पांडेयजी तो बोलेंगे

‘मामा’ ही करवाते हैं सुरक्षा का एहसास, मामा का अपमान करने वालों कभी सोचा है…

पुलिस स्मृति दिवस-2020 पर देश भर के पुलिस के वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि, कोटी कोटी नमन

PRAKASH K PANDEY

देशभर में आज पुलिस स्मृति दिवस 2020 मनाया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर पुलिस के जवानों को याद किया. उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए, उन पुलिसवालों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी जो सेवा करते हुए शहीद हो गए. राज्य सरकारों से लेकर जिला मुख्यालय तक पुलिस स्मृति दिवस का आयोजन किया गया, परेड की गई और श्रद्धांजलि दी गई. सहारनपुर पुलिस लाइन जिला मुख्यालय पर भी स्मृति दिवस का आयोजन किया गया जिसमें डीआईजी उपेंद्र कुमार अग्रवाल और जिले की कप्तान डॉ एस चन्नप्पा ने शिरकत की. आज स्मृति दिवस के इस अवसर पर आप लोगों से कुछ सवाल पूछने हैं. सवाल है आत्म चिंतन का, सवाल है मनन का, सवाल है सवाल उठाने वालों पर, सवाल उन पर भी है जो हमेशा पुलिस पर सवाल करते हैं.
मित्र पुलिस, आपकी सेवा में तत्पर पुलिस ऐसे ही स्लोगन से सजे थानों और मुख्यालयों पर काम करने वाली पुलिस जिसके कारण हम 24X7 घंटे सुरक्षित महसूस करते हैं बावजूद इसके कभी पुलिस को वो सम्मान नहीं मिल पाया जिसकी वो हकदार है. आमतौर पर लोगों ने पुलिस का उपहास उड़ाने के लिए उन्हें ठुल्ला, मामा जैसे अनेकों नाम दिए. फ़िल्म इंडस्ट्री से लेकर तमाम जगह किस्से-कहनियों में पुलिस को सिर्फ भ्रष्ट, अपराधियों से सांठ-गांठ करने वाले के रूप में ही दिखाया गया. लेकिन क्या सिर्फ यही सच है? हम क्यों सिर्फ सिक्के का एक ही पहलु देखते हैं?
ऐसा नही है कि महकमे में भ्रष्टाचार नही है लेकिन ऐसे लोगों की संख्या सीमित है. चंद लोगों के चलते सभी पर सवाल उठाना कितना जायज़ है? पुलिस में भी हमारे बीच से ही आए लोग हैं. क्या ऐसा करके पुलिस से सदैव न्याय की अपेक्षा करने वाले हम लोग खुद पुलिस के साथ अन्याय नहीं कर रहे हैं.
राज्य ही नही बल्कि पूरे देश भर में पुलिस महकमे के अलावा क्या ऐसा कोई विभाग है जो 24 घंटे सातों दिन काम करता है? जवाब नहीं में मिलेगा.
बिना यूनियन बाज़ी, बिना पर्याप्त सुविधाओं के, कम सैलरी और कुछ के सरकारी आवासों की हालत इतनी खराब है कि बारिश में घर के अंदर ही बारिश का एहसास हो जाता है,फ़िर भी सेवा भाव मे कमी नही रखने वाले विभाग को हमेशा शक की निगाह से देखा जाता रहा है. महिला पुलिसकर्मियों के लिए वाशरूम जैसी जरूरी सुविधा तक का भी कई जगह अभाव है. तमाम मूलभूत सुविधाओं के अभाव का मलाल न करते हुए खाकी पहने हमारे उत्तर प्रदेश पुलिस के वीर जवान सदैव तत्पर रहते हैैं हमारी सुरक्षा में, बड़े से बड़े हादसों में तुरंत पंहुचाती है हम तक मदद, आपदा के समय में बन जाती है जीवन रक्षक, अपनी जान की परवाह किये बगैर हमें करती है सुरक्षित.
जीवन भर हमारी सुरक्षा में अपराधियों से लोहा लेते हुए अपनी जान जोखिम में डालने वाले पुलिस के जवानों की सुरक्षा को लेकर आपके मन मे कभी सवाल उठा है? धरने प्रदर्शनों के बीच अपमान को झेलते हुए चुपचाप सुनते रहना,, अति के बाद एक्शन लेना कभी सोचा है आपने? असुरक्षा के बीच जन सुरक्षा की गारंटी है पुलिस.
हम अपने घरों में इसलिए आराम से सो जाते हैं क्योंकि हमें भरोसा है कि बाहर पुलिस है. देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए जिस प्रकार हमारे सैनिक दिन रात खड़े हैं वैसे ही घर के अंदर किसी प्रकार की अनहोनी न हो उसके लिए यह ‘ख़ाकीवीर’ सैनिक खड़े हैं. हमें यह भी समझना होगा कि घर के अंदर अपनों से ही जूझना किसी चुनौती से कम नहीं होता इसलिए समाज की सशक्त पहरेदार है पुलिस.
राज्य में कानून-व्यवस्था की बात हो या अपराधियों पर लगाम लगाना हो या फिर प्रदेश में आई हो कोई बड़ी-छोटी प्राकृतिक आपदा या फिर हो कोरोना काल, हमारी पुलिस ने हर बार अपने को साबित किया है, अपनो विश्वसनीयता को बनाये रखा है. पुलिस द्वारा बनाई गई SDRF/NDRF ने भी अनेकों सफल रेस्क्यू ऑपरेशन्स करके न केवल अबतक हजारों जाने बचाई है बल्कि आमजन का विश्वास जीत उनके दिलों में एक विशेष स्थान भी बना लिया है. पुलिस की टीमों ने माउंट एवेरेस्ट फतेह कर हमें गौरवान्वित किया है.
सवाल आपसे है, सोचिए, पुलिस को हीन भावना से मत देखिये, मत दीजिये उसे दोयम दर्जा, मत उड़ाइये उसका मजाक, वो भी हमारे बीच से ही आते हैं, हमारे अपने ही हैं, हमारे भाई-बंधु हैं. लगातार ड्यूटी करने से कई बार चिड़चिड़ापन देखने को मिल जाता है लेकिन इसके लिए दुर्भावना रखना ठीक नहीं. मित्र पुलिस को मित्र ही रखिए शत्रु न बनाइये.

हमें गर्व है हमारी पुलिस पर

पुलिस स्मृति दिवस पर पुलिस के वीर शहीदों को मेरा कोटी कोटी नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि, जो सेवा कर रहे हैं उन्हें हृदय से प्रणाम

वन्देमातरम। जय हिंद। जय भारत।
जय उत्तर प्रदेश पुलिस।

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Prakash Pandey

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