पॉलिटिकल खास

किसान आंदोलन के बीच पीएम पहुंचे गुरुद्वारे, मत्था टेका, लगाई अरदास, लगने लगे कयास

नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में किसान आंदोलनरत हैं. हरियाणा और पंजाब से बड़ी संख्या में सिख समुदाय के किसान पहुंचे हुए हैं. इसी बीच प्रोटोकॉल को नजरअंदाज कर पीएम अचानक गुरुद्वारा रकाबगंज पहुंच गए. इस दौरान पीएम मोदी की सुरक्षा के लिए ना तो ट्रैफिक को रोका गया था और ना ही कोई विशेष इंतजाम किए गए थे. प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुद्वारा पहुंचकर माथा टेका और गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि दी. आज सिख समुदाय शहीदी दिवस मना रहा है.
गुरुद्वारा रकाबगंज पहुंचने के दौरान ना कोई पुलिस व्यवस्था की गई और ना ही आमजन के लिए कोई अवरोधक लगाए गए. अचानक गुरुद्वारा पहुंचे पीएम को देखने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठी होने लगी.
जान लेना महत्वपूर्ण है कि पिछले 25 दिनों से गुरुद्वारे में ‘सिख समागम’ चल रहा है. पीएम को अपने बीच देख लोग सेल्फी लेने का प्रयास करने लगे. कुछ लोगों ने जहां बात की वहीं कुछ ने तस्वीरें भी खिंचवाई.
गौरतलब है कि 2 दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश में कहा था कि मैं सभी किसानों को भरोसा दिलाता हूं कि ना तो न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म किया जाएगा और ना ही कृषि मंडियों को समाप्त किया जाएगा. पीएम ने विपक्षी दलों पर किसानों को भड़काने का आरोप लगाया था.

सियासी गलियारों में चर्चा तेज़

पीएम का गुरुद्वारा में माथा टेकना पूरी तरह से धार्मिक आयोजन था. लेकिन सियासी हलकों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं. इसके पीछे का कारण आंदोलन में बड़ी संख्या में सिख समुदाय का शामिल होना है. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिख समुदाय के प्रदर्शन को एक संदेश देने की कोशिश की है. इससे पहले गुजरात दौरे के दौरान भी प्रधानमंत्री ने सिख किसानों से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा था कि

“आजकल दिल्ली के आसपास किसानों को भ्रमित करने की बड़ी साजिश चल रही है. उन्हें डराया जा रहा है कि कृषि सुधारों के बाद किसानों की जमीन पर कब्जा कर लिया जाएगा.”

क्या हैं मुलाकात के मायने

प्रधानमंत्री ने अपने गुजरात दौरे के दौरान कच्छ में बसे पंजाब के किसानों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की थी. सिख किसान भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट इलाकों में खेती कर अपना जीविकोपार्जन चलाते हैं. महत्वपूर्ण है कि पीएम से मिलने वाले अधिकांश किसान पंजाबी थे जो यहां बस गए. पीएम की किसानों से इस मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली और इसके आसपास आकर प्रदर्शन करने वालों में अधिकतर किसान पंजाब के ही हैं.

किस बात को लेकर चिंतित हैं किसान

पिछले 25 दिनों से सिंधु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को नए कृषि कानून के तीन प्रावधानों से परेशानी है. जहां सरकार इन कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों के तौर पर प्रस्तुत कर रही है वहीं किसानों को एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडी व्यवस्था खत्म होने के साथ-साथ बड़े कारपोरेट घरानों पर निर्भर होने की आशंका सता रही है. यही वजह है कि किसान कानूनों का विरोध करने के लिए सड़क पर आंदोलनरत हैं. सरकार और किसानों के बीच कई दौर की वार्ताएं होने के बाद भी कोई ठोस नतीजा निकल कर सामने नहीं आया है.

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Prakash Pandey

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