Lockdown में अपने घर पहुंचने की जिद मजदूरों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगी है. सरकार की देरी से निराश और हताश मजदूर पैदल ही अपने घरों को निकल पड़े हैं जो अब रास्ते में उनके लिए खतरनाक साबित हो रहा है. आए दिन मजदूर सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं. अब तक तकरीबन 50 से अधिक मजदूरों को असमय मौत मिली है. रोजी रोटी और सरकारी पेचीदगियों से बचने के लिए मजदूरों ने पैदल ही अपने घरों को पहुंचने का निर्णय ले लिया. सरकारी उपेक्षा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई कई सौ किलोमीटर दूर तक पैदल चलने के बाद भी ना तो कहीं रोका जाता है ना टोका जाता है, नाही शेल्टर होम में उनको रखने की बात सोची जाती है. जब तक सरकार जागी तब तक कई लोग मौत की नींद सो चुके थे.
उत्तर प्रदेश से दिन निकलते ही आई बुरी खबर
सड़क हादसे की ताजा और बुरी खबर उत्तर प्रदेश से आई है जहां 24 मजदूर सड़क हादसे का शिकार हो गए. उत्तर प्रदेश के औरैया में बिहार झारखंड लौट रहे मजदूरों के ट्रक को एक दूसरे ट्रक ने टक्कर मार दी जिसके चलते मौके पर ही 24 मजदूर असमय मृत्यु का शिकार हो गए और 15 मजदूरों की हालत गंभीर है जो अस्पताल में जिंदगी मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं.
मजदूरों की मौत की संख्या 50 के पार
लॉक डाउन के तकरीबन 2 महीने होने जा रहे हैं ऐसे में रोजी रोटी के संकट को न झेल पाने वाले मजदूर घरों के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं. यह मजदूर रास्ते में या तो किसी ट्रक डीसीएम का सहारा लेते हैं या फिर पैदल चलते रहते हैं. सरकार द्वारा घोषणा की जाती रही है कि बस और ट्रेन के द्वारा मजदूरों को सुरक्षित वापस लाया जाएगा बावजूद इसमें देरी होने के चलते मजदूर पैदल ही सड़कों पर दिखाई दे जा रहे हैं. अब तक रेल और सड़क हादसों में तकरीबन 50 से अधिक मजदूर अपनी जान गवा चुके हैं. 24 मार्च से लगे देशव्यापी लॉक डाउन के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से मजदूरों का अपने घर की तरफ लौटना जारी है.
महाराष्ट्र में हुई थी रेल से दुर्घटना
घर पहुंचने की चाह में 16 मजदूर औरंगाबाद में ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत का शिकार हो गए थे. मध्य प्रदेश के रहने वाले मजदूर महाराष्ट्र के जालना स्टील प्लांट में मजदूरी करते थे. सभी 16 उमरिया और शहडोल जिले के रहने वाले थे. औरंगाबाद से 10 किलोमीटर दूर स्थित करमाड में ट्रेन की चपेट में आने के कारण उनकी मौत हो गई थी. सभी ने रेल पटरियों के जरिए अपने घर पहुंचने का निर्णय किया था. लंबी दूरी इनकी जिंदगी पर भारी पड़ गई और थकान के चलते पटरी पर सो गए कि सुबह होते ही मालगाड़ी ने उन्हें रौंद दिया.
उत्तर प्रदेश में बिहार के मजदूर हुए मौत का शिकार
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 14 मई को बिहार के 6 मजदूर मौत का शिकार हो गए थे. बिहार के गोपालगंज आरा और पटना के रहने वाले यह मजदूर हरियाणा से अपने घरों के लिए वापस लौट रहे थे. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर सहारनपुर हाईवे पर यह दर्दनाक हादसा हुआ जहां एक बेकाबू रोडवेज बस ने इन्हें रोक दिया जबकि चार मजदूर बुरी तरह से घायल हुए थे.
मध्यप्रदेश में जीवन पर क्लेश
मध्यप्रदेश में भी 13 मई को गुना में बड़ा सड़क हादसा हुआ जिसमें 8 मजदूरों की जिंदगी समाप्त हो गई और 50 से अधिक घायल हो गए. गुना जिले में बुधवार को मजदूरों से भरी कंटेनर के टक्कर एक खाली बस से हो गई थी टक्कर इतनी भयानक थी कि मौके पर ही 8 लोगों ने दम तोड़ दिया.
इससे पूर्व हरियाणा के गुड़गांव में 29 मार्च को एक कंटेनर की चपेट में आने से 5 मजदूरों की मौत हो गई थी. यह हादसा कुंडली मानेसर पलवल हाईवे पर हुआ था. इतना ही नहीं 27 मार्च को 8 मजदूर तेलंगाना में भी सड़क हादसे में मारे गए थे.
सरकार को इन मजदूरों के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी. स्थानीय प्रशासन को आदेशित करना होगा कि सड़क पर कोई भी मजदूर पैदल ना चले जो जहां है उसको वही शेल्टर होम में रखने की व्यवस्था करनी होगी. इसके बाद ही मजदूरों के पैदल चलने पर रोक लगाई जा सकेगी और उनके जीवन को बचाया जा सकेगा.





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