कोरोना वायरस के प्रभाव से दुनिया प्रभावित है. अभी तक वायरस की रोकथाम के लिए कोई भी वैक्सीन नहीं बनाई जा सकी है ऐसे में भारत हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दवा के उपयोग से कोविड-19 के मरीजों को ठीक कर रहा था. यही कारण था कि अमेरिका ने भारत से दवा मंगाने के लिए धमकी तक दे डाली थी लेकिन अब इस दवाई को लेकर नया खुलासा हुआ है.
खुलासे के मुताबिक लगभग 4 महीनों में 6 महाद्वीपों के 671 अस्पतालों से लगभग 96000 कोविड-19 मरीज़ों पर विश्लेषण के बाद वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि यह दवा हृदय रोगों को बढ़ा सकती हैं जिसमें मरीजो के मरने की संभावना ज्यादा है.
मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित खबर के मुताबिक
“हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन या क्लोरो क्वीन से किसी मरीज को लाभ के सबूत नहीं मिले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक मैक्रोलाइड कि बिना या उसके साथ इस दवा को देने से कोविड-19 के मरीजों की मृत्यु दर बढ़ सकती है.”
यह जान लेना जरूरी है कि हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन की दवा मलेरिया के मरीजों को स्वस्थ करने के लिए उपयोग की जाती है. मनदीप आर मेहरा और कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि क्लोरोक्वीन एक एंटीमाइरियल दवा है जबकि हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस और रूमेटिइड गठिया जैसे ऑटोइम्यून रोगों के उपचार के लिए प्रयोग की जाती है.
मेडिकल जर्नल द लैसेंट के मुताबिक 96032 मरीजों पर इस दवा को लेकर अध्ययन किया गया जिसमें गंभीर मरीज औसतन 53.8 आयु के थे जिनमें 46.3% महिलाएं थी. इनमें से 14888 मरीजों का उपचार जारी था जिसमें 1868 को क्लोरो क्वीन 3783 को मैक्रोलाइड के साथ क्लोरो क्वीन 3016 को हाइड्रोक्सी क्लोरो क्वीन और 6221 को मैक्रोलाइड के साथ हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दिया गया था जबकि दूसरे 81144 मरीज की स्थिति ठीक थी.
अध्ययन के परिणाम चौंकाने वाले थे. 10698 यानी 11.1% रोगियों की मृत्यु हो चुकी थी जिन मरीजों की स्थिति ठीक थी और उन्हें हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दिया जा रहा था उनमें मृत्यु दर 9.3 फ़ीसदी थी. जिन मरीजों को हैड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन मैक्रोलाइड के साथ दिया गया उनमें मृत्यु दर 23.8 फ़ीसदी थी जिन्हें केवल क्लोरोक्वीन दिया गया उन्हें मृत्यु दर 16 4% दिखा और जिन्हें मैक्रोलाइड के साथ क्लोरोक्वाइन दिया गया उन्हें मृत्यु प्रतिशत 22.2 दिखा.
लैसेट ने रिसर्च के परिणामों को देखते हुए कोविड-19 के मरीजों पर हैड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन और क्लोरो क्वीन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की वकालत की है.( साभार)




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