COVID-19 Live Update

Global Total
Last update on:
Cases

Deaths

Recovered

Active

Cases Today

Deaths Today

Critical

Affected Countries

Total in India
Last update on:
Cases

Deaths

Recovered

Active

Cases Today

Deaths Today

Critical

Cases Per Million

बोल वचन खास

मदर्स डे पर ऐसी तस्वीर सामने आई जो ना केवल आपको भावुक कर देगी बल्कि पत्थर दिल को भी रोने को मजबूर कर देगी, ये कहां आ गए हम…

बड़वानी/ मध्यप्रदेश.10 मई को पूरी दुनिया मदर्स डे मना रही थी. लेकिन इसी बीच दर्द और साहस की पटकथा लिखी जा रही थी. कोरोना वायरस के चलते देश में लॉक डाउन चल रहा है. ऐसे में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना मुश्किल हुआ है. हालात बड़े गंभीर हैं. लॉक डाउन में ऐसी ऐसी तस्वीरें सामने निकल कर आई हैं जो न केवल विचलित कर देती हैं बल्कि सोचने को मजबूर कर देती हैं कि कहां से चले थे और कहां आ गए. हम ऐसी ही एक कहानी रूह कंपा देने वाली मध्यप्रदेश के बड़वानी से सामने आई है. मातृत्व दिवस पर ऐसी पीड़ा, इतना संघर्ष आपको निश्चित ही विचलित कर देगा. रूह में सिहरन पैदा कर देने वाली यह खबर मध्य प्रदेश महाराष्ट्र के बीजासन बॉर्डर से सामने आई है. शनिवार को शकुंतला नाम की एक महिला अपने पति राकेश कॉल के साथ बॉर्डर पर पहुंची थी. तपती दोपहरी में गरम धरती पर अपने कदमों से सफर तय करने वाली शकुंतला की गोद में 5 दिन का नवजात बच्चा था.

शकुंतला ने पुलिस अधिकारी को बताया

जैसे ही शकुंतला और उनके पति राकेश कौल बिजासन बॉर्डर पर पहुंचे. मौके पर ड्यूटी पर तैनात इंचार्ज कविता कनेश ने उनको रोक लिया और बच्चे के बारे में शक होने पर उनसे पूछताछ की. पूछताछ में शकुंतला ने बताया कि, “यह बच्चा मेरा ही है मैडम! इसको मैंने सड़क किनारे मुंबई आगरा हाईवे पर जन्म दिया है.” पीड़िता की बात सुनते ही लेडीज पुलिस कर्मी के होश उड़ गए दिमाग को सुन्न देने वाली इस दास्तां से पुलिसकर्मी महिला एक बार को सन्न रह गई. आगे जो महिला ने कहा वह और भी हैरान कर देने वाला था . महिला ने अपनी बात पूरी करते हुए महिला पुलिसकर्मी कविता कनेश को बताया कि, “मैंने इस बच्चे को 70 किलोमीटर पैदल चलने के बाद जन्म दिया था, जिसकी मदद चार राहगीर महिलाओं ने की थी.” शकुंतला के एक-एक शब्द कानों को चुभ रहे थे. दर्द की दास्तां को बयां कर रहे थे. शकुंतला ने अगली जो लाइन बताई उसके बाद से कविता कणेश ही नहीं आप भी भाव विभोर हो जाएंगे और बिना सलूट किए नहीं रह पाएंगे. शकुंतला ने इंचार्ज को बताया कि, “बच्चा जन्म देने के बाद वह करीब 1 घंटे बाद नवजात को गोद में लेकर तकरीबन 160 किलोमीटर और पैदल चली”.

हैरान पुलिस ने मानवीय संवेदना को ऊपर रखा

महिला शकुंतला और उसके पति की बात सुनकर इंचार्ज कविता कनेश ने पहले पुरे परिवार को खाना खिलाया फिर उनकी एक 2 साल की बेटी को चप्पल दिलवाई और प्रशासन की मदद के बाद उनको एक वाहन के जरिए घर भेजने की व्यवस्था करवाई.

पत्नी का दर्द बताते बताते रोने लगा पति

मामले की जानकारी के मुताबिक महिला प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में अपने पति के साथ नासिक से सतना मध्यप्रदेश के लिए पैदल निकली थी. नासिक से सतना की दूरी करीब 1000 किलोमीटर है. इसके बाद भी शकुंतला ने हिम्मत नहीं खोई और पैदल चलती गई. पूरे मामले की जानकारी पुलिस को देते हुए राकेश कौल ने बताया कि हमारी यह यात्रा बहुत ही कठिन थी लेकिन क्या करते आने की मजबूरी थी, अगर वहां रहते तो शायद भूखे मर जाते. लॉक डाउन के चलते सारे काम धंधे बंद हो गए हैं, जो जमा पूंजी थी वह भी धीरे-धीरे खत्म हो गई ऐसे हालातों में हमें अपने गांव सतना जिले में ऊंचाहार गांव पहुंचना था और हमने पैदल ही चलने का फैसला कर लिया.

हालांकि पुलिस के सामने आने के बाद से राकेश उसकी पत्नी और उसके दोनों बच्चों की मदद हो गई. भूख से राहत मिली और घर पहुंचने के लिए गाड़ी लेकिन सवाल यह है कि ‘कहां से चले थे और कहां आ गए हैं हम’. लॉक डाउन की इस तस्वीर मे जहां मां के प्रेम को सेल्यूट करना सिखाया वही दर्द की दास्तान ने चिंतन करने पर भी मजबूर किया है.

About the author

Prakash Pandey

Add Comment

Click here to post a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.