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एक्सक्लूसिव

एक धुंधली तस्वीर से 25 जिलों के अधिकारी धोखा खा गए, अनामिका नहीं, प्रिय भी नहीं लोग इस नाम से जानते हैं टीचर को, सबसे बड़ा सच

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के 25 जिलों को अनामिका शुक्ला नाम के धुंधला दस्तावेज ने आंखों में धूल झोंक दिया. 25 जिलों के अधिकारी यह पहचानने में नाकामयाब रहे कि फोटो अनामिका शुक्ला की और सामने खड़ी लड़की अलग-अलग है. बात हो रही है अनामिका शुक्ला बनकर 25 जिलों में कस्तूरबा गांधी स्कूलों में बतौर शिक्षिका काम कर रही फर्जी प्रिया जाटव की.


प्रिया जाटव वही नाम है जिसने अनामिका शुक्ला के नाम पर 25 जिलों में एक साथ नौकरी को अंजाम दिया. शनिवार को पुलिस ने अनामिका शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया लेकिन खुलासा होते ही सबके होश उड़ गए. वजह थी कि लड़की अनामिका शुक्ला नहीं बल्कि प्रिया जाटव है. प्रिया अनामिका शुक्ला के दस्तावेजों पर कस्तूरबा गांधी स्कूल में नौकरी कर रही थी.
जैसे-जैसे पुलिस पूछताछ कर रही थी. प्रिया के राज उठ रहे थे. इस राज में से ही एक नाम निकल कर ‘राज’ भी आया. यह वही राज था जिसके बारे में प्रिया जाटव ने चौंकाने वाला खुलासा किया. प्रिया के मुताबिक उसकी मुलाकात मैनपुरी के रहने वाले राज नाम के व्यक्ति से गोंडा के रघुकुल विद्यापीठ में बीएससी की पढ़ाई करते समय हुई थी. राज ने ही प्रिया को नौकरी करने की सलाह दी और डेढ़ लाख रुपए में नौकरी लगाने का वायदा भी किया. बकौल प्रिया उसने राज को डेढ़ लाख रुपए टीचर की नौकरी लगवाने के लिए 2018 में दिए. प्रिया ने यह भी बताया कि राज ने उसके मूल दस्तावेज अपने पास रख लिए और 2018 में उसे नियुक्ति पत्र दिलवा दिया.
इस मामले को लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजलि अग्रवाल ने खुलासा किया और बताया कि 2018 में कासगंज के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रिया जाटव ने नौकरी पा ली थी.


गिरफ्तार होने के बाद शिक्षिका ने पुलिस को जो अपनी पहचान बताई वह और चौंकाने वाली थी. प्रिया के मुताबिक फर्रुखाबाद जिले के लखनपुर कायमगंज के रहने वाले महिपाल की बेटी है जबकि विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक अनामिका शुक्ला पुत्र सुभाष चंद्र शुक्ला निवासी लखनपुर जिला फर्रुखाबाद कस्तूरबा विद्यालय में पूर्णकालिक विज्ञान शिक्षिका के रूप में तैनात हुई थी.
अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी कर रही प्रिया जाटव का राज ही खत्म नहीं होता है. इसके बाद एक और सबसे बड़ा चौंकाने वाली जानकारी सामने आती है. कायमगंज क्षेत्र के गांव राजपालपुर के प्रधान अनिल गंगवार के मुताबिक कासगंज में गिरफ्तार शिक्षिका प्रिया नहीं बल्कि उसके गांव की सुप्रिया है. उसकी यह पहचान भी अखबारों में और मीडिया में फोटो आने के बाद से ग्रामीणों ने उजागर की है. ग्रामीणों की माने तो कायमगंज के एक बेसिक स्कूल के शिक्षक में सुप्रिया की नौकरी मैनपुर में कुछ साल पहले लगवाई थी.
प्रिया ने जो पता पुलिस को बताया उस गांव के प्रधान ने नया खुलासा कर दिया. लखनपुर के प्रधान बबलू पालने इस मामले में कहा है कि प्रिया नाम की कोई भी युवती या महिपाल नाम का व्यक्ति उनके गांव में नहीं रहता है.
पुलिस जितना इस मामले को खोल रही है यह मामला उतना ही उलझता हुआ नजर आ रहा है. हालांकि कासगंज के सीओ आरके तिवारी ने बताया कि युवती ने अपना नाम प्रिया बताया है.
सबसे हैरान कर देने वाली बात इस पूरे मामले में 25 जिलों के अधिकारियों का अनामिका के दस्तावेजों में छपी फोटो के आधार पर सत्यापन को लेकर है. दरअसल सभी अधिकारियों ने अनामिका शुक्ला के धुंधले दस्तावेजों की दुहाई दी है. उनका कहना है कि अनामिका के दस्तावेजों में छपी फोटो स्पष्ट नहीं थी इस कारण उसकी पहचान नहीं हो सकी. केवल रोल नंबर के आधार पर ही सत्यापन होते रहे और उसकी जगह कोई और नौकरी करता रहा. यह अपने आप में बड़ा हैरान करने वाला जवाब है. यह तो समय के गर्भ में छुपा है कि इसके पीछे कितनी बड़ी सच्चाई निकल कर सामने आने वाली है.
सरकार द्वारा शुरू की गई मानव सेवा पोर्टल पर जब शिक्षकों की आईडी फीडिंग का काम शुरू हुआ तब एक ही नाम से कई जगह नौकरी करने का यह मामला जगजाहिर हुआ. दरअसल डिजिटल डाटा बेस में शिक्षकों के पर्सनल रिकॉर्ड जुड़ने और प्रमोशन की तारीख की जरूरत पड़ती है. पहली बार रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद यह सच्चाई निकलकर सामने आई कि अनामिका शुक्ला एक भी पर्सनल डिटेल्स के साथ 25 स्कूलों में सूचीबद्ध थी. इस दौरान अनामिका ने पिछले 13 महीने में 25 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में करीब 1 करोड रुपए के मानदेय का लाभ लिया.
पूरा मामला गहराई से जांच किया जा रहा है. माना जा रहा है कि इसके पीछे बहुत सारे राज छिपे हैं. मैनपुरी के राज से लेकर व्यवस्था के राज तक क्या क्या कुछ निकल कर सामने आएगा यह देखना दिलचस्प होगा.