभिभावक इस हैसियत में नहीं है कि, वह लैपटॉप या स्मार्टफोन खरीद कर बच्चों को दे सकें, न ही इन अभिभावकों की यह स्थिति है कि, इंटरनेट की कीमतें ही अदा कर सकें। इस प्रकार लाक-डाउन के दौरान तो हजारों गरीब छात्र-छात्राओ का भविष्य संकट और अंधकार में नजर आ रहा है। कई अभिभावकों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि, इस समस्या के समाधान का कोई न कोई रास्ता निकाला जाए ताकि गरीब परिवार के बच्चो को भी पढाई का अवसर मिल सके। उधर आॅन लाइन पढाई से शिक्षको और छात्र-छात्राओ सभी पर प्रतिकूल प्रभाव भी पडता नजर आ रहा है। मोबाईल फोन और लैपटाप पर आन लाईन पढाई करते समय कई घंटे इनसे जुडे रहने से जहां छात्र-छात्राओ को सिरदर्द और आंखो में दर्द जैसी दिक्कते बन रही है। वही शिक्षको के सामने भी ऐसी ही दिक्कते सामने आ रही है।