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दिवाली पर पटाखों को लेकर जिलाधिकारी ने तय की गाइडलाइन, एक-एक बात जान लेना जरूरी है

उत्तर प्रदेश का सहारनपुर. पटाखे चलाने को लेकर चल रही कुश्ती के बीच जिलाधिकारी अखिलेश सिंह का नया आदेश आ गया है.
जिला मजिस्ट्रेट अखिलेश सिंह ने अस्थायी शेड से आतिशबाजी भण्डारण एवं विक्रय हेतु विस्फोटक नियम 2008 (संशोधित) के अन्तर्गत जारी की जाने वाली अनुज्ञप्तियों के संबंध में प्राविधान, अनुज्ञप्तिधारियों के लिये आवश्यक दिशा निर्देश प्रभारी अधिकारी आयुद्ध एवं सभी उप जिला मजिस्ट्रेट को दिए हैं.

सुरक्षित स्थानों पर रखे जाएं पटाखे

जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि

  • आतिशबाजी अज्वलनशील सामग्री के बने शैड मे रखे जाएंगे.जो इस प्रकार से बंद और सुरक्षित होगा जिससे कि अप्राधिकृत व्यक्तियों की उसमें पहुंच को निवारित किया जा सके.
  • आतिशबाजी के कब्जे और विक्रय के शैड एक दूसरे से कम से कम तीन मीटर और सुरक्षित कार्य के पचास मीटर की दूरी पर होंगे.
  • शैड में या शैडों की सुरक्षित दूरी के भीतर तेल से जलने वाले लैंपों, गैस लैंपों या खुली बत्तियों का उपयोगी नहीं किया जाएगा.
  • विद्युत बत्तियां यदि उपयोग की जाती है दीवाल या छत पर फिक्स किये जाएंगे.
  • प्रत्येक दुकान के स्वीचों को दीवालों पर दृढ रूप से फिक्स किया जाएगा और एक मुख्य स्विच की शेडों की प्रत्येक पंक्ति में व्यवस्था की जाएगी.
  • आतिशबाजी की किसी शैड के पचार मीटर के भीतर प्रदर्शन अनुज्ञात नहीं किया जाएगा.
  • एक समूह में पचास से अधिक दुकान अनुज्ञात नहीं की जाएगी.
  • आतिशबाजी की दुकानों के ऐसे समूह के लिए प्राथमिक चिकित्सा, एम्बूलेन्स और कम से कम दो अग्निशमन वाहन उपलब्ध होंगे.
  • प्रमुख स्थानों पर स्थानीय भाषा में एक चेतावनी बोर्ड “विस्फोटक या खतरनाक पदार्थ” प्रदर्शित किया जाएगा.

नियमों का सख्ती से करें पालन

  • जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने कहा कि विस्फोटक नियम, 2008 के नियम 78 से 88 का सख्ती से पालन करें.
  • अनुज्ञप्ति प्ररूप एलई-3 एवं एलई-5 की शर्तों का पालन करें.
  • क्लोरेट युक्त आतिशबाजी जैसे कि रंगीन/तारा बत्तियां एवं रोल/डाॅट कैप्स को दुकान में न रखा जाए न दुकान से विक्रय किया जाए.
  • आतिशबाजी मैगजीन/स्टोरहाउस में उक्त उल्लिखित क्लोरेट युक्त आतिशबाजी का भण्डारण प्ररूप एलई-3 में जारी अनुज्ञप्ति के साथ संलग्न अनुमोदित आरेखण में दर्शाए गए निर्दिष्ट कम्पार्टमेन्ट में ही किया जाना चाहिए.
  • केवल अधिकृत आतिशबाजी खरीदें व बेचें जिन पर विनिर्माता का नाम एवं आतिशबाजी को चलाने एवं उसके फंक्शन संबंधी विस्तृत विनिर्देश उल्लिखित हों.
  • 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को आतिशबाजी न बेचें जब तक कि उनके साथ कोई व्यस्क न हो.
  • सुनिश्चित करें कि दुकान का आपातकालीन निकास पूर्ण रूप से खुला हुआ हो एवं उस मार्ग में कोई अवरोध न हों.
  • दुकान के अन्दर आतिशबाजी या ग्राहकों की भीड न होने दें ताकि आतिशबाजी की हैंडलिंग के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध रहे.
  • दुकान में कोई भी खुली आतिशबाजी प्रदर्शित न करें/न रखें.
  • आतिशबाजी कब्जे में रखने या विक्रय के दौरान धूम्रपान या किसी प्रकार के आग के खुले स्त्रोत युक्त लैम्प, लालटेन, मोमबत्ती आदि की अनुमति न दें.

सुरक्षा को लेकर यह हैं निर्देश

जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने कहा कि सेल्समैन एवं कर्मचारियों को आतिशबाजियों की परिसंकटमय प्रकृति एवं पैकेट्स तथा डिब्बों की सुरक्षित हैंडलिंग के बारे में पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए.

