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माटी के रंग

हसरत है मेरी चांद को बदली में देख लू… जुल्फें ज़रा सी चेहरे पे बिखराईये हुज़ूर

  • बज्म ए अदब कोटद्वार की ओर से मुशायरे मैं अदबी ख़िदमात के लिए शायरों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया….
  • उस्ताद शायर महेन्द्र अश्क व शादाब जफर शादाब, तैय्यब जमाल,मौसूफ वासिफ ने मुशायरे मैं खूबसूरत कलाम पेश कर दाद बटोरी…
  हसरत है मेरी चांद को बदली मैं देख लू... जुल्फें ज़रा सी चेहरे पे बिखराईये हुज़ूर.

बज्म ए अदब कोटद्वार की ओर से बीती रात एक खूबसूरत महफ़िल ए मुशायरे व सम्मान समारोह का आयोजन रॉबट कालोनी मैं साजिद खान के निवास पर किया गया जिसमें शायरों ने खूबसूरत कलाम पेश कर मौजूद श्रोताओं को दाद देने पर मजबूर कर दिया. उस्ताद शायर महेन्द्र अश्क ,शादाब जफर शादाब, तैय्यब जमाल,मौसूफ वासिफ ने मुशायरे मैं खूबसूरत कलाम पेश कर दाद बटोरी. श्रोताओं ने जम कर लुत्फ उठाया.
शेरी महफिल की अध्यक्षता कर रहें हाजी यासीन ने कहा कि देश के हालात के साज़गार करने के लिए ये गंगा जमनी मुशायरे संजीवनी है, ऐसे आयोजन समय समय पर होने से देश मैं खास कर छोटे-छोटे कस्बों, कालोनियों मैं भाई चारे का माहोल पैदा होकर देश की हिन्दू मुस्लिम एकता अखंडता मजबूत होती हैं.
नगीना से तशरीफ़ लाए शायर बहारूद्दीन बहार की खूबसूरत निज़ामत में मुशायरे कामयाबी की मंजिलें देर रात तक चढ़ता रहा.


महफ़िल ए मुशायरे का आगाज़ मेजबान शायर साजिद खान ने खूबसूरत नात ए पाक से कुछ यू किया… क्या बात है फिदा ए रसूल ए अनाम की, दुनिया गुलाम होती है अपने ग़ुलाम की.


नौजवान शायर नौशाद अहमद शाद ने कहा..कहा चमन को जलाने में देर लगती हैं,मगर ये सच है सजाने में देर लगती है.
एक और नौजवान शायर सुहेल शहाब शम्सी ने खूबसूरत ग़ज़ल पेश करते हुए कहा.. मेरे अपने थे सभी ऐसा ना था, मैं ही दुनिया को मगर समझा ना था.
बुजुर्ग शायर शकील अहमद वफ़ा जलालाबादी ने कहा.. इस तरहां मेरी हयात ए जाओ विदा बन जाईये,आप मेरी जिंदगी की दास्तां बन जाईये.
खूबसूरत तरन्नुम के मालिक नौजवान शायर शादाब जफर शादाब ने खूबसूरत ग़ज़ल पेश करते हुए कहा..हसरत है मेरी चांद को बदली मैं देख लू,जुल्फें ज़रा सी चेहरे पे बिखराईये हुज़ूर.
महफ़िल ए मुशायरे का बाबरकत आग़ाज़ करने वाले मुतरन्निम शायर साजिद खान ने कहा.. साजिद तो मुफलिसी में भी रखता है हौसला, चाहता नहीं किसी का नुक़सान देखिये.


शायर डॉ तैय्यब जमाल साहब ने खूबसूरत ग़ज़ल पेश करते हुए कहा..जो महबूब के लब कवंल कह रहा है, यूं लगता है जैसे ग़ज़ल कह रहा है.
खूबसूरत लबों लहजे व तरन्नुम के मालिक शायर अकरम जलालाबादी ने कहा.. अल्ल्लाह सब को प्यार के सांचे में ढाल दे, नफ़रत ने कर के रख दी मौहब्बत उलट पुलट.
कोटद्वार के मशहूर शायर मंजूर अहमद मंजूर ने रूमानी ग़ज़ल पेश करते हुए कहा कहा.. दिन वही ज़िस्त के बस अच्छे हमारे होते,जो तेरी जुल्फ के साये मैं गुज़ारे होते.
हिन्दुस्तान के मशहूर व मारुफ़ शायर मौसूफ अहमद वासिफ ने ग़ज़ल पेश करते हुए कहा.. जिंदगी तूने बहुत जख्म दिये है मुझ को,अब ये हालत है तेरे नाम से डर लगता है.
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर महेंद्र अश्क ने बेहतरीन ग़ज़ल पेश करते हुए कहा..आज की रात मेरा जिस्म भी कुछ कम टूटा,आज की रात तेरी याद भी कम आई मुझे.
देर रात तक चले मुशायरे में हाफिज़ अब्दुल कय्यूम, जब्बार , कलाम ,मास्टर मौहम्मद अहमद,हाजी अब्दुल हसीन, आदिल अहमद,शाहरून,आज़ाद अहमद, फ़हीम अहमद, इरशाद अहमद, ज़फ़र अली, शमशाद सैफी आदि मौजूद रहे.मुशायरे की खूबसूरत निज़ामत शायर बहारूद्दीन बहार ने व सदारत हाजी यासीन ने की.