माटी के रंग

बाल कहानी- ……पढ़ाई भी जरूरी है

अखिल और आदित्य में गहरी दोस्ती थी. दोनों के स्वाभाव में एक अंतर था. अखिल पढ़ाई में बहुत तेज था. आदित्य खेल में . आदित्य दिन-रात बस खेल के सपने देखता रहता. वो इसके लिए खूब मेहनत भी करता था. वो बैडमिन्टन खेलता था. उसने स्टेट लेबल का टूर्नामेंट भी खेला हुवा था. वहां से सिल्वर मैडल मिला था.
अखिल मेहनत के साथ पढाई करता था. वो हमेशा क्लास टॉप करता था. आदित्य अखिल से हमेशा पूछता कि तुम ये सब कैसे कर लेते हो. अखिल बस मुस्कुरा देता.
एक बार आदित्य का मैच था. वो बड़ी मेहनत के साथ अपनी तैयारी में जुट गया. मैच वाले दिन उसने अच्छा खेला.वो जीत गया. उसे एक ट्राफी भी मिली. अखिल आदित्य की इस जीत पर बहुत खुश हुवा. उसने उसे बहुत बधाई दी.
हाफ इयरली एग्जाम नजदीक थी. अखिल खूब तैयारी कर रहा था. उसे इस बार भी टॉप करना था. उसका इस बार का लक्ष्य 95 प्रतिशत का था. इसके लिए उसने जी-जान लगा दी थी.
उधर आदित्य परीक्षा से बहुत खबराया हुवा था. उसे कुछ भी याद नहीं था. क्योंकि उसका सारा ध्यान तो खेल पर ही रहता था. इसलिए उसने कभी भी ढंग से पढ़ाई नहीं की.
देखते ही देखते एग्जाम भी हो गए. रिजल्ट भी आ गया. इस बार भी हर बार की तरह अखिल ने पूरी क्लास में सबसे ज्यदा अंक प्राप्त किये थे. उधर आदित्य दो विषयों में फेल हो चुका था. रिजल्ट के बाद से आदित्य बहुत निराश हो चुका था. अब वो गुमसुम रहने लगा था. क्योंकि उसको घर पर बहुत डांट भी पड़ी थी.
आदित्य की उदासी को देखते हुए अखिल ने कहा, “क्या बात है आदित्य आजकल तुम बहुत हताश और निराशा लग रहे हो.”
“निराशा का कारण तुम जानते तो हो. मैं हाफ इयरली एग्जाम में फेल हो गया हूँ.”, आदित्य ने बोला.
“ओह्ह, तभी तुमने अपना गेम भी छोड़ दिया.”,अखिल ने कहा.
“हाँ. अब मेरा किसी भी चीज में मन नहीं लग रहा. मैं अब खेलनाभी नहीं चाहता.”, आदित्य रुवांसा होते हुए बोला.
“ऐसे कैसे चलेगा भाई. गेम में तुम बहुत अच्छे हो तुम्हें गेम नहीं छोड़ना चाहिए. तुम उसमें बहुत अच्छा कर सकते हो.”, अखिल ने कहा.
“गेम के कारण मैं अपनी पढाई में पीछे हो गया हूँ.”, आदित्य ने कहा.
“गेम के कारण पीछे कैसे हो गए. खेल हमें हमेशा संघर्ष और मेहनत की प्रेरणा देता है. एक खिलाड़ी किसी भी क्षेत्र में असफल नहीं हो सकता. वो हमेशा जीतने के लिए संघर्ष करता है. वो निराश और हताश भी नहीं होता. तुम खेल में बहुत अच्छा कर रहे हो. बस पढाई में भी अपना थोड़ा सा ध्यान लगा लो. तो बात बन जायेगी. हर व्यक्ति हर फिल्ड में अव्वल हो ये जरुरी नहीं.” अखिल ने समझाया.
“तुम ठीक कहते हो. पर खेल के साथ पढाई कैसे होगी.”, आदित्य बोला.
“पहले इस बात को दिमाग से निकाल लो कि खेल के साथ पढ़ाई नहीं हो सकती. खेल के साथ भी पढाई हो सकती है. तुम दोनों में बेहतर कर सकते हो. बस टाइम मैनेजमेंट की आवश्यकता है. तुम खेलने और पढने का समय तय कर लो. उसे सच्ची लगन के साथ फॉलो करो. देखना तुम पढ़ाई और खेल दोनों में बेहतर करोगे.” अखिल ने बताया.
“ठीक है मैं ऐसा ही करूँगा.”, ये कहते हुए आदित्य वहां से चला गया.
अखिल की बातों से आदित्य के अन्दर जोश भर गया. उसने अपनी दिनचर्या का एक नियमित चार्ट बना लिया था. वो उसी के हिसाब से खेलने और पढ़ने लगा.
एनुअल एग्जाम भी आ गए. इस बार आदित्य को एग्जाम से बिलकुल भी डर नही लग रहा था. उसकी तैयारी भी अच्छी हुई थी. उसने अच्छे से एग्जाम दिए. रिजल्ट आने पर उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा. वो बहुत अच्छे अंको से पास हो चुका था. अब वो खेल और पढ़ाई दोनों में अच्छा कर रहा था.

ललित शौर्य
ग्राम+पोस्ट-मुवानी
जिला-पिथौरागढ़
उत्तराखंड
फोन-7351467702

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Prakash Pandey

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