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केवल 30 मिनट में कोरोना की रिपोर्ट देगा दुनिया का सबसे सस्ता ‘फेलूदा’, जानिए कैसे होगा फायदा

कोविड-19 जांच प्रणाली में एक नई तकनीक इजाद की गई है जिसका नाम है फेलूदा. फेलूदा से कोरोना की जांच केवल आधे घंटे में प्रेगनेंसी टेस्ट की तरह की जा सकती है इस टेस्ट किट को दिल्ली की टाटा सीएसआईआर लैब ने विकसित की है.
टाटा ग्रुप और सीएसआईआर ने यह किट डॉक्टर देबो ज्योति चक्रवर्ती और सेवित मैत्री के नेतृत्व में तैयार की गई है दुनिया की सबसे सस्ती टेस्ट किट फेलूदा मात्र ₹500 में कमर्शियल में प्रयोग हो सकेगी इसकी अनुमति भी बकायदा ड्रग्स कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने दे दी है.

क्या है खूबियां

फेलूदा की खूबी यह है कि आरटी पीसीआर टेस्ट के बराबर सटीक परिणाम देने में यह कामयाब और सस्ती है. इतना ही नहीं निकट भविष्य में अन्य महामारी ओके परीक्षण में भी यह कामयाब है. कंपनी ने बताया है कि TATA CRISPR (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats ) टेस्ट CAS9 प्रोटीन का इस्तेमाल करने वाला विश्व का पहला ऐसा टेस्ट है, जो सफलतापूर्वक कोरोना महामारी फैलाने वाले वायरस की पहचान कर लेता है.
रविवार को इस किट के बारे में जानकारी देते हुए CSIR के डीजी एस मांडे ने बताया कि दिल्ली स्थित CSIR लैब में CRISPR-Cas इम्युनिटी पर शोध किया जा रहा है. मांडे ने बताया कि रिसर्चर्स की टीम इस खास क्षेत्र में पहले से शोध कर रही हैं.
उन्होंने आगे कहा कि CSIR लैब ने ‘फेलूदा’ नाम से पेपर आधारित टेस्टिंग किट विकसित किया है. और उन्हें इसके लिए डीजीसीए से औपचारिक स्वीकृति भी मिल चुकी है. मांडे ने बताया कि यह RT-PCR से काफी अलग है और सस्ता भी है.

स्वास्थ्य मंत्रालय की क्या है सोच

स्वास्थ्य मंत्रालय के दावे में इस किट के लिए कहा गया है कि टाटा समूह ने CSIR-IGIB और ICMR के साथ मिलकर ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद विकसित किया है, जो सुरक्षित, विश्वसनीय, सस्ती और सुलभ है.
टाटा मेडिकल एंड डायग्नॉस्टिक लिमिटिड के सीईओ गिरीश कृष्णमूर्ति, ने इस संबंध में कहा, “COVID-19 के लिए Tata CRISPR टेस्ट के लिए स्वीकृति वैश्विक महामारी से लड़ने में देश के प्रयासों को बढ़ावा देगी. Tata CRISPR टेस्ट का व्यावसायीकरण देश में जबरदस्त R&D प्रतिभा को दर्शाता है, जो वैश्विक स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक अनुसंधान जगत में भारत के योगदान को बदलने में सहयोग कर सकता है.”

फेलूदा नाम के पीछे क्या है राज़

दरअसल, ‘फेलूदा’ नाम मशहूर लेखक और फिल्‍म डायरेक्‍टर सत्‍यजीत रे के काल्‍पनिक बंगाली जासूसी उपन्‍यास के एक कैरेक्‍टर फेलू ‘दा’ से प्रेरित है. मगर, इसका तकनीकी पहलू यह है कि फेलूदा FNCAS9 Editor Linked Uniform Detection Assay का शॉर्टफॉर्म है. यह स्वदेशी सीआरआईएसपीआर जीन-एडिटिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है. यह कोरोनावायरस SARS-CoV2 के जेनेटिक मटेरियल को पहचानता है और उसे ही टारगेट करता है.

कोरोना के पारंपरिक टेस्ट RT-PCR और फेलूदा में अंतर

वैसे तो फेलूदा आरटी-पीसीआर जितना ही सटीक है. मगर आरटी-पीसीआर टेस्ट को ही कोविड-19 के डायग्नोसिस में गोल्ड स्टैंडर्ड समझा जा रहा है. इनमें अंतर यह है कि फेलूदा के नतीजे जल्दी आते हैं. इसमें इस्तेमाल होने वाला डिवाइस सस्ता भी है. CSIR की मानें तो फेलूदा टेस्ट नोवल कोरोनावायरस की पहचान करने में 96% सेंसिटिव और 98% स्पेसिफिक रहा है.

कैसी है सरंचना

फेलूदा टेस्ट प्रेग्नेंसी स्ट्रिप टेस्ट की तरह है यानी यदि संक्रमण होगा तो स्ट्रिप का कलर बदल जाएगा. इसका इस्तेमाल पैथ लैब में भी किया जा सकता है. डॉ. देबोज्योति चक्रवर्ती के मुताबिक Cas9 प्रोटीन को बारकोड किया गया है ताकि वह मरीज के जेनेटिक मटेरियल में कोरोनावायरस सीक्वेंस का पता लगा सकें.
इसके बाद Cas9-SARS-CoV2 कॉम्प्लेक्स को पेपर स्ट्रिप पर रखा जाता है, जहाँ दो लाइन (एक कंट्रोल, एक टेस्ट) बताती है कि मरीज को कोरोना है या नहीं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इसे करवाने में मात्र 500 रुपए का खर्चा आता है. वहीं पारंपरिक परीक्षण में व्यक्ति को 1,500 से 2,000 खर्च करने पड़ते हैं.

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Prakash Pandey

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