पॉलिटिकल खास

मोदी सरकार के 7 साल पूरे आंदोलित किसान आंदोलन के जरिए मना रहे ‘काला दिवस’

केंद्र में बीजेपी सरकार के आज 7 साल पूरे हो गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 7 साल से देश की सत्ता पर काबिज है. जहां बीजेपी में इस बात को लेकर जश्न है वहीं केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित किसानों ने आज अपने 6 महीने पूरे किए. संयुक्त किसान मोर्चा आज काला दिवस मना रहा है. किसान संगठनों ने सरकार के विरोध स्वरूप काले झंडे लगाने का फैसला किया है. महत्वपूर्ण यह है किसानों के एक बड़े संगठन भारतीय किसान संघ ने आंदोलन को समर्थन देने से इनकार किया है और काला दिवस के जरिए कुछ किसान संगठनों पर आतंक पैदा करने का आरोप भी लगाया है.

6 महीने पहले 26 मई को ही किसानों ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन शुरू किया था. आज जहां मोदी सरकार के 7 साल पूरे हुए वहीं किसान आंदोलन के भी 6 महीने पूरे हो गए हैं. पंजाब के विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने किसानों के समर्थन में पटियाला और अमृतसर के अपने आवास पर काला झंडा लगाया है वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों को आंदोलन से बचने की सलाह दी है. हालांकि किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर फिर से बातचीत का प्रस्ताव रखा है. 22 जनवरी के बाद से किसानों और सरकार के बीच कोई वार्ता नहीं हुई है. किसानों के बड़े संगठन भारतीय किसान संघ ने इस आंदोलन को समर्थन देने से इनकार कर दिया. आंदोलन को देखते हुए दिल्ली और हरियाणा पुलिस अलर्ट पर है.

दिल्ली पुलिस ने नहीं दी प्रदर्शन की परमिशन

किसानों के आंदोलन पर दिल्ली पुलिस ने पहरा लगाया है. दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता चिन्मय बिस्वाल ने बताया कि कोरोनावायरस के मद्देनजर प्रदर्शन के लिए लोगों को भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. यदि ऐसा करने की कोई कोशिश करेगा तो सख्त कार्रवाई की जाएगी. खास बात यह भी है कि कांग्रेस, जेडीएस, एनसीपी, टीएमसी, शिव सेना, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा, जेकेपीए, सपा, बसपा, आरजेडी, सीपीआई, सीपीएम और आम आदमी पार्टी समेत 14 विपक्षी दलों ने किसानों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया है.

अंतिम वार्ता 22 जनवरी को

सरकार और किसानों के बीच आखिरी बार 22 जनवरी को बातचीत हुई. उसके बाद दोनों पक्षों में कोई बात नहीं हुई. संयुक्त किसान मोर्चा ने कोरोना को देखते हुए केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने की पहल की है. प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि धरना कृषि कानून वापस लेने के बाद ही समाप्त होगा. इस बीच कई जगहों पर ऑनलाइन धरना भी दिया जा रहा है. किसान दिल्ली के बॉर्डर पर धरने पर बैठे हैं. इससे पहले किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच 11 राउंड की वार्ता हुई लेकिन सभी बेनतीजा रही. 22 जनवरी के बाद किसान नेता और सरकार एक टेबल पर नहीं बैठे. जान लेना महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार कानून में सुधार करने के लिए तैयार है लेकिन किसान संगठनों इसे रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. इससे पहले कई बार केंद्र सरकार ने किसान संगठनों को बातचीत करने का प्रस्ताव दिया लेकिन किसान संगठनों ने यह कहकर कि कानून रद्द होने तक कुछ नहीं होगा, प्रस्ताव को अस्वीकार किया.

भारतीय किसान संघ का काला दिवस आंदोलन का विरोध

देश के सबसे बड़े संगठन भारतीय किसान संघ ने बयान जारी किया है और कहा है कि दिल्ली की सीमा पर आंदोलनरत किसान नेताओं द्वारा 26 मई को लोकतंत्र का काला दिवस घोषित किया गया है. इसका भारतीय किसान संघ विरोध करता है. इसमें 26 जनवरी जैसा भय और आतंक पैदा करने की योजना दिखाई दे रही है. 26 मई का दिन चुनने के पीछे कारण कुछ भी रहा हो परंतु देश के किसान इस बात से आक्रोश में हैं कि किसानों के नाम को बदनाम करने का अधिकार इन स्वयंभू तथाकथित किसान नेताओं को किसने दिया है.

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Prakash Pandey

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