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लॉक डाउन के बीच पुलिस इंस्पेक्टर ने जारी किया फ़रमान,बन गयी चर्चा, जानिये क्या है मामला

देवबंद/ सहारनपुर. जनपद के देवबंद कोतवाल यज्ञ दत्त शर्मा आज पूरे दिन चर्चा में रहे. समर्थन और विरोध में पत्रकारों की बड़ी जमात खड़ी रही. दो तरह के आदेश ने संदेह को जन्म दिया. पहले आदेश से जनपद के पत्रकार नाराज़ दिखाई दिए तो वहीं दूसरे आदेश के बाद समर्थन भी दिखाई दिया.

क्या थी पहली आवश्यक सूचना

देवबंद कोतवाली प्रभारी दत्त शर्मा ने पत्रकारों के लिए आवश्यक सूचना कोतवाली पर चस्पा करते हुए सूचना में लिखवाया कि

“सभी पत्रकार बंधुओं से अनुरोध है कि प्रतिदिन अपराध से संबंधित सूचना पीआरओ सेल सहारनपुर से प्राप्त करें तथा अनावश्यक रूप से थाना पर बैठ कर अपना समय व्यर्थ ना करें.”

प्रभारी निरीक्षक देवबंद थाना के इस फरमान के बाद से इसकी प्रति सोशल मीडिया पर पूरे दिन तैरती रही जिसके बाद पत्रकारों में इस बात को लेकर रोष देखा गया.

स्टेट बैंक के बाहर हाईवे पर कवरेज करने के दौरान एक मीडिया कर्मी पर पुलिस की कर्मी के अशोभनीय व्यवहार को इसका कारण माना गया. कोतवाली प्रभारी के इस आदेश ने पत्रकारों और कोतवाली के बीच दूरी को जगजाहिर कर दिया.

दूसरे फरमान से चर्चा में बढ़ी शान

शाम होते होते सोशल मीडिया पर कोतवाली प्रभारी देवबंद यज्ञ दत्त शर्मा की शान में कसीदे पढ़े जाने लगे.इसका कारण था कोतवाली प्रभारी के द्वारा जारी दूसरा फरमान. दूसरे फरमान में कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक यज्ञ दत्त शर्मा की ओर से कोरोना वायरस के संक्रमण का हवाला देकर पत्रकारों को कोतवाली ना आने की सलाह दी गई है.

साथ ही साथ सूचना देने के लिए क्राइम इंचार्ज संजय सिंह को जिम्मेदारी दी गई है जो क्षेत्र के पत्रकारों को फोन पर घर बैठे या व्हाट्सएप पर क्राइम की जानकारी देंगे.
दूसरी सूचना जो वायरल हो रही है उसमें लिखा है कि

“सभी पत्रकार बंधुओं से अनुरोध है कि वर्तमान में कोविड-19 के संक्रमण के दृष्टिगत सोशल डिस्टेंस अपनाते हुए कृपया समाचार संकलन हेतु अनावश्यक थानेश्वर चौकी आने से बचें तथा इस हेतु श्री संजय सिंह निरीक्षक अपराध मोबाइल नंबर 86 30 45 2371 से अथवा पीआरओ सेल सहारनपुर से संपर्क करें.

इस सूचना के बाद इंस्पेक्टर देवबंद यग दत्त शर्मा की प्रशंसा में पोस्ट वायरल होने लगी जिसमें उनके इस कृत्य को काबिले तारीफ बताया गया है और पत्रकारों के हित में उठाया गया सराहनीय कदम भी माना गया है.

बड़ा सवाल जो रह गया

इन दोनों मामलों में भले ही पहले इंस्पेक्टर के फरमान के विरोध में पत्रकारों का सामने आना हो या बाद में समर्थन में उनके पक्ष में खड़ा होना, एक सवाल जो रह गया वह यह कि आखिर पत्रकारिता के अनुरूप ही पत्रकार व्यवहार क्यों नहीं करते? किसी भी बात की जल्दी आखिर क्यों रहती है? तत्काल विरोध या तत्काल समर्थन पत्रकारिता के मूल्यों के अनुरूप नहीं है.

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Prakash Pandey

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