लखनऊ. कोरोनावायरस के प्रभाव के चलते अर्थव्यवस्था बे पटरी हो गई है जिसको वापस पटरी पर लाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रम अधिनियम में संशोधन कर 3 साल तक अस्थाई छूट देने का निर्णय किया है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 मई को इसकी घोषणा भी कर दी. इस कानून के तहत अगले 3 वर्ष तक सभी श्रम कानूनों में छूट दी जाएगी जो अस्थाई होगी. इस छूट से संबंधित अध्यादेश को कैबिनेट ने अपनी सहमति भी दे दी है.
कोरोना के चलते उद्योग धंधों पर भी संकट गहरा गया है. निवेश के अवसरों पर गहरा प्रभाव पड़ा है. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने प्रेस नोट जारी कर कहा है
“कोविड-19 वायरस महामारी के प्रकोप ने प्रदेश में औद्योगिक क्रियाकलापों में आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह से प्रभावित किया है जिससे उनकी रफ्तार धीमी पड़ गई है. लॉक डाउन की लंबी अवधि में औद्योगिक प्रतिष्ठान, कारखाने व उनसे जुड़े औद्योगिक क्रियाकलाप और उत्पादन लगभग बंद रहे हैं. इन्हें फिर से पटरी पर लाने के लिए औद्योगिक निवेश के नए अवसर पैदा करने होंगे.”
सरकार के बयान में कारखानों, व्यवसाय व प्रतिष्ठानों और उद्योगों सभी के दायरे से मुक्त करने के लिए “कुछ श्रम कानूनों के अध्यादेश 2020 से उत्तर प्रदेश अस्थाई छूट’ को मंजूरी दे दी थी लेकिन तीन श्रम कानून और 3 साल के लिए किसी अन्य अधिनियम का एक प्रावधान किया गया.
क्या होगा बदलाव
1- राज्य में 38 श्रम क़ानून लागू हैं.
2- सरकार ने कहा है किसी भी उद्योग के खिलाफ लेबर डिपार्टमेंट इनफॉर्मेंट नियम के तहत कार्यवाही नहीं की जाएगी. 3- श्रम विभाग का प्रवर्तन दल श्रम कानून के अनुपालन के लिए उनके यहां नहीं जाएगा.
4- जो उद्योग कोरोना महासंकट के चलते बंद है या कमजोर हैं उन्हें श्रम कानून में नरमी से फिर से चालू किया जा सकेगा.
सरकार के इस परिवर्तन के बाद उद्योगों को राहत मिलने की संभावना है. विशेषज्ञों की माने तो व्यापारियों और उद्योग कारखानों को इस नियम के बाद राहत मिलेगी.









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