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बोल वचन खास

Fect check: कोरोना काल की सबसे बड़ी अफवाहों को जानिये, जिसने सरकार के सामने खड़ी कर दी चुनौती

देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है. सरकार ऐसे में वह तमाम प्रयास कर रही है जिससे कोरोना के प्रकोप को रोका जा सके. लेकिन कोरोना काल में सबसे बड़ी समस्या के रूप में अफवाह भी निकलकर सामने आई है. अफवाहों के जरिए बार-बार देश का माहौल खराब करने की कोशिश असामाजिक तत्वों द्वारा की जा रही है. तकरीबन 25000 से अधिक मामले सामने आने के बाद भारत सरकार कोरोनावायरस की रफ्तार रोकने की कोशिश में लगी है लेकिन अफवाहों ने सरकार को चुनौती दी है. सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर जारी है. अब नई अफवाह सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसका प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो ने खंडन किया है.
दरअसल, ट्विटर और व्हाट्सएप पर एक खबर चल रही है कि केंद्र सरकार की ओर से कोरोना सहायता योजना WCHO के तहत सभी को ₹1000 की सहायता राशि दी जा रही है. इसके लिए आपको फार्म भरना होगा जो फर्जी है क्योंकि सरकार के द्वारा ऐसी कोई योजना नहीं चलाई जा रही है.

व्हाट्सएप पर चल रही फर्जी योजना

असामाजिक तत्वों ने व्हाट्सएप पर एक फर्जी फार्म वायरल किया है. एक साइट के जरिए यह फर्जीवाड़ा किया जा रहा है. http://paymeurl.com/ लिंक दिया गया है. जब आप लिंक पर क्लिक करते हैं तो एक फार्म खुलता है.सबसे पहले इसमें आपको अपना नाम पिता का नाम और राज्य भरने के लिए कहा जाता है. इसके भरने के बाद दूसरा पेज खुल जाता है जिसमें आपको मोबाइल नंबर और पिन कोड भरने के लिए कहा जाता है. इस पूरी प्रक्रिया के बाद आपसे मैसेज को 5 लोगों को शेयर करने के लिए कहा गया है.

प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो ने अफवाह का किया खुलासा

सरकार के लिए संकट बने इस अफवाह पर प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो को सामने आना पड़ा. प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो के फैक्ट चेक अकाउंट से एक ट्विट किया गया है. इस ट्वीट में लिखा गया है

दावा: कोरोना सहायता योजना WCHO की तरफ से ₹1000 सहायता राशि सभी को दी जा रही है. फार्म भरें और ₹1000 प्राप्त करें.

PIBFactCheck: केंद्र सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना नहीं चलाई जा रही. मैसेज में किया गया दावा, दिया गया लिंक फर्जी है. कृपया जालसाजों से सावधान रहें.

देश की वह बड़ी अफवाहें जिन्होंने सरकार की मुश्किलें बढ़ाई

-पहले चरण के लॉक डाउन के ऐलान के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद से पलायन की तस्वीरें सामने आई इनमें अधिकतर लोग अफवाहों के शिकार थे जिनकी संख्या हजारों में थी.
-दूसरे चरण के लॉक डाउन के बाद भी मुंबई में अफवाह फैली कि ट्रेन चल रही है. कुछ ही समय में 5000 से अधिक लोग इकट्ठा होकर स्टेशन पहुंच गए. अफवाह इतनी तेज थी कि प्रशासन को कानों कान खबर तक ना हुई. सबसे बड़ी समस्या यह है कि अफवाह की रफ्तार कोरोनावायरस रफ़्तार से तेज है.
-ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश में सामने आया जब प्रदेश सरकार में हॉटस्पॉट्स इलाकों को सील करने की बात कही. ऐसे में अफवाह उड़ाई गई की 15 जिले पूरी तरह से बंद हो रहे हैं. बाजारों में भीड़ जुट गई सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ गई.
-इतना ही नहीं कोरोना वायरस काल में मलेरिया की दवाई को लेकर भी अफवाह फैलाई गई. अमेरिका ने भारत से मलेरिया की दवाई मांगी तो देश में यह अफवाह फैलाई गई कि मलेरिया की दवाई कोरोना के इलाज में कारगर है. बाजार से देखते ही देखते मलेरिया की दवाई गायब हो गई.

-इतना ही नहीं कुछ जगहों पर अन्य बीमारी से मरने वाले लोगों की मौतों को भी कोरोना से जोड़ दिया गया. इसका सीधा असर ऐसा हुआ कि लोग सांत्वना तक देने से कतरा ने लगे.

ऐसे में लगता है कि कोरोना वायरस से लड़ाई के साथ-साथ अफवाहों के साथ भी देश को लड़ाई लड़नी होगी. क्योंकि यह अफवाहें ना केवल चुनौती देती हैं बल्कि व्यवस्था को ध्वस्त करने का काम भी करती है. इसलिए आप भी अफवाहों से दूर रहिए सुरक्षित रहिए.

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Prakash Pandey

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