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Corona effect: ईद के त्यौहार पर भी देवबंद के बाजारो में पसरा रहा पूरी तरह सन्नाटा, गली-मोहल्लो तक में भी नही दिखी वो खुशी

-ईद के त्यौहार पर भी देवबंद नगर और यहां के बाजारो में पसरा रहा पूरी तरह सन्नाटा, गली-मोहल्लो तक में भी नही दिखी वो खुशी


-कोरोना के बढते मामलो के बाद से करीब एक माह से भी ज्यादा से पूरी तरह से सील चल रहा है देवबंद नगर


-ईद के त्यौहार पर भी देवबंद में नही मिल सकी किसी भी तरह की कोई छूट


-अबकी बार ईद पर भी देवबंद में रेडीमेट गारमेंटस, कपडे, जूते और मिठाई समेत सभी तरह की दुकानों के स्वामी अपनी-अपनी दुकानो के शटर तक नहीं उठा पाए


-अहतियात के तौर पर नगर में पुलिस और आरएएफ तैनात रही

देवबंद (गौरव सिंघल) । देवबंद नगर में ईद के त्यौहार की रौनक इस बार देशभर में चल रहे लाकडाउन ने पूरी तरह से छीन ली है। कोरोना वायरस के बढते प्रकोप के चलते पिछले एक माह से भी ज्यादा से देवबंद नगर पूरी तरह से सील चल रहा है। यहां पर सभी तरह के कार्य पूरी तरह से बंद किए गए है। अबकी बार देवबंद के बाजार और नगर पूरी तरह से बंद होने के चलते रेडीमेट गारमेंटस, कपडे, जूते और मिठाई समेत सभी तरह की दुकानों के स्वामी अपनी दुकानो के शटर तक नहीं उठा पाए। शायद जीवन में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब ईद की मिठास भी देवबंद नगर से गायब हो गई हो। हर वर्ष तो ईद के त्यौहार से करीब 10-12 दिन पहले ही देवबंद नगर के बाजारो में त्यौहार की खरीदारी के लिए भारी भीड जमा हो जाया करती थी। लेकिन इस बार कोरोना के प्रकोप ने सब पर ही पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया। हमारे देश हिंदुस्तान में सभी धर्मो के त्यौहार बडी ही आपसी एकता और हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते है और यहां का यह संदेश पूरी दुनिया में पहुंचता है। ईद के त्यौहार में तीस रोजों की इबादत, संयम और नेकियां शामिल होती है। ऐसे में ईद अपने आप लहजे, जुबां और रिश्तों में मिठास घोल देती है। पूरी दुनिया में अचानक मौत बनकर आए कोरोना वायरस ने इस बार ईद की खुशियों में भी ग्रहण सा लगा दिया है। मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे, चर्च आदि सभी बंद है। इबादत करने जाने वालों पर पाबंदिया लगी है। कोरोना वायरस का प्रकोप बढने के बाद अबकी बार तो देवबंद नगर में बडों का तो छोडिये बच्चों का उल्लास भी ईद के त्यौहार पर पूरी तरह से गायब ही दिखाई दिया। अबकी बार तो ईद की मुबारक बाद भी लोग न तो एक-दूसरे को गले मिलकर दे सके और न ही हाथ मिलाकर दे पाए। फोन पर लोगो ने जरूर एक-दूसरे को ईद की मुबारक बाद दी। जीवन में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब ईद लोगो ने अपने-अपने घरों में ही मनाई। ईद की नमाज भी अबकी बार ईदगाह और मस्जिदो में नही पढी जा सकी। प्रेम और भाईचारे का त्यौहार ईद-उल-फितर, लॉकडाउन के चलते फीका-फीका सा रहा। हर वर्ष तो पूरे रमजान माह से ही नगर में उत्सव का माहौल रहा करता था। मगर कुदरत का कहर बनकर आए कोरोना वायरस से देवबंद नगर में चारों ओर उदासी और सूनापन ही बना रहा। ईद के त्यौहार की खुशी रमजान प्रारम्भ होने के साथ ही मुस्लिम समाज के लोग महसूस करने लगते है। मुस्लिम समाज के लोग ईद और रमजान के लिए पूरे वर्ष तैयारी करते है। प्रत्येक मुस्लिम पाई-पाई बचाकर इस त्यौहार को अधिक से अधिक खुशी के साथ मनाना चाहता है और त्यौहार का इन्तजार भी पूरे वर्ष बेसब्री से करते है। उनमे सबसे अधिक खुशी बच्चो को तो इस बात को लेकर होती है कि ईद पर उनको नये-नये कपडे, जूते और अन्य सामान मिलेगे। इस बार उदासी का बडा कारण कोरोना का लगा ब्रेक है। लॉकडाउन और जनपद के रेड जोन के होने के चलते कोई चाहकर भी अपने परिचित, मित्र या रिश्तेदार के यहां नही जा सका। हर वर्ष जो हिन्दू अपने परिचित और मुस्लिम मित्रो के यहॉ जाते थे और उनको ईद की शुभकामनाये देते थे वो भी अबकी बार नही जा सके। कुछ मिलाकर अबकी बार तो कोरोना के कारण ईद की मिठास फीकी ही रह गई। अहतियात के तौर सुरक्षा की दृष्टि से देवबंद नगर में पुलिस और आरएएफ की तैनात की गई है।

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Prakash Pandey

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