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महिलाएं ही नही अब पुरुष भी ले सकेंगे लंबी छुट्टी, सरकार ने बनाया इसके लिए कायदा-कानून

सरकार ने महिलाओं की तरह पुरुषों के लिए भी चाइल्ड केयर लीव से संबंधित कानून बना दिया है. पुरुष कर्मचारियों की जरूरत को समझते हुए मोदी सरकार ने सन 2018 में ही सिंगल पैरंट पुरुष कर्मचारियों के लिए इसका खाका तैयार कर लिया था. सोमवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस कानून के जागरूकता की कमी को स्वीकार किया और इसके बढ़ावा देने की बात कही.

पुरुषों की जिम्मेदारी को समझ सरकार ने लिया फैसला

सिंगल पैरंट यानी अकेले रहने वाले पुरुषों के लिए अच्छी खबर सोमवार को यानी 26 अक्टूबर को आई जब केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सभी सरकारी पुरुष कर्मचारी भी चाइल्ड केयर लीव यानी सीसीएल के हकदार होंगे. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक अकेले पुरुष जो अपने बच्चे का पालन पोषण कर रहे हो उनके लिए छुट्टी दिए जाने का प्रावधान सरकार ने किया है.

किसको मिलेगा लाभ और क्या कहते हैं नियम

  • ऐसे व्यक्ति जो विधुर हों, तलाकशुदा हो अविवाहित हो आते हैं.
  • बच्चे को पालने के लिए सिंगल पैरंट पुरुष को 730 दिनों की छुट्टी दी जाएगी. इस छुट्टी को बच्चे के 18 साल होने तक लिया जा सकता है. विकलांग होने की स्थिति में यह आयु सीमा 22 साल तक की होगी.
  • 730 दिन की छुट्टी में से पहले 365 दिन की छुट्टी में पूरी सैलरी मिलेगी. अगले 365 दिनों की छुट्टी में कुल सैलरी का 80% रकम दी जाएगी.
  • यह छुट्टियां कमाई गई छुट्टियों के कोटे से मिलेगी.
  • साल भर में 3 बार से अधिक इन छुट्टियों को नहीं लिया जा सकता. मतलब 365 दिन की छुट्टी 1 साल में 3 बार में ली जाती सकती है.
  • सक्षम अधिकारी से अप्रूवल लेकर कोई भी सिंगल पुरुष पैरंट चाइल्ड केयर लीव का लाभ उठा सकता है.
  • छुट्टी लेने वाले कर्मचारी को इस दौरान लीव लेवल कांसेप्शन का फायदा मिलेगा. पुरुष 15 दिन की पैटरनिटी लीव भी ले सकता है.

अभी तक क्या कहता था कानून

डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सेवा शर्तें निर्धारित करता है. इसी में छुट्टियों का प्रावधान होता है. चाइल्ड केयर लीव भी इसी प्रावधान में शामिल है. अब तक इस तरह का चाइल्ड केयर लीव केवल महिलाओं के लिए ही था. इस प्रावधान के अंतर्गत सिंगल मदर और सामान्य महिलाएं दोनों आती थीं. मोदी सरकार ने 2018 में सीसीएल रूल 1972 में बदलाव किया. सरकार ने महिलाओं के अलावा पुरुषों को भी जिम्मेदार माना. यही कारण है कि सिंगल पुरुषों के लिए भी बच्चों के लिए चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान कानून में जोड़ दिया गया.

महिलाओं के लिए चाइल्ड केयर के क्या है नियम

  • महिलाएं अपनी 180 दिन की मेटरनिटी लीव चाइल्ड केयर लीव के साथ ले सकती हैं.
  • यह छुट्टी बच्चे को गोद लेने पर भी मिल सकती है.
  • अगर महिला सिंगल पैरंट है तो उसे साल में 6 बार छुट्टियों का लाभ मिलेगा जबकि अन्य महिलाओं को साल में केवल 3 बार ही इस तरह की छुट्टी का लाभ मिलता है.
  • 18 साल से कम उम्र के सामान्य बच्चे और 22 साल तक के विकलांग बच्चों के लिए महिला कर्मचारियों को उनकी देखरेख के लिए पूरी सेवा के दौरान अधिकतम 2 साल यानी 730 दिन की छुट्टी सरकार द्वारा दी जाती है.

आदित्य तिवारी ने बदल दी जमाने की सोच

वुमंस डे के मौके पर ‘बेस्ट मदर ऑफ द वर्ल्ड’ का अवार्ड पाने वाले आदित्य तिवारी ने पुरुषों और चाइल्ड केयर को लेकर एक नई बहस को छेड़ दिया. सवाल उठने लगे क्या बच्चों की जिम्मेदारी केवल महिलाओं की जिम्मेदारी है? भारत सरकार ने भी आदित्य तिवारी और लोगों के बीच उठ रहे इस सवाल को समझा जिसके बाद सिंगल पैरंट पुरुष के लिए अच्छी खबर सरकार ने दे दी. दरअसल आदित्य तिवारी ने सन 2016 में डाउन सिंड्रोम से पीड़ित एक बच्चे को गोद लिया. मार्च 2020 में उनको बेस्ट मदर ऑफ द वर्ल्ड का अवार्ड दिया गया.

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Prakash Pandey

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