नई दिल्ली. कोरोना वायरस नाम सुनते ही हाथ पैर कांपने लगते हैं. इंसानी जहन में कई सवाल गूंजने लगते हैं. शंकाओं के बादल मन में भय की बारिश करने लगते हैं. हो भी क्यों ना? दुनिया भर में एक लाख 70 हजार से ज्यादा लोगों को अपनी गिरफ्त में लेने और सात हजार से अधिक लोगों का जीवन समाप्त कर देने वाले कोरोना का प्रभाव है ही ऐसा.
दुनियाभर के देश इसकी दवाई बनाने में जुटे हुए हैं. कोरोना चौथी स्टेज में जाकर खतरनाक हो जाता है. यह बीमारी दुनिया भर में छुआछूत के रोग के रूप में अपना प्रभाव दिखा रही है. अभी तक एकमात्र तरीका संक्रमित लोगों से दूर रहने का ही निकल कर सामने आया है और लोग उसी का पालन भी कर रहे हैं. लेकिन शोध के अनुसार एक नई बात सामने आई है कोरोना इंसानी मल से भी फैल सकता है. यदि रिसर्च की बात मान ली जाए तो यह वायरस हिंदुस्तान में कहर बरपा देता. लेकिन 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किये गये एक प्रयास ने कोरोना की रफ़्तार को रोक दिया है.
पहले जानिए कारण
दरअसल, चीन के वुहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस के बारे में यह धारणा थी कि यह संक्रमित व्यक्ति जिसे जुकाम, खांसी, बुखार, छींकना, खासना जैसे लक्षण वाले संक्रमण से प्रभावित लोगों के संपर्क में आने से यह बीमारी फैलती है. लेकिन चीन की एक यूनिवर्सिटी ने इस पर शोध किया है और नया खुलासा भी कर दिया. इस शोध में कहा गया है कि यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के मल से भी फैलता है. हांगकांग यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग ने कोरोना के 14 मरीजों को अपने रिसर्च में शामिल किया और उनकी बॉडी के अलग-अलग तरह के 339 सैंपल लिए. इसमें खून, मूत्र, थूक,और मल आदि शामिल थे लेकिन जब परिणाम सामने आया तो सभी हैरान थे. मरीजों के मूत्र, थूक में वायरस तो नहीं मिला लेकिन मल में वायरस की पुष्टि हुई. इतना ही नहीं 14 के 14 मरीजों को मल के द्वारा ही संक्रमण हुआ. 14 में से 4 मरीजों के खून में भी संक्रमण मिला. रिसर्च पैनल में शामिल प्रोफेसर पाल चैन के अनुसार वैसे तो वायरस की पहचान थूक की जांच से हो जाती है फिर भी बाकी के टेस्ट करवाने बहुत जरूरी है. रिसर्च के अनुसार मल की जांच कोरोना वायरस की पहचान का कारगर तरीका साबित हो सकता है. चीन के इस कोशिश में दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है. डॉक्टर अब कोरोना के टेस्ट के लिए स्टूल टेस्ट पर भी जोर दे रहे हैं.
पीएम ने बचा लिया कोरोना से, लोगों के लिए वरदान था 2014 का वह फैसला
भारत में भी कोरोना ने दस्तक दी है. भारत में तकरीबन डेढ़ सौ लोग कोरोना से पीड़ित हैं और 3 लोगों की जान कोरोना के कारण चली गयी. मल के रिसर्च के बाद यह बात सामने आई कि यदि भारत में शौचालय ना होते तो कोरोना की रफ्तार भारत में रोकना नामुमकिन था लेकिन 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए शौचालयों के निर्माण पर जोर दिया और खुले में शौच से मुक्ति दिलाई. यदि हालात पहले वाले होते तो निश्चित तौर पर करोना को रोकना बहुत कठिन हो जाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2014 का निर्णय भारत वासियों के लिए वरदान साबित हुआ है.


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