पर्याप्त संख्या में अग्निशामक यन्त्र एवं बालू से भरी बाल्टियां उपलब्ध रखें एवं सभी संबंधित व्यक्ति अग्निशामक यन्त्रों तथा स्थानीय फायर ब्रिगेड के साथ सहयोग करने हेतु पर्याप्त प्रशिक्षित होने चाहिए.

दुकान के सामने कोई अस्थाई शैड या प्लेटफार्म न बनाएं.

ढीले-ढाले कनेक्शन युक्त किसी विद्युत प्रकाश का प्रयोग न करें.

सुरक्षा के हित में दुकान के सामने आतिशबाजी के डिब्बे (खाली या भरे हुए) एकत्रित न करें.

पटाखों की आवाज के भी मानक तय

जिलाधिकारी ने आगे कहा कि

अधिसूचना संख्या जीएसआर 682(ई) 05 अक्टूबर 1999 के अनुसार फायर क्रैकर्स के ध्वनि मानकों के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय 18 जुलाई 2005 में दिये गए निर्देशों का अनुपालन करें.

विक्रय हेतु भण्डार किये गये किसी भी आतिशबाजी में लिथियम, एन्टीमनी, मरकरी, आर्सेनिक, लेड एवं स्ट्रोन्सियम क्रोमेट के योगिक प्रदार्थ नही होने चाहिए.

लडी माला सहित ऐसी आतिशबाजी जिसकी आवास सीमा 125 डीबी(ए1) से अधिक न हो, उसका उत्पादन, विक्रय तथा प्रयोग पहले से ही प्रतिबंधित किया जा चुका है. इस प्रकार की आतिशबाजी का उत्पादन विक्रय तथा प्रयोग गैर कानूनी है और जो व्यक्ति इसका उल्लंघन करता पाया जाएगा वह नियमानुसार दण्ड का अधिकारी होगा.

दीवाली और आगामी त्यौहारों की दृष्टि से निम्नलिखित सावधानियां बरती जाएं.

कहां से खरीदें पटाखे

जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने कहा कि

  • केवल विश्वसनीय व लाइसेंसधारक विक्रेता से ही आतिशबाजी खरीदें.
  • हमेशा व्यस्क व्यक्ति के निर्देशन में ही आतिशबाजी का प्रयोग किया जाए.
  • आतिशबाजी पर अंकित सुरक्षा उपायों का कडाई से पालन किया जाए.
  • आतिशबाजी को सुलगाने हेतु मोमबत्ती या अगरबत्ती का प्रयोग किया जाए.
  • प्रारंभिक छुटपुट आग को, बुझाने हेतु हमेशा पानी से भरी बाल्टी तैयार रखें.
  • हवाई आतिशबाजी को हमेशा सुरक्षित भूमि क्षेत्र में ही छुटाएं.
  • आतिशबाजी को पानी में सही प्रकार से भिगोकर ही भेजें.
  • माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार ग्रीन (पर्यावरण अनुकूल) आतिशबाजी का उपयोग करें.

इन पटाखों पर पाबंदी

जिला मजिस्ट्रेट ने निर्देश दिये कहा कि आतिशबाजी जिसमें एक दूसरे से जुडे हुए आतिशबाजी की लडी भी सम्मिलित है एवं जिनका ध्वनि लेवल चार मीटर की दूरी पर जलाने से 125 डीबी (ए1) या 145 डीबी(सी) पीके से अधिक है उनका निर्माण, विक्रय एवं उपयोग पर पाबंदी लगा दी है.

पटाखे छुटाने के लिये ये है गाइडलाइन

रात 10 से 06 बजे के बीच में आतिशबाजी न करें.

हाथ में पकडकर पटाखे न सुलगाएं.

पहले नीचे रखें, फिर उन्हे सुलगाएं तथा वहां से हट जाएं.

किसी भी आतिशबाजी को सुलगाने हेतु किसी डिब्बे में न रखें.

सही तरीके से कार्य न करने वाले किसी भी पटाखे का प्रयोग में न लाएं किसी भी ऐसे स्थान पर हवाई आतिशबाजी न छुडाएं जंहा उपर आसमान में जाने के लिए रूकावट हो. जैसे पेड, पत्ते, तार इत्यादि.

खुली इमारत के पास कभी भी आतिशबाजी न सुलगाएं.

खुली खिडकी या खुले दरवाजों से भी हवाई आतिशबाजी अन्दर जाकर आग का कारण बन सकती है.

घरों के भीतर आतिशबाजी का प्रयोग न करें.

सार्वजनिक आने जाने के रास्ते पर पटाखे न जलाएं.

कभी भी अपने पटाखे का निर्माण या उन पर प्रयोग न करें.

बुझे पटाखों को पुनः जलाने की कोशिश न करें. 15-20 मिनट इंतजार करें तदोपरान्त उसे पानी से भी बाल्टी में डूबा दें.

नकली व अवैध पटाखों का प्रयोग न करें. बच्चों को अकेले पटाखे जलाने की अनुमति न दें.

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Prakash Pandey

